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चित्रकूट: आत्मविकास के लिए डर दूर भगाना होगा
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खोही(चित्रकूट)। महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी में मुख्य वक्ता बीएचयू के प्रो. आरएन त्रिपाठी ने कहा कि गांधीजी की 151वीं जयंती पर देश आत्मनिर्भर होने की उनकी जीवन पद्धति को आत्मसात कर रहा है।
उन्होंने माना था कि आत्मविकास के लिये डर को दूर भगाना होगा। वे अहिंसा और सत्य के साथ-साथ आत्मनिर्भर होने की बात करते थे, कहते थे जियो वर्तमान में और सोचो भविष्य के लिए।
वेबीनार के मुख्य अतिथि पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आरपी तिवारी ने कहा कि वोकेशनल कार्यक्रम बनाकर छात्रों को शिक्षित किया जाए।
गांधीजी ने कहा था कि ऐसी शिक्षा दें जो हमारी उत्पादकता बढ़ाने में सहयोगी हो, जो आवश्यक हो उसका हम उत्पादन करें। तभी गांव एक रिपब्लिक बन पाएंगे।
संयोजक डॉ. देवेंद्र प्रसाद पांडेय ने बताया कि वेबीनार में 23 शोध पत्र पढ़े गए। पोस्टर प्रतियोगिता में 40 कृतियॉ आईं, जिनका मूल्यांकन विश्वविद्यालय के प्रबुद्ध शिक्षक डॉ. प्रसन्न पाटकर, डॉ. जयशंकर मिश्र व डॉ. राकेश कुमार के द्वारा किया गया। प्रतियोगिता में भ्रमित सिंह चौहान को प्रथम, मणि मिश्रा को द्वितीय और डॉ. स्वप्निल बरूवा को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ।
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उन्होंने माना था कि आत्मविकास के लिये डर को दूर भगाना होगा। वे अहिंसा और सत्य के साथ-साथ आत्मनिर्भर होने की बात करते थे, कहते थे जियो वर्तमान में और सोचो भविष्य के लिए।
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वेबीनार के मुख्य अतिथि पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आरपी तिवारी ने कहा कि वोकेशनल कार्यक्रम बनाकर छात्रों को शिक्षित किया जाए।
गांधीजी ने कहा था कि ऐसी शिक्षा दें जो हमारी उत्पादकता बढ़ाने में सहयोगी हो, जो आवश्यक हो उसका हम उत्पादन करें। तभी गांव एक रिपब्लिक बन पाएंगे।
संयोजक डॉ. देवेंद्र प्रसाद पांडेय ने बताया कि वेबीनार में 23 शोध पत्र पढ़े गए। पोस्टर प्रतियोगिता में 40 कृतियॉ आईं, जिनका मूल्यांकन विश्वविद्यालय के प्रबुद्ध शिक्षक डॉ. प्रसन्न पाटकर, डॉ. जयशंकर मिश्र व डॉ. राकेश कुमार के द्वारा किया गया। प्रतियोगिता में भ्रमित सिंह चौहान को प्रथम, मणि मिश्रा को द्वितीय और डॉ. स्वप्निल बरूवा को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ।
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