{"_id":"bcc8be4f974b45de83c3adc8230e28b6","slug":"consolidation-rural-rallied-against-officers-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"चकबंदी अफसरों के खिलाफ मऊ के ग्रामीण लामबंद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चकबंदी अफसरों के खिलाफ मऊ के ग्रामीण लामबंद
ब्यूरो/अमर उजाला, चित्रकूट
Updated Thu, 18 Dec 2014 11:27 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मानव विकास संस्थान की अगुवाई में ग्रामीणों ने डीएम
विज्ञापन
को पत्र देकर तहसील मऊ में चकबंदी विभाग के जिम्मेदारों पर विकास अवरुद्ध
करने का आरोप लगाया है।
किसानों का कहना है कि पहले भी उन लोगों ने सत्याग्रह किया था पर बात आश्वासन से आगे नहीं बढ़ी।
संस्थान अध्यक्ष अवधेश कुमार सिंह, सत्यनारायण, छेदीलाल सिंह, राजेश कुमार सिंह, रामलखन, इंद्रपाल सिंह, अवधेश सिंह, जितेंद्र सिंह लौरी का कहना है कि चकबंदी के बाद गांवों में सीमा रेखा भी विवादित हो गई है।
छोटे-छोटे चकों को मिलाकर बड़े चक बनाने का उद्देश्य अधूरा है। इनका कहना है कि किसानों की पांच फीसदी काटी गई जमीन के एवज में जो जमीन छोड़ी गई है, वह गांव की भूमि प्रबंधन समिति की मिलीभगत से अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुकी है।
गांवों के लोग खाद-गड्ढों के अभाव में सड़कों के किनारे और सार्वजनिक स्थलों पर कूड़ा फेंकने को मजबूर हैं। गांव वालों का यह भी कहना है कि चकबंदी विभाग ने गांव के भूचित्र में अचक गाटों और आबादी के नक्शों में हेराफेरी कर तनाव बढ़ा दिया है।
अब नक्शा सुधार कराने में समय और धन की बर्बादी हो रही है। किसानों का कहना है कि इस संबंध में कई बार तहसील दिवस में भी पत्र दिए गए पर कोई फायदा नहीं हुआ।
किसानों का कहना है कि पहले भी उन लोगों ने सत्याग्रह किया था पर बात आश्वासन से आगे नहीं बढ़ी।
संस्थान अध्यक्ष अवधेश कुमार सिंह, सत्यनारायण, छेदीलाल सिंह, राजेश कुमार सिंह, रामलखन, इंद्रपाल सिंह, अवधेश सिंह, जितेंद्र सिंह लौरी का कहना है कि चकबंदी के बाद गांवों में सीमा रेखा भी विवादित हो गई है।
छोटे-छोटे चकों को मिलाकर बड़े चक बनाने का उद्देश्य अधूरा है। इनका कहना है कि किसानों की पांच फीसदी काटी गई जमीन के एवज में जो जमीन छोड़ी गई है, वह गांव की भूमि प्रबंधन समिति की मिलीभगत से अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुकी है।
गांवों के लोग खाद-गड्ढों के अभाव में सड़कों के किनारे और सार्वजनिक स्थलों पर कूड़ा फेंकने को मजबूर हैं। गांव वालों का यह भी कहना है कि चकबंदी विभाग ने गांव के भूचित्र में अचक गाटों और आबादी के नक्शों में हेराफेरी कर तनाव बढ़ा दिया है।
अब नक्शा सुधार कराने में समय और धन की बर्बादी हो रही है। किसानों का कहना है कि इस संबंध में कई बार तहसील दिवस में भी पत्र दिए गए पर कोई फायदा नहीं हुआ।