किसानों के सपूतों ने हासिल किया मेडल
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चित्रकूट। विकलांग विश्वविद्यालय में अपनी मेधा का डंका बजाने वालों में बुंदेलखंड के किसानों के बेटे और बेटियां हैं। दैवी आपदाओं से जूझ रहे किसान परिवारों ने इन मेधावियों को दिव्यांगता के बावजूद शिक्षा क्षेत्र का ‘हीरो’ बना दिया। उनको सोमवार को इसका इनाम भी मिला।जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में बांदा जनपद के करतल गांव निवासी किसान प्रमोद शुक्ला के बेटे राहुल शुक्ला को कुलाधिपति (चांसलर) पदक से सम्मानित किया गया। उसने यूनिवर्सिटी टॉप की है। उसे यह सम्मान मास्टर आफ म्यूजिक में मिला है। मात्र 12 बीघे के किसान के बेटे ने बताया कि जगद्गुरु के विश्वविद्यालय में मेधावी बनने के लिए कुछ खास खर्च की जरूरत नहीं पड़ी। उसे अपने कुलाधिपति जगद्गुरु पर फक्र है। राहुल गायन क्षेत्र में अपना भविष्य चमकाना चाहता है।
गोल्ड मेडल हासिल करने वाली बीएड सामान्य की छात्रा नीतू सिंह भी बांदा जनपद के तिंदवारी कस्बे के किसान घराने की है। पिता देशराज सिंह किसान हैं। गोल्ड मेडल की सूचना उसकी सहेली शिला पाल ने दी। नीतू ने बताया कि पहले तो उसे विश्वास नहीं हो रहा था। नेट पर देखा तो खुशी से आंसू छलक आए। किसानों के अलावा भारतीय सेना के जवान की बेटी प्रतिभा मिश्रा ने भी एमएफए (मास्टर आफ फाइन आर्ट) में गोल्ड मेडल हासिल किया है। वह मूकबधिर है। पिता चंद्रप्रकाश मिश्रा सेना में हैं और लखनऊ में तैनात हैं। प्रतिभा की तमन्ना टीचर बनने की है। विश्वविद्यालय में बीए के टॉपर सदानंद प्रजापति को भी गोल्ड मेडल प्राप्त हुआ है। वह आजमगढ़ का रहने वाला है। सदानंद की तमन्ना संगीत क्षेत्र में तबला शिक्षक बनने की है। बुंदेलखंड की ही एक अन्य छात्रा पूजा गुप्ता महोबा जनपद के खरेला कस्बे की है। उसे बीएड में स्वर्ण पदक हासिल हुआ है। उसके 75.85 फीसदी अंक है। पूजा भी किसान परिवार से है। शाहजहांपुर की मिथलेश कुमारी को एमएड में गोल्ड मेडल मिला। मिथलेश ने बताया कि उसने कभी सोच भी नहीं था, आज बहुत गर्व महसूस हो रहा है। मिथलेश की तमन्ना टीचर बनने की है।
मेधावियों भी चाहते हैं केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा
चित्रकूट। विकलांग विश्वविद्यालय के सभी मेधावियों की बस एक ही तमन्ना है कि उनके विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिले। उनका कहना था कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य स्वयं भी इसके लिए प्रयासरत हैं। केंद्र और राज्य सरकारों को इस पर जरूर सकारात्मक रुख अपना कर विचार करना चाहिए। समारोह में विश्वविद्यालय जीवन पर्यंत कुलाधिपति जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने भी समारोह में राष्ट्रपति और राज्यपाल से यही मांग की।