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Chitrakoot News: मृतक की पहचान बनी पहेली, 234 मोबाइल नंबर सर्विलांस पर
Thu, 17 Sep 2026 12:02 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Thu, 17 Sep 2026 12:02 AM IST
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पहाड़ी (चित्रकूट)। अशोह गांव के पास भाजपा आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ के क्षेत्रीय संयोजक के खाली प्लॉट में हुए जोरदार धमाके ने पुलिस की नींद उड़ा दी है।
पुलिस मृत युवक की पहचान भी नहीं कर पाई है। मामले में फिलहाल पुलिस ने 234 मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगाए हैं। बीते 12 सितंबर की शाम करीब पांच बजे अशोह के पास एक प्लॉट में जोरदार धमाका हुआ था, जिसमें एक युवक के चीथड़े उड़ गए थे।
घटनास्थल से अब तक सिर्फ दो कटे और बुरी तरह जले हुए पैर ही मिले हैं जबकि सिर और धड़ का कोई सुराग नहीं लगा है। पुलिस खेतों, झाड़ियों और आसपास के प्लॉटों में लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही है।
बुधवार को पुलिस ने बरामद अवशेषों का पोस्टमार्टम कराया, लेकिन पहचान के लिए कोई सुराग हाथ नहीं लगा। पुलिस ने अब सर्विलांस का सहारा लिया है। अशोह, बाबूपुर और आसपास के गांवों के 234 से अधिक मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लगाया गया है, ताकि पता चल सके कि धमाके के समय कौन-कौन सक्रिय था और मृतक किसके संपर्क में था। इसके अलावा पुलिस ग्रामीणों, खेतों में काम करने वाले मजदूरों और चरवाहों से भी पूछताछ कर रही है।
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पुलिस के सामने कई सवाल हैं, कि युवक उस सुनसान प्लॉट में कब से मौजूद था? वहां विस्फोटक क्यों तैयार किया जा रहा था? क्या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश है? धमाके के बाद से पहाड़ी, अशोह, बाबूपुर समेत आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है। लोग घरों से बाहर निकलने में भी डर रहे हैं। इस बीच सियासत भी तेज हो गई है।
भाजपा के पूर्व विधायक आनंद शुक्ला ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर मामले की एनआईए से जांच कराने की मांग की है। वहीं डीआईजी राजेश एस और एसपी अरुण कुमार सिंह ने घटनास्थल का निरीक्षण कर फॉरेंसिक टीम को जरूरी दिशा-निर्देश दिए हैं।
उधर, पहाड़ी थानाध्यक्ष निशिकांत राय ने बताया कि फॉरेंसिक रिपोर्ट और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य आने के बाद ही धमाके की पूरी तस्वीर साफ हो पाएगी। फिलहाल पुलिस हर एंगल से जांच में जुटी है।
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खदानों में मजदूरों की तलाश में जुटी पुलिस
चित्रकूट। विस्फोट की जांच में पुलिस ने अब खदानों में काम करने वाले मजदूरों पर फोकस किया है। बुधवार को पुलिस टीमों ने भरतकूप क्षेत्र की खदानों में पहुंचकर जानकारी जुटाई।
पुलिस यह पता लगा रही है कि धमाके के बाद से कोई मजदूर लापता तो नहीं है। विस्फोट में एक व्यक्ति की मौत हुई थी, लेकिन चार दिन बाद भी उसकी पहचान नहीं हो सकी है। आशंका है कि मृतक खदानों में विस्फोट का काम करने वाला कोई मजदूर हो या अवैध रूप से डेटोनेटर-जिलेटिन ले जाने वाला व्यक्ति हो। पहचान के लिए पुलिस आसपास के ग्रामीणों, चरवाहों और खदान संचालकों से पूछताछ कर रही है। इसके साथ ही घटनास्थल की ओर जाने वाले रास्तों पर लगे सीसीटीवी कैमरे भी खंगाले जा रहे हैं।
एसपी अरुण कुमार सिंह ने राजापुर सीओ के नेतृत्व में दो विशेष टीमें गठित की हैं। एक टीम मृतक की शिनाख्त के लिए चित्रकूट के साथ कौशांबी जिले के गांवों में जानकारी जुटा रही है और थानों में दर्ज गुमशुदगी की रिपोर्ट खंगाल रही है। दूसरी टीम विस्फोट में प्रयुक्त सामग्री के स्रोत का पता लगा रही है।
विस्फोट स्थल से मिले अवशेषों को फॉरेंसिक लैब भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगा कि धमाका जिलेटिन, डेटोनेटर या देसी बम से हुआ था। विस्फोटक का मामला होने से एहतियातन प्रारंभिक रिपोर्ट एटीएस और एनआईए को भी भेजी गई है। (संवाद)
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पुलिस मृत युवक की पहचान भी नहीं कर पाई है। मामले में फिलहाल पुलिस ने 234 मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगाए हैं। बीते 12 सितंबर की शाम करीब पांच बजे अशोह के पास एक प्लॉट में जोरदार धमाका हुआ था, जिसमें एक युवक के चीथड़े उड़ गए थे।
घटनास्थल से अब तक सिर्फ दो कटे और बुरी तरह जले हुए पैर ही मिले हैं जबकि सिर और धड़ का कोई सुराग नहीं लगा है। पुलिस खेतों, झाड़ियों और आसपास के प्लॉटों में लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही है।
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बुधवार को पुलिस ने बरामद अवशेषों का पोस्टमार्टम कराया, लेकिन पहचान के लिए कोई सुराग हाथ नहीं लगा। पुलिस ने अब सर्विलांस का सहारा लिया है। अशोह, बाबूपुर और आसपास के गांवों के 234 से अधिक मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लगाया गया है, ताकि पता चल सके कि धमाके के समय कौन-कौन सक्रिय था और मृतक किसके संपर्क में था। इसके अलावा पुलिस ग्रामीणों, खेतों में काम करने वाले मजदूरों और चरवाहों से भी पूछताछ कर रही है।
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पुलिस के सामने कई सवाल हैं, कि युवक उस सुनसान प्लॉट में कब से मौजूद था? वहां विस्फोटक क्यों तैयार किया जा रहा था? क्या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश है? धमाके के बाद से पहाड़ी, अशोह, बाबूपुर समेत आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है। लोग घरों से बाहर निकलने में भी डर रहे हैं। इस बीच सियासत भी तेज हो गई है।
भाजपा के पूर्व विधायक आनंद शुक्ला ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर मामले की एनआईए से जांच कराने की मांग की है। वहीं डीआईजी राजेश एस और एसपी अरुण कुमार सिंह ने घटनास्थल का निरीक्षण कर फॉरेंसिक टीम को जरूरी दिशा-निर्देश दिए हैं।
उधर, पहाड़ी थानाध्यक्ष निशिकांत राय ने बताया कि फॉरेंसिक रिपोर्ट और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य आने के बाद ही धमाके की पूरी तस्वीर साफ हो पाएगी। फिलहाल पुलिस हर एंगल से जांच में जुटी है।
खदानों में मजदूरों की तलाश में जुटी पुलिस
चित्रकूट। विस्फोट की जांच में पुलिस ने अब खदानों में काम करने वाले मजदूरों पर फोकस किया है। बुधवार को पुलिस टीमों ने भरतकूप क्षेत्र की खदानों में पहुंचकर जानकारी जुटाई।
पुलिस यह पता लगा रही है कि धमाके के बाद से कोई मजदूर लापता तो नहीं है। विस्फोट में एक व्यक्ति की मौत हुई थी, लेकिन चार दिन बाद भी उसकी पहचान नहीं हो सकी है। आशंका है कि मृतक खदानों में विस्फोट का काम करने वाला कोई मजदूर हो या अवैध रूप से डेटोनेटर-जिलेटिन ले जाने वाला व्यक्ति हो। पहचान के लिए पुलिस आसपास के ग्रामीणों, चरवाहों और खदान संचालकों से पूछताछ कर रही है। इसके साथ ही घटनास्थल की ओर जाने वाले रास्तों पर लगे सीसीटीवी कैमरे भी खंगाले जा रहे हैं।
एसपी अरुण कुमार सिंह ने राजापुर सीओ के नेतृत्व में दो विशेष टीमें गठित की हैं। एक टीम मृतक की शिनाख्त के लिए चित्रकूट के साथ कौशांबी जिले के गांवों में जानकारी जुटा रही है और थानों में दर्ज गुमशुदगी की रिपोर्ट खंगाल रही है। दूसरी टीम विस्फोट में प्रयुक्त सामग्री के स्रोत का पता लगा रही है।
विस्फोट स्थल से मिले अवशेषों को फॉरेंसिक लैब भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगा कि धमाका जिलेटिन, डेटोनेटर या देसी बम से हुआ था। विस्फोटक का मामला होने से एहतियातन प्रारंभिक रिपोर्ट एटीएस और एनआईए को भी भेजी गई है। (संवाद)