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अद्भुत नजारा: दिवाली पर बुंदेलखंड में दिवारी लोक नृत्य पर ढोलक और लाठियों पर जमकर थिरके बुंदेलखंडी
Fri, 05 Nov 2021 01:05 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 05 Nov 2021 01:05 PM IST
सार
बुंदलखंड के महोबा, हमीरपुर, जालौन और बांदा में परंपरागत 'दिवारी नृत्य' की धूम मची हुई है। जिसमें ढोलक की थाप पर थिरकते जिस्मों के साथ लाठियों का अचूक वार करते हुए युद्ध कला को दर्शाने वाले नृत्य को देख कर लोग दांतों तले अंगुलियां दबाने पर मजबूर हो जाते हैं।
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दिवारी लोक नृत्य
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
बुंदेलखंड के कई जिलों में पारंपरिक लट्ठ मार दिवाली भी मनाई जाती है। यह बुंदेलखंड का पारंपरिक दिवारी नृत्य है जो कि ढोलक, ढाल और लाठियों के साथ किया जाता है। बुंदेलखंड के कई इलाकों में आज भी ये लट्ठ मार दिवाली काफी धूमधाम से मनाई गई।
चित्रकूट में दीपावली के दूसरे दिन बुंदेलखंडीयों का यह नृत्य विशेष महत्वपूर्ण है। इसको देखने के लिए लोग दूर-दूर से आकर चित्रकूट में ठहरते हैं। दीपावली के दूसरे दिन ढोलक की थाप पर चटकती हुई लाठियां और थिरकते हुए लोगों का आनंद लेते हैं। बता दें कि बुंदेलखंड में गोवर्धन पूजा, मौनवृत, दिवारी नृत्य की धूम है।
बुंदेलखंड के कई इलाकों में मनाई जाने वाली ये लट्ठ मार दिवाली काफी रोमांचक होती है। बुंदेलखंड के जनपद महोबा, हमीरपुर, जालौन और बांदा में परंपरागत ‘दिवारी नृत्य’ की धूम मची हुई है। जिसमें ढोलक की थाप पर थिरकते जिस्मों के साथ लाठियों का अचूक वार करते हुए युद्ध कला को दर्शाने वाले नृत्य को देख कर लोग दांतों तले अंगुलियां दबाने पर मजबूर हो जाते हैं। दिवारी नृत्य करते युवाओं के पैंतरे देखकर ऐसा लगता है मानों वो दिवाली मनाने नहीं बल्कि युद्ध का मैदान जीतने निकले हों।
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चित्रकूट में दीपावली के दूसरे दिन बुंदेलखंडीयों का यह नृत्य विशेष महत्वपूर्ण है। इसको देखने के लिए लोग दूर-दूर से आकर चित्रकूट में ठहरते हैं। दीपावली के दूसरे दिन ढोलक की थाप पर चटकती हुई लाठियां और थिरकते हुए लोगों का आनंद लेते हैं। बता दें कि बुंदेलखंड में गोवर्धन पूजा, मौनवृत, दिवारी नृत्य की धूम है।
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बुंदेलखंड के कई इलाकों में मनाई जाने वाली ये लट्ठ मार दिवाली काफी रोमांचक होती है। बुंदेलखंड के जनपद महोबा, हमीरपुर, जालौन और बांदा में परंपरागत ‘दिवारी नृत्य’ की धूम मची हुई है। जिसमें ढोलक की थाप पर थिरकते जिस्मों के साथ लाठियों का अचूक वार करते हुए युद्ध कला को दर्शाने वाले नृत्य को देख कर लोग दांतों तले अंगुलियां दबाने पर मजबूर हो जाते हैं। दिवारी नृत्य करते युवाओं के पैंतरे देखकर ऐसा लगता है मानों वो दिवाली मनाने नहीं बल्कि युद्ध का मैदान जीतने निकले हों।
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