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Chitrakoot News: मंदिरों में रखी प्राचीन पांडुलिपियों का होगा डिजिटलीकरण
Mon, 20 Apr 2026 12:08 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Mon, 20 Apr 2026 12:08 AM IST
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फोटो 19 सीकेटीपी 16 मंदिर में रखी पांडुलिपि-प्रशासन
चित्रकूट। धर्मनगरी के मंदिरों में प्राचीन पांडुलिपियां रखी हैं। जिसका अब डिजिटलीकरण होगा। इसके लिए भारत योजना के तहत टीम मंदिरों में जाकर जानकारी एकत्र कर रही है। अनुमान है धर्मनगरी में 350 से अधिक पांडुलिपियां मौजूद हैं।
मझगवां एसडीएम महिपाल सिंह गुर्जर व तहसीलदार कमलेश सिंह के नेतृत्व में टीम तुलसी शोध संस्थान पहुंची। वहां महर्षि वाल्मीकि कृत रामायण के अंश, गोस्वामी तुलसीदास की रामचरितमानस के सात कांड, महाभारत के पर्व, हस्तलिखित उर्दू रामायण, श्रीमद्भागवत , दुर्गासप्तसती और श्रीगुरुचरितम् सहित अन्य ग्रंथों के बारे में साधु-संतों से बातचीत कर जानकारी ली और उनके डिजिटलीकरण कराने की तैयारी बनाई। धर्मनगरी के महंत दिव्यजीवन दास व संत नवलेश दीक्षित ने बताया कि धर्मनगरी के मंदिरों में आज भी प्राचीन समय की पांडुलिपियां रखी हुई। इसमें कई तो संस्कृत भाषा में कई तो अवधी सहित अन्य भाषा में लिखी हैं। जिनका संरक्षण के साथ ही डिजिटलीकरण बहुत जरूरी है। बताया कि एक समय था जब सनातन धर्म के खिलाफ विदेशी शक्तियां भारत में हमला कर यहां की प्राचीन संस्कृति को मिटाने का प्रयास में लगी थीं। जिले में भी औरंगजेब सहित कई आक्रमणकारी आए। तब संतों ने पांडुलिपियों की रक्षा कर मंदिरों में रखा। इनका डिजिटलीकरण होना बहुत जरूरी है। एसडीएम महिपाल सिंह गुर्जर ने बताया कि भारत सरकार की भारत मिशन योजना के तहत पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण होगा। जिन मंदिरों में रखी हैं। वहां पर जाकर जानकारी की जा रही है।
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मझगवां एसडीएम महिपाल सिंह गुर्जर व तहसीलदार कमलेश सिंह के नेतृत्व में टीम तुलसी शोध संस्थान पहुंची। वहां महर्षि वाल्मीकि कृत रामायण के अंश, गोस्वामी तुलसीदास की रामचरितमानस के सात कांड, महाभारत के पर्व, हस्तलिखित उर्दू रामायण, श्रीमद्भागवत , दुर्गासप्तसती और श्रीगुरुचरितम् सहित अन्य ग्रंथों के बारे में साधु-संतों से बातचीत कर जानकारी ली और उनके डिजिटलीकरण कराने की तैयारी बनाई। धर्मनगरी के महंत दिव्यजीवन दास व संत नवलेश दीक्षित ने बताया कि धर्मनगरी के मंदिरों में आज भी प्राचीन समय की पांडुलिपियां रखी हुई। इसमें कई तो संस्कृत भाषा में कई तो अवधी सहित अन्य भाषा में लिखी हैं। जिनका संरक्षण के साथ ही डिजिटलीकरण बहुत जरूरी है। बताया कि एक समय था जब सनातन धर्म के खिलाफ विदेशी शक्तियां भारत में हमला कर यहां की प्राचीन संस्कृति को मिटाने का प्रयास में लगी थीं। जिले में भी औरंगजेब सहित कई आक्रमणकारी आए। तब संतों ने पांडुलिपियों की रक्षा कर मंदिरों में रखा। इनका डिजिटलीकरण होना बहुत जरूरी है। एसडीएम महिपाल सिंह गुर्जर ने बताया कि भारत सरकार की भारत मिशन योजना के तहत पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण होगा। जिन मंदिरों में रखी हैं। वहां पर जाकर जानकारी की जा रही है।
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