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बिना खाना पानी बस की बाट जोहते रहे श्रमिक
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पीडीडीयू नगर। लॉकडाउन की वजह से देश के विभिन्न राज्यों में फंसे प्रवासी श्रमिकों के पैदल चलने से रोकने के लिए राज्य सरकार ने बसों से श्रमिकों को राज्य की सीमा पर छोड़ने का निर्देश दिया है। इसके बाद सड़कों पर पैदल चलने वालों की संख्या में कमी आई है लेकिन रोडवेज बस चालकों की लापरवाही से श्रमिक परेशान हैं। शनिवार को बनारस और एटा से श्रमिकों को लेकर आई बस ने नौबतपुर छोड़ने के बजाए स्थानीय रेलवे स्टेशन पर छोड़ दिया। इससे श्रमिक दिन भर भूखे प्यासे सीमा पर जाने का इंतजार करते रहे।
पश्चिम बंगाल के रामपुर हाट निवासी तीस श्रमिकों का दल छह माह पहले मुंबई के गोरेगांव में रहकर आर्टिफिशियल ज्वेलरी बनाने का काम करने गए थे। काम शुरू भी किया लेकिन लॉकडाउन लागू होते ही वे मजदूरों के सामने भूखमरी की स्थिति हो गई। लॉकडाउन में कुछ ढील मिलने के बाद श्रमिक घर जाने की कवायद में जुट गए और वे पैदल ही घर जाने के लिए निकल गए। राज्य की सीमा से बाहर निकलने पर बस मिल गई और मध्य प्रदेश की सीमा पर पहुंचे। पांच बस बदल कर वे किसी तरह झांसी पहुंचे। यहां प्रशासन की मदद से उन्हें श्रमिक स्पेशल ट्रेन से वाराणसी भेजा गया। शनिवार की सुबह वाराणसी से बस से पीडीडीयू जंक्शन पहुंचाया गया। बताया गया कि यहा से बस से उन्हें बंगाल पहुंचाया जाएगा। बस का इंतजार कर रहे सिराजूल शेख, मोनू, असरहुल, नयन खान, समीरूल इस्लाम, हसन शेख, तस्लीम, बिलाल शेख ने बताया कि सुबह से बस का इंतजार करते करते शाम हो गई लेकिन न तो बस आई और नही किसी अधिकारी ने सुध ली। इसी तरह एटा से 40 श्रमिकों को लेकर बस स्थानीय रेलवे स्टेशन पर पहुंची। इसमें बिहार के औरंगाबाद, रफीगंज, गया सहित विभिन्न जिलों में जाने वाले श्रमिक रहे। ये लोग भी दिन भर बस का इंतजार करते रहे लेकिन श्रमिकों को बार्डर तक भी नहीं छोड़ा गया। इस संबंध में चंदौली के एआरएम मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि श्रमिकों को नौबतपुर बार्डर तक पहुंचाना है। स्टेशन पर कैसे छोड़ा गया, इसकी जांच की जाएगी।
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पश्चिम बंगाल के रामपुर हाट निवासी तीस श्रमिकों का दल छह माह पहले मुंबई के गोरेगांव में रहकर आर्टिफिशियल ज्वेलरी बनाने का काम करने गए थे। काम शुरू भी किया लेकिन लॉकडाउन लागू होते ही वे मजदूरों के सामने भूखमरी की स्थिति हो गई। लॉकडाउन में कुछ ढील मिलने के बाद श्रमिक घर जाने की कवायद में जुट गए और वे पैदल ही घर जाने के लिए निकल गए। राज्य की सीमा से बाहर निकलने पर बस मिल गई और मध्य प्रदेश की सीमा पर पहुंचे। पांच बस बदल कर वे किसी तरह झांसी पहुंचे। यहां प्रशासन की मदद से उन्हें श्रमिक स्पेशल ट्रेन से वाराणसी भेजा गया। शनिवार की सुबह वाराणसी से बस से पीडीडीयू जंक्शन पहुंचाया गया। बताया गया कि यहा से बस से उन्हें बंगाल पहुंचाया जाएगा। बस का इंतजार कर रहे सिराजूल शेख, मोनू, असरहुल, नयन खान, समीरूल इस्लाम, हसन शेख, तस्लीम, बिलाल शेख ने बताया कि सुबह से बस का इंतजार करते करते शाम हो गई लेकिन न तो बस आई और नही किसी अधिकारी ने सुध ली। इसी तरह एटा से 40 श्रमिकों को लेकर बस स्थानीय रेलवे स्टेशन पर पहुंची। इसमें बिहार के औरंगाबाद, रफीगंज, गया सहित विभिन्न जिलों में जाने वाले श्रमिक रहे। ये लोग भी दिन भर बस का इंतजार करते रहे लेकिन श्रमिकों को बार्डर तक भी नहीं छोड़ा गया। इस संबंध में चंदौली के एआरएम मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि श्रमिकों को नौबतपुर बार्डर तक पहुंचाना है। स्टेशन पर कैसे छोड़ा गया, इसकी जांच की जाएगी।
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