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Chitrakoot News: चित्रकूट में पैक्स होंगी पेपरलेस
Sat, 17 Oct 2026 12:36 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Sat, 17 Oct 2026 12:36 AM IST
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चित्रकूट। जिले की सहकारी समितियों के दिन बदलने वाले हैं। अब किसानों को खाद-बीज और कर्ज के लिए पैक्स के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। न ही रजिस्टर में हेराफेरी हो सकेगी।
पहले चरण में जिले की 39 में से 13 समितियों को पूरी तरह पेपरलेस कर ई-पैक्स घोषित कर दिया गया है। जनपद में कुल 39 पैक्स समितियां संचालित हैं। अभी तक इनमें खाद-बीज और ऋण का वितरण मैनुअल तरीके से होता था।
हाथ से लिखे रजिस्टर और पर्ची सिस्टम के चलते घालमेल और कालाबाजारी की शिकायतें आम थीं। किसानों को पता ही नहीं चलता था कि समिति में खाद आई भी है या नहीं। इन्हीं शिकायतों को खत्म करने के लिए सरकार ने पैक्स कंप्यूटराइजेशन योजना शुरू की है।
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सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता प्रकाश उपाध्याय ने बताया कि पहले चरण में 13 बी-पैक्स समितियों का पूरा डेटा ई-पैक्स पोर्टल पर अपलोड कर उन्हें औपचारिक रूप से ई-पैक्स घोषित कर दिया गया है। इन समितियों से जुड़े किसानों का ब्योरा, शेयर कैपिटल, खाद-बीज का स्टॉक, ऋण वितरण और वसूली का पूरा रिकॉर्ड अब केंद्र सरकार के पोर्टल पर लाइव है।
अब किसान घर बैठे मोबाइल पर देख सकेंगे कि समिति में कितनी खाद आई है और उनका कर्ज माफ हुआ या नहीं। इससे पारदर्शिता आएगी और ऑडिट भी ऑनलाइन होगा।
वहीं, जिले में शेष 26 समितियों को भी हाईटेक बनाने की कवायद तेज कर दी गई है। कई जगह कंप्यूटर तो पहुंच गए हैं, लेकिन इंटरनेट, बिजली और प्रशिक्षित ऑपरेटर की कमी से काम अटका हुआ है। इन्हें एक माह में हाईटेक बनाना है।
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पहले चरण में जिले की 39 में से 13 समितियों को पूरी तरह पेपरलेस कर ई-पैक्स घोषित कर दिया गया है। जनपद में कुल 39 पैक्स समितियां संचालित हैं। अभी तक इनमें खाद-बीज और ऋण का वितरण मैनुअल तरीके से होता था।
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हाथ से लिखे रजिस्टर और पर्ची सिस्टम के चलते घालमेल और कालाबाजारी की शिकायतें आम थीं। किसानों को पता ही नहीं चलता था कि समिति में खाद आई भी है या नहीं। इन्हीं शिकायतों को खत्म करने के लिए सरकार ने पैक्स कंप्यूटराइजेशन योजना शुरू की है।
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सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता प्रकाश उपाध्याय ने बताया कि पहले चरण में 13 बी-पैक्स समितियों का पूरा डेटा ई-पैक्स पोर्टल पर अपलोड कर उन्हें औपचारिक रूप से ई-पैक्स घोषित कर दिया गया है। इन समितियों से जुड़े किसानों का ब्योरा, शेयर कैपिटल, खाद-बीज का स्टॉक, ऋण वितरण और वसूली का पूरा रिकॉर्ड अब केंद्र सरकार के पोर्टल पर लाइव है।
अब किसान घर बैठे मोबाइल पर देख सकेंगे कि समिति में कितनी खाद आई है और उनका कर्ज माफ हुआ या नहीं। इससे पारदर्शिता आएगी और ऑडिट भी ऑनलाइन होगा।
वहीं, जिले में शेष 26 समितियों को भी हाईटेक बनाने की कवायद तेज कर दी गई है। कई जगह कंप्यूटर तो पहुंच गए हैं, लेकिन इंटरनेट, बिजली और प्रशिक्षित ऑपरेटर की कमी से काम अटका हुआ है। इन्हें एक माह में हाईटेक बनाना है।