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अपनी पहचान के संकट से जूझ रहा झाकी-झूला
Updated Tue, 21 Aug 2018 11:12 PM IST
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अपनी पहचान के संकट से जूझ रहा झाकी-झूला
अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट। धर्मनगरी में सन् 1900 से शुरू हुआ झांकी-झूला अब अपनी पहचान के संकट से जूझ रहा है। लेकिन आस्था में डूबे भक्तगण भगवान को झूला झूलते देखने के लिए उमड़ रहे हैं। शहर के नई बाजार व बल्दाऊगंज स्थित मंदिर के पास मेला जैसा नजारा तो मानो बीते जमाने की बात हो गई। मुख्यालय के आसपास सैकड़ों ग्रामीण झांकी दर्शन के बाद खरीददारी कर रहें हैं।
नागपंचमी पर्व से शहर के प्राचीन मंदिरों में झूला उत्सव शुरू हो जाता है। जो रक्षाबंधन तक जारी रहता है। मंदिर परिसर में भजन कीर्तन व अन्य धार्मिक कार्यक्रम चलते हैं। भगवान श्रीराम, माता सीता व भाई लक्ष्मण की भव्य झांकी सजाई गई है। शाम को देखने के लिए सैकड़ों श्रद्धाुल पहुंच रहे हैं। शहर नई बाजार स्थित नया धर्मशाला ठाकुर राम जानकी मंदिर, बल्दाऊ गंज मंदिर व स्टेशन परिसर के पास स्थापित श्रीहनुमान मंदिर में नागपंचमी पर्व से झूला महोत्सव मनाया जा रहा है। जिसमें मंदिरों को रंग रोगन के साथ ही भव्य सजावट की गई है। भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति को झूला में झुलाया जा रहा है। साथ ही मंदिर परिसर में स्थापित भगवान श्रीराम, लक्ष्मण व माता सीता की पूर्ति को प्रतिदिन श्रृंगार किया जाता है। प्रतिदिन झूला महोत्सव को देखने के लिए श्रद्धालु पहुंचते हैं। नया बाजार स्थित ठाकुर रामजानकी मंदिर के पुजारी श्रीकृष्ण प्रसाद द्विवेदी ने बताया कि इस मंदिर में सन 1900 से झूला उत्सव मनाया जाता है। इस साल 118 वर्ष हो जाएंगे। नागपंचमी पर्व से रक्षाबंधन तक झूला महोत्सव मनाया जाता है।
टीवी और मोबाइल का असर
चित्रकूट। टीवी व मोबाइल युग के कारण झूला उत्सव में हर साल असर पड़ रहा है। श्रद्धालुओं की संख्या कम होती जा रही है। जिससे आयोजनकर्ता झूला उत्सव में कम रूचि लेने लगे हैं। बल्दाऊ मंदिर के पुजारी रामेश्वर प्रसाद ने बताया कि एक समय झूला महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते थे। मनोरंजन के आधुनिक साधन होने के कारण अब अधिक श्रद्धालु नहीं आते।
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अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट। धर्मनगरी में सन् 1900 से शुरू हुआ झांकी-झूला अब अपनी पहचान के संकट से जूझ रहा है। लेकिन आस्था में डूबे भक्तगण भगवान को झूला झूलते देखने के लिए उमड़ रहे हैं। शहर के नई बाजार व बल्दाऊगंज स्थित मंदिर के पास मेला जैसा नजारा तो मानो बीते जमाने की बात हो गई। मुख्यालय के आसपास सैकड़ों ग्रामीण झांकी दर्शन के बाद खरीददारी कर रहें हैं।
नागपंचमी पर्व से शहर के प्राचीन मंदिरों में झूला उत्सव शुरू हो जाता है। जो रक्षाबंधन तक जारी रहता है। मंदिर परिसर में भजन कीर्तन व अन्य धार्मिक कार्यक्रम चलते हैं। भगवान श्रीराम, माता सीता व भाई लक्ष्मण की भव्य झांकी सजाई गई है। शाम को देखने के लिए सैकड़ों श्रद्धाुल पहुंच रहे हैं। शहर नई बाजार स्थित नया धर्मशाला ठाकुर राम जानकी मंदिर, बल्दाऊ गंज मंदिर व स्टेशन परिसर के पास स्थापित श्रीहनुमान मंदिर में नागपंचमी पर्व से झूला महोत्सव मनाया जा रहा है। जिसमें मंदिरों को रंग रोगन के साथ ही भव्य सजावट की गई है। भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति को झूला में झुलाया जा रहा है। साथ ही मंदिर परिसर में स्थापित भगवान श्रीराम, लक्ष्मण व माता सीता की पूर्ति को प्रतिदिन श्रृंगार किया जाता है। प्रतिदिन झूला महोत्सव को देखने के लिए श्रद्धालु पहुंचते हैं। नया बाजार स्थित ठाकुर रामजानकी मंदिर के पुजारी श्रीकृष्ण प्रसाद द्विवेदी ने बताया कि इस मंदिर में सन 1900 से झूला उत्सव मनाया जाता है। इस साल 118 वर्ष हो जाएंगे। नागपंचमी पर्व से रक्षाबंधन तक झूला महोत्सव मनाया जाता है।
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टीवी और मोबाइल का असर
चित्रकूट। टीवी व मोबाइल युग के कारण झूला उत्सव में हर साल असर पड़ रहा है। श्रद्धालुओं की संख्या कम होती जा रही है। जिससे आयोजनकर्ता झूला उत्सव में कम रूचि लेने लगे हैं। बल्दाऊ मंदिर के पुजारी रामेश्वर प्रसाद ने बताया कि एक समय झूला महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते थे। मनोरंजन के आधुनिक साधन होने के कारण अब अधिक श्रद्धालु नहीं आते।
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