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कचरा प्रबंधन के लिए जागरूकता जरूरी
Chitrakoot
Updated Sat, 31 May 2014 05:34 AM IST
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चित्रकूट। ग्रामोदय विश्वविद्यालय, इंडियन ग्रामीण सर्विसेज भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार कचरा प्रवंधन विषयपर कार्याशाला का आयोजन हुआ। जिसपर वक्ताओं ने अपने विचार रखे। जिससे आसपास क्षेत्र को स्वच्छ, सुंदर बनाया जा सके।
कार्यशाला में बोलते हुए प्रो. कपिलदेव मिश्र ने कहा हमारे युवाओं में इतनी ऊर्जा, चिंतनशीलता, क्षमता है कि वह चाहें तो कचरा प्रबंधन की योजना को सही दिशा दे सकते हैं। अपने आसपास स्वच्छ, सुन्दर, मनोरम बना सकते हैं। उन्होंने कहा नगर परिषद और आईजीएस भोपाल के साथ जुड़कर अभियान को सफल बनाए। आईजीएस के प्रभारी विद्यासागर द्विवेदी, कार्यक्रम संयोजन डॉ. अजय आर चौरे ने कहा छात्रों को संस्थाओं के साथ मिलकर चित्रकूट को स्वच्छ, सुन्दर बनाने का प्रयास करना चाहिए। डॉ. विनोद शंकर सिंह ने कचरा और उनसे होने वाले प्रदूषणों पर व्यापक चर्चा की। उन्होंने कहा कचरा को सही जगह पर डालने, सही प्रबंधन के लिए जागरूकता जरुरी है। डॉ. कुसुम सिंह, डॉ. नीलम चौरे ने कहा मंदाकिनी में प्लास्टिक के प्लेटों पर दीपदान, माला-फूल जैसे कचरों का विसर्जन रोका जाना चाहिए। इसके साथ ही मठ-मंदिरों से निकलने वाले कचरों का भी सही उपयोग होना चाहिए। इस अवसर पर संभाषण प्रतियोगिता में छात्रों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता मे सार्थक सिंह प्रथम, शशि शेखर पटेल द्वितीय और निधि गुप्ता तृतीय स्थान पर रही। कार्यशाला में डॉ. स्वर्णलता शर्मा, डॉ. जनक बहादुर चौबे आदि लोग मौजूद रहे।
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कार्यशाला में बोलते हुए प्रो. कपिलदेव मिश्र ने कहा हमारे युवाओं में इतनी ऊर्जा, चिंतनशीलता, क्षमता है कि वह चाहें तो कचरा प्रबंधन की योजना को सही दिशा दे सकते हैं। अपने आसपास स्वच्छ, सुन्दर, मनोरम बना सकते हैं। उन्होंने कहा नगर परिषद और आईजीएस भोपाल के साथ जुड़कर अभियान को सफल बनाए। आईजीएस के प्रभारी विद्यासागर द्विवेदी, कार्यक्रम संयोजन डॉ. अजय आर चौरे ने कहा छात्रों को संस्थाओं के साथ मिलकर चित्रकूट को स्वच्छ, सुन्दर बनाने का प्रयास करना चाहिए। डॉ. विनोद शंकर सिंह ने कचरा और उनसे होने वाले प्रदूषणों पर व्यापक चर्चा की। उन्होंने कहा कचरा को सही जगह पर डालने, सही प्रबंधन के लिए जागरूकता जरुरी है। डॉ. कुसुम सिंह, डॉ. नीलम चौरे ने कहा मंदाकिनी में प्लास्टिक के प्लेटों पर दीपदान, माला-फूल जैसे कचरों का विसर्जन रोका जाना चाहिए। इसके साथ ही मठ-मंदिरों से निकलने वाले कचरों का भी सही उपयोग होना चाहिए। इस अवसर पर संभाषण प्रतियोगिता में छात्रों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता मे सार्थक सिंह प्रथम, शशि शेखर पटेल द्वितीय और निधि गुप्ता तृतीय स्थान पर रही। कार्यशाला में डॉ. स्वर्णलता शर्मा, डॉ. जनक बहादुर चौबे आदि लोग मौजूद रहे।
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