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वन रेंजरों को फोन पर मिली धमकी
चित्रकूट
Updated Tue, 27 Jun 2017 11:51 PM IST
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स्पीडोमीटर से वाहनों की चैकिंग करती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
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अमर उजाला ब्यूरो
मानिकपुर(चित्रकूट)। पाठा क्षेत्र में डकैतों का इन दिनों इतना मनोबल बढ़ गया है कि जंगल से अपनी जान बचाकर भाग रहे वन रेंजर त्रिवेणी प्रसाद को मोबाइल से फोन कर धमकी भी दे डाली। किसी तरह जान बचाकर भागकर आए रेंजर ने मानिकपुर में पत्रकारों को बताया कि जब वह कैंप कार्यालय पहुंचे तो तभी उनके मोबाइल पर एक फोन भी आया। फोन करने वाले ने खुद को डाकू लवलेश कोल बताकर चेतावनी भरे लहजे में कहा कि दोबारा यदि फंसे तो जान से हाथ धोना पडे़गा। जिससे वन विभाग की टीम भयभीत है। जिस नंबर से फोन आया था उसे उच्चाधिकारियों को दे दिया गया है।
कई कर्मचारी चढ़ चुके हत्थे
मानिकपुर(ब्यूरो)।जंगल से अपनी कर्मचारी की जान बचा कर वापस आए वन क्षेत्राधिक ारी त्रिवेणी प्रसाद ने डरे-सहमे अंदाज में बताया कि इसके पहले भी कई बार वन कर्मचारी दस्यु गिरोहों के हत्थे चढ़ चुके हैं। जिसके चलते वन कर्मचारी जंगल जाने से घबराते हैं। इधर, कुछ दिनों से पुलिस कांबिंग से वनकर्मी कुछ हिम्मत कर सामूहिक रूप में जंगल में वन क्षेत्र की देखरेख करने जाते थे लेकिन इस घटना के बाद एक नई मुसीबत खड़ी हो र्गई है। वन कर्मचारियों के जंगल में न पहुंच पाने की वजह से ग्रामीण अवैध कटान कर पर्यावरण को हानि पहुचाते हैं। जंगलों में वृक्षारोपण पेड़ों की देखरेख एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।
कुछ यूं रहा घटनाक्रम
चित्रकूट(ब्यूरो)। डाकू बबुली कोल गैंग लगातार खनन के काम में भी हस्तक्षेप कर रहा है। कुछ दिन पूर्व मारकुंडी क्षेत्र में चूने के पहाड़ में खनन होने में डकैतों का हाथ बताया गया था। मंगलवार की सुबह कोडरिया के जंगल में भी बेखौफ डाकू बबुली कोल गैंग मौजूद था।
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सुबह साढ़े छह बजे- मानिकपुर से रेंजर बोलेरो से कोडरिया के जंगल की ओर रवाना
सवा सात बजे- रानीपुर वन्य जीव बिहार क्षेत्र के निही पहुंचे
आठ बजे- खनन क्षेत्र से वापसी
साढ़े आठ बजे- बिज्जू पांडेय के पुरवा से गुजरे
पौने नौ बजे- कोडियार के जंगल पहुंचे तो फायरिंग शुरू
साढ़े नौ बजे- दूसरे रास्ते से मानिकपुर पहुंचे।
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मानिकपुर(चित्रकूट)। पाठा क्षेत्र में डकैतों का इन दिनों इतना मनोबल बढ़ गया है कि जंगल से अपनी जान बचाकर भाग रहे वन रेंजर त्रिवेणी प्रसाद को मोबाइल से फोन कर धमकी भी दे डाली। किसी तरह जान बचाकर भागकर आए रेंजर ने मानिकपुर में पत्रकारों को बताया कि जब वह कैंप कार्यालय पहुंचे तो तभी उनके मोबाइल पर एक फोन भी आया। फोन करने वाले ने खुद को डाकू लवलेश कोल बताकर चेतावनी भरे लहजे में कहा कि दोबारा यदि फंसे तो जान से हाथ धोना पडे़गा। जिससे वन विभाग की टीम भयभीत है। जिस नंबर से फोन आया था उसे उच्चाधिकारियों को दे दिया गया है।
कई कर्मचारी चढ़ चुके हत्थे
मानिकपुर(ब्यूरो)।जंगल से अपनी कर्मचारी की जान बचा कर वापस आए वन क्षेत्राधिक ारी त्रिवेणी प्रसाद ने डरे-सहमे अंदाज में बताया कि इसके पहले भी कई बार वन कर्मचारी दस्यु गिरोहों के हत्थे चढ़ चुके हैं। जिसके चलते वन कर्मचारी जंगल जाने से घबराते हैं। इधर, कुछ दिनों से पुलिस कांबिंग से वनकर्मी कुछ हिम्मत कर सामूहिक रूप में जंगल में वन क्षेत्र की देखरेख करने जाते थे लेकिन इस घटना के बाद एक नई मुसीबत खड़ी हो र्गई है। वन कर्मचारियों के जंगल में न पहुंच पाने की वजह से ग्रामीण अवैध कटान कर पर्यावरण को हानि पहुचाते हैं। जंगलों में वृक्षारोपण पेड़ों की देखरेख एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।
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कुछ यूं रहा घटनाक्रम
चित्रकूट(ब्यूरो)। डाकू बबुली कोल गैंग लगातार खनन के काम में भी हस्तक्षेप कर रहा है। कुछ दिन पूर्व मारकुंडी क्षेत्र में चूने के पहाड़ में खनन होने में डकैतों का हाथ बताया गया था। मंगलवार की सुबह कोडरिया के जंगल में भी बेखौफ डाकू बबुली कोल गैंग मौजूद था।
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सुबह साढ़े छह बजे- मानिकपुर से रेंजर बोलेरो से कोडरिया के जंगल की ओर रवाना
सवा सात बजे- रानीपुर वन्य जीव बिहार क्षेत्र के निही पहुंचे
आठ बजे- खनन क्षेत्र से वापसी
साढ़े आठ बजे- बिज्जू पांडेय के पुरवा से गुजरे
पौने नौ बजे- कोडियार के जंगल पहुंचे तो फायरिंग शुरू
साढ़े नौ बजे- दूसरे रास्ते से मानिकपुर पहुंचे।