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Chitrakoot News: 13 साल की गीतांजलि ने बनाई देवी की प्रतिमा
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फोटो 16 सीकेटीपी 10 बनाई गई मां की प्रतिमा, मौजूद गीतांजलि व अन्य महिलाएं। संवाद
मानिकपुर (चित्रकूट)। कहते हैं हुनर उम्र नहीं देखता। शिवनगर की 13 साल की गीतांजलि पांडेय ने यह सच कर दिखाया है। जिस उम्र में बच्चे खिलौनों से खेलते हैं, उस उम्र में इस बिटिया ने अपने हाथों से मिट्टी से मां दुर्गा की प्रतिमा बनाई है।
गीतांजलि ने 10 सितंबर से प्रतिमा बनाना शुरू किया था। दिन में स्कूल और पढ़ाई के बाद वह अपना पूरा समय मिट्टी, रंग और शृंगार में लगाती थी। उसने 20 दिन में मां दुर्गा को साकार कर दिया। नगर के विनोद मिश्रा ने कहा कि बच्चे गीतांजलि से मूर्ति बनाने का तरीका पूछ रहे हैं। गीतांजलि के पिता बुद्ध विलास पांडेय कला का बखान करते हुए कहते हैं कि गीतांजलि बचपन में मिट्टी के खिलौने बनाती थी। उसकी मां गोमती पांडेय गृहिणी हैं। (संवाद)
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वाल्मीकि आश्रम में विराजीं माता अशावर
चित्रकूट। नवरात्र के दौरान लालापुर स्थित वाल्मीकि आश्रम में भक्तों की भीड़ बढ़ जाती है। यहां विराजमान माता अशावर देवी के दर्शन मात्र से मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता है। यह आश्रम राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे एक ऊंचे टीले पर स्थित है। आश्रम के बगल से बहती वाल्मीकि नदी इसके सौंदर्य में चार चांद लगा देती है। महंत दिव्यजीवन दास बताते हैं कि माता अशावर देवी को माता सीता का ही स्वरूप माना जाता है। (संवाद)
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गीतांजलि ने 10 सितंबर से प्रतिमा बनाना शुरू किया था। दिन में स्कूल और पढ़ाई के बाद वह अपना पूरा समय मिट्टी, रंग और शृंगार में लगाती थी। उसने 20 दिन में मां दुर्गा को साकार कर दिया। नगर के विनोद मिश्रा ने कहा कि बच्चे गीतांजलि से मूर्ति बनाने का तरीका पूछ रहे हैं। गीतांजलि के पिता बुद्ध विलास पांडेय कला का बखान करते हुए कहते हैं कि गीतांजलि बचपन में मिट्टी के खिलौने बनाती थी। उसकी मां गोमती पांडेय गृहिणी हैं। (संवाद)
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वाल्मीकि आश्रम में विराजीं माता अशावर
चित्रकूट। नवरात्र के दौरान लालापुर स्थित वाल्मीकि आश्रम में भक्तों की भीड़ बढ़ जाती है। यहां विराजमान माता अशावर देवी के दर्शन मात्र से मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता है। यह आश्रम राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे एक ऊंचे टीले पर स्थित है। आश्रम के बगल से बहती वाल्मीकि नदी इसके सौंदर्य में चार चांद लगा देती है। महंत दिव्यजीवन दास बताते हैं कि माता अशावर देवी को माता सीता का ही स्वरूप माना जाता है। (संवाद)
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