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एसटीएफ नरसंहार के सजायाफ्ता कैदी की हालत बिगड़ी
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एसटीएफ नरसंहार के सजायाफ्ता कैदी की हालत बिगड़ी
अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट। जिला जेल में बंद दस माह से गले में फ ोड़े की गंभीर बीमारी से जूझ रहे एसटीएफ नरसंहार के सजायाफ्ता कैदी शंकर पटेल को सही इलाज नहीं मिलने से उसकी हालत मरणासन्न हो रही है। अदालत ने कैदी का इलाज कराने का आदेश दिया है। जेलर का कहना कि फोर्स की कमी के कारण जिले के बाहर के अस्पतालों में भर्ती कराकर इलाज कराना संभव नहीं हो पा रहा है। फिलहाल जिला अस्पताल व जेल अस्पताल में यथासंभव इलाज जारी है।
वर्ष 2012 से जेल में निरुद्ध दस्यु सरगना ठोकिया के मामा शंकर निवासी पौशला की हालत ऐसी है कि गले से पानी पीना भी मुश्किल हो रहा है। भोजन की बात दूर है। 23 जुलाई 2007 में एसटीएफ ने ददुआ को उसके दस साथियों सहित ढेर कर दिया था। ददुआ के मारे जाने से बौखलाए ठोकिया ने फ तेहगंज थाना क्षेत्र के बघोलन में उसी शाम घेर कर आधा दर्जन एसटीएफ जवानों को मौत के घाट उतार दिया था। इस नरसंहार में ठोकिया के मामा शंकर पटेल व चुनबाद पुत्र स्व. रामलाल को भी पुलिस ने आरोपी बनाया था। दोनों एमपी की राजधानी भोपाल के सिंचाई विभाग में कार्यरत थे। वर्ष 2012 में दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। सूत्र बताते हैं कि दो दिन पहले बीते बुधवार को शंकर पटेल जेल में बेहोश होकर गिर पड़ा। जिससे जेल में हड़कंप मच गया। हालत खराब होने के वजह से शंकर को बांदा पेशी पर भी नहीं भेजा गया। जेल में उसकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही है। उधर, जब इस संबंध में कर्वी जेलर श्रीप्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि कैदी को बाहर इलाज के लिए भर्ती कराना पड़ेगा। सुरक्षा कर्मी नहीं होने से ऐसा नहीं कर पा रहे हैं। ज्यादातर सुरक्षा कर्मी कुंभ ड्यूटी कर रहे हैं। इसके बावजूद शंकर पटेल का बांदा, कर्वी, झांसी आदि जिलों में उपचार कराया गया है।
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अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट। जिला जेल में बंद दस माह से गले में फ ोड़े की गंभीर बीमारी से जूझ रहे एसटीएफ नरसंहार के सजायाफ्ता कैदी शंकर पटेल को सही इलाज नहीं मिलने से उसकी हालत मरणासन्न हो रही है। अदालत ने कैदी का इलाज कराने का आदेश दिया है। जेलर का कहना कि फोर्स की कमी के कारण जिले के बाहर के अस्पतालों में भर्ती कराकर इलाज कराना संभव नहीं हो पा रहा है। फिलहाल जिला अस्पताल व जेल अस्पताल में यथासंभव इलाज जारी है।
वर्ष 2012 से जेल में निरुद्ध दस्यु सरगना ठोकिया के मामा शंकर निवासी पौशला की हालत ऐसी है कि गले से पानी पीना भी मुश्किल हो रहा है। भोजन की बात दूर है। 23 जुलाई 2007 में एसटीएफ ने ददुआ को उसके दस साथियों सहित ढेर कर दिया था। ददुआ के मारे जाने से बौखलाए ठोकिया ने फ तेहगंज थाना क्षेत्र के बघोलन में उसी शाम घेर कर आधा दर्जन एसटीएफ जवानों को मौत के घाट उतार दिया था। इस नरसंहार में ठोकिया के मामा शंकर पटेल व चुनबाद पुत्र स्व. रामलाल को भी पुलिस ने आरोपी बनाया था। दोनों एमपी की राजधानी भोपाल के सिंचाई विभाग में कार्यरत थे। वर्ष 2012 में दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। सूत्र बताते हैं कि दो दिन पहले बीते बुधवार को शंकर पटेल जेल में बेहोश होकर गिर पड़ा। जिससे जेल में हड़कंप मच गया। हालत खराब होने के वजह से शंकर को बांदा पेशी पर भी नहीं भेजा गया। जेल में उसकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही है। उधर, जब इस संबंध में कर्वी जेलर श्रीप्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि कैदी को बाहर इलाज के लिए भर्ती कराना पड़ेगा। सुरक्षा कर्मी नहीं होने से ऐसा नहीं कर पा रहे हैं। ज्यादातर सुरक्षा कर्मी कुंभ ड्यूटी कर रहे हैं। इसके बावजूद शंकर पटेल का बांदा, कर्वी, झांसी आदि जिलों में उपचार कराया गया है।
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