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चित्रकूट :अस्पताल संचालक पर 15 लाख रुपये का अर्थदंड, 2017 का मामला, जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग का फैसला
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चित्रकूट। निजी चिकित्सालय के संचालक को मरीज का सही इलाज न करना महंगा पड़ गया है। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने पंद्रह लाख रुपये का अर्थदंड देने का आदेश दिया है। इस अर्थदंड को छह प्रतिशत ब्याज सहित एक माह में भुगतान करने का आदेश जारी हुआ है।
चंद्रगहना गांव निवासी राममिलन पुत्र श्रीकृष्ण ने बताया कि 29 अगस्त 2017 को सीने में दर्द होने पर रामकृपा अस्पताल इलाज कराने पहुंचा। उसके खून की जांच आदि की गई और बताया गया कि गैस की समस्या है। 21 अक्तूबर को फिर सीने में दर्द हुआ तो इसी अस्पताल में आया। यहां इंजेक्शन लगाकर घर भेज दिया। राहत न मिलने पर दूसरे अस्पताल में डॉक्टर को दिखाया तो उसे हायर सेंटर रेफर किया गया। आखिर में उसे बाईपास सर्जरी करानी पड़ी। इस मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में 12 जनवरी 2018 को वाद दाखिल किया।
इस मामले की जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष रामसुचित और सदस्य अंजू सिंह चौहान ने आदेश जारी किया कि चिकित्सालय के संचालक डॉ. रचित पांडेय को अलग अलग अस्पतालों में इलाज कराने, शारीरिक, मानसिक व आर्थिक क्षति के लिए कुल 15 लाख रुपये का भुगतान छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ परिवाद दायर करने की तिथि से अंतिम अदायगी की तिथि तक एक माह में जमा करें।
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चंद्रगहना गांव निवासी राममिलन पुत्र श्रीकृष्ण ने बताया कि 29 अगस्त 2017 को सीने में दर्द होने पर रामकृपा अस्पताल इलाज कराने पहुंचा। उसके खून की जांच आदि की गई और बताया गया कि गैस की समस्या है। 21 अक्तूबर को फिर सीने में दर्द हुआ तो इसी अस्पताल में आया। यहां इंजेक्शन लगाकर घर भेज दिया। राहत न मिलने पर दूसरे अस्पताल में डॉक्टर को दिखाया तो उसे हायर सेंटर रेफर किया गया। आखिर में उसे बाईपास सर्जरी करानी पड़ी। इस मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में 12 जनवरी 2018 को वाद दाखिल किया।
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इस मामले की जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष रामसुचित और सदस्य अंजू सिंह चौहान ने आदेश जारी किया कि चिकित्सालय के संचालक डॉ. रचित पांडेय को अलग अलग अस्पतालों में इलाज कराने, शारीरिक, मानसिक व आर्थिक क्षति के लिए कुल 15 लाख रुपये का भुगतान छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ परिवाद दायर करने की तिथि से अंतिम अदायगी की तिथि तक एक माह में जमा करें।
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