{"_id":"42-107411","slug":"Chitrakoot-107411-42","type":"story","status":"publish","title_hn":"विधवा ने जेठ पर लगाया संपत्ति हड़पने का आरोप ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विधवा ने जेठ पर लगाया संपत्ति हड़पने का आरोप
Chitrakoot
Updated Sun, 25 Nov 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
चित्रकूट। तरौंहा निवासी विधवा ने जेठ पर संपत्ति को हड़पने की नियति से ससुर को इलाज के बहाने जबरदस्ती अपने पास रखकर पहले की वसीयत बदलवाने का आरोप लगाया है। उसका कहना है कि उसे व उसके पुत्रों को ससुर से मिलने भी नहीं दिया जा रहा है। उसने जिलाधिकारी को पत्र देकर किसी सक्षम अधिकारी से हस्तक्षेप कर संपत्ति के विवाद को निस्तारित कराने का अनुरोध किया है।
तरौंहा निवासी कंठा देवी पत्नी स्व. कमलेश ऊर्फ राजन ने बताया कि उनकी पति की मौत के बाद उसके ससुर हरभूषण ने अपनी मौत के बाद विवाद पैदा होने से रोकने के लिए अपनी संपत्ति का बंटवारा पहले कर दिया था। दो बेटों के पास पैसा होने की वजह से उन्होंने तत्काल अपने हिस्से की जमीने अपने नाम करा लीं लेकिन उसके पास पैसा न होने से उसके लिए उसके ससुर ने वसीयत लिख दी कि जीते जी उनकी रहेगी और मरने के बाद मुनइयां और उसके पुत्रों विमलेश, मिथिलेश के नाम होगी। कंठा देवी का कहना है कि उसके ससुर उसके साथ ही रहते थे लेकिन उसके हिस्से की संपत्ति में हिस्सा लेने के लिए कुछ दिन पहले ही उसके जेठ चंद्रमा प्रसाद उसके ससुर को जबरदस्ती अपने यहां ले गए और रजिस्ट्री कराने के लिए तहसील भी पहुंच गए। जब वह अपने पुत्रों के साथ वहां पहुंची तो वह लिखा तो नहीं पाए लेकिन उन्हाेंने उसे ससुर सेे मिलने ही नहीं दिया। उसने बताया कि इस बात को लेकर वह एसडीएम कर्वी से भी मिल चुकी है लेकिन उन्होंने भी एक व्यक्ति का व्यक्तिगत मामला बताते हुए दखलंदाजी करने से मना कर दिया। उसने बताया कि इससे पहले वह कई जगह जा चुकी है लेकिन कोई भी इस मामले में कार्रवाई करने को तैयार नहीं हो सकता है। उसने बताया कि वह हर चौखट पर गुहार लगा चुकी है।
विज्ञापन
तरौंहा निवासी कंठा देवी पत्नी स्व. कमलेश ऊर्फ राजन ने बताया कि उनकी पति की मौत के बाद उसके ससुर हरभूषण ने अपनी मौत के बाद विवाद पैदा होने से रोकने के लिए अपनी संपत्ति का बंटवारा पहले कर दिया था। दो बेटों के पास पैसा होने की वजह से उन्होंने तत्काल अपने हिस्से की जमीने अपने नाम करा लीं लेकिन उसके पास पैसा न होने से उसके लिए उसके ससुर ने वसीयत लिख दी कि जीते जी उनकी रहेगी और मरने के बाद मुनइयां और उसके पुत्रों विमलेश, मिथिलेश के नाम होगी। कंठा देवी का कहना है कि उसके ससुर उसके साथ ही रहते थे लेकिन उसके हिस्से की संपत्ति में हिस्सा लेने के लिए कुछ दिन पहले ही उसके जेठ चंद्रमा प्रसाद उसके ससुर को जबरदस्ती अपने यहां ले गए और रजिस्ट्री कराने के लिए तहसील भी पहुंच गए। जब वह अपने पुत्रों के साथ वहां पहुंची तो वह लिखा तो नहीं पाए लेकिन उन्हाेंने उसे ससुर सेे मिलने ही नहीं दिया। उसने बताया कि इस बात को लेकर वह एसडीएम कर्वी से भी मिल चुकी है लेकिन उन्होंने भी एक व्यक्ति का व्यक्तिगत मामला बताते हुए दखलंदाजी करने से मना कर दिया। उसने बताया कि इससे पहले वह कई जगह जा चुकी है लेकिन कोई भी इस मामले में कार्रवाई करने को तैयार नहीं हो सकता है। उसने बताया कि वह हर चौखट पर गुहार लगा चुकी है।
विज्ञापन