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एक माह में पांच फीसद भी नहीं हो सकी गेहूं की खरीद
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पीडीडीयू नगर। जिला प्रशासन की ओर से भले ही गेहूं खरीद के लिए क्रय केंद्रों का संचालन किया जा रहा है लेकिन केंद्रों पर किसानों की उपस्थिति नगण्य बनी हुई है। खरीद आरंभ हुए एक माह बीत जाने के बाद भी अब तक लक्ष्य के सापेक्ष पांच प्रतिशत से भी कम खरीद हुई है। इसका कारण यह है कि बिचौलिए किसानों से लगभग सरकारी रेट पर उनकी उपज उनके घर पहुंचकर खरीद ले रहे हैं। जिले में बने 52 क्रय केंद्रों पर एक मई तक 82 हजार टन खरीद के सापेक्ष मात्र चार हजार टन गेहूं की ही खरीद हो पाई है। इससे अधिकांश क्रय केंद्र सूने पड़े हैं।
कृषि प्रधान जनपद में रबी के चालू सीजन में शासन ने एक अप्रैल से गेहूं की खरीद का कार्य आरंभ कराया है। गेहूं का विक्रय मूल्य 2015 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है। वर्तमान में 52 क्रय केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। गेहूं बेचने के लिए करीब 15 हजार किसानों ने पंजीकरण कराया है। विडंबना यह है कि कहीं बोरे का अभाव तो कहीं तौल मशीन की अनुपलब्धता के कारण खरीद कार्य में तेजी नहीं आ पा रही है। वहीं बिचौलिए किसानों के सीवान में पहुंचकर 1950 से दो हजार रुपये कुंतल की दर से गेहूं खरीद ले रहे हैं। किसान भी खुशी-खुशी उन्हें अपना गेहूं बेच दे रहे हैं क्योंकि इससे उन्हें क्रय केंद्रों पर होने वाली परेशानियों से छुटकारा मिलने के साथ बेचे गए गेहूं का भुगतान भी हाथों-हाथ हो जा रहा है। बताया जा रहा कि किसानों से खरीद के बाद बिचौलिए उपज डंप कर रहे हैं ताकि आने वाले दिनों में दाम बढ़ने पर मुनाफा कमाया जा सके। इससे किसानों का क्रय केंद्रों पर रुझान कम हो गया है। वहीं आने वाले समय में गेहूं के महंगा होने की संभावना भी दिख रही है।
कंदवा। क्षेत्र में गेहूं क्रय केंद्र खुले एक महीने हो गए पर खरीद अब भी गति नहीं पकड़ पा रही है। इसके पीछे का एक कारण सरकार द्वारा तय मूल्य से किसानों को ज्यादा मूल्य खुले बाजार में मिलना है। ऐसे में ज्यादातर किसान अपना गेहूं क्रय केंद्रों पर न ले जाकर व्यापारियों को ही बेच दे रहे हैं।
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कुल खर्च काटने के बाद भी खुले बाजार में गेहूं का मूल्य अधिक मिल रहा है तो कोई किसान क्रय केंद्र पर क्यों जाएगा। वहीं क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने के बाद भुगतान में भी विलंब होता है जबकि घर पर किसानों को नगद में भुगतान कर दिया जाता है। रतन सिंह, सिकठा।
जब खलिहान पर ही दो हजार रुपए का रेट बिना किसी खर्च के मिल जा रहा है तो किसान क्रय केंद्र पर क्यों जाएं। क्रय केंद्र पर ले जाने, लदाई और पल्लेदारी और अन्य खर्च जोड़कर जो मूल्य क्रय केंद्रों पर मिल रहा है, उससे ज्यादा मूल्य तो व्यापारी दे रहे हैं। मृत्युंजय सिंह नागवंशी, चिरईगांव।
प्रदेश सरकार ने क्रय केंद्रों के माध्यम से डोर टू डोर खरीदी करने का निर्देश दिया है। लगभग दो सप्ताह इंतजार करने के बाद डोर टू डोर खरीदी नहीं की गई तो गेहूं बेच दिया जाएगा। गर्मी में गेहूं बेचने के लिए अव्यवस्थित क्रय केंद्रों पर जाना मुनासिब नहीं लग रहा है। हिम्मत बहादुर सिंह, जीयनपुर, शिकारगंज।
साधन सहकारी समिति धूसखास को गेहूं क्रय केंद्र नहीं बनाए जाने से किसान बिचौलियों के हाथों अपनी उपज बेचने को विवश हैं। शासन द्वारा किसानों के गेहूं को हर हाल में क्रय करने का निर्देश होने के बावजूद अधिकारियों की मनमानी से किसानों की उपेक्षा हो रही है। केदार यादव, बसनी।
गेहूं खरीद में तेजी आई है। आने वाले दिनों में खरीद और तेज होने की संभावना है। क्रय केंद्रों पर सभी व्यवस्था मुक्कमल की गई है। जिले के सभी 52 क्रय केंद्रों पर गेहूं की खरीद की जा रही है। अनूप श्रीवास्तव, जिला विपणन अधिकारी।
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कृषि प्रधान जनपद में रबी के चालू सीजन में शासन ने एक अप्रैल से गेहूं की खरीद का कार्य आरंभ कराया है। गेहूं का विक्रय मूल्य 2015 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है। वर्तमान में 52 क्रय केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। गेहूं बेचने के लिए करीब 15 हजार किसानों ने पंजीकरण कराया है। विडंबना यह है कि कहीं बोरे का अभाव तो कहीं तौल मशीन की अनुपलब्धता के कारण खरीद कार्य में तेजी नहीं आ पा रही है। वहीं बिचौलिए किसानों के सीवान में पहुंचकर 1950 से दो हजार रुपये कुंतल की दर से गेहूं खरीद ले रहे हैं। किसान भी खुशी-खुशी उन्हें अपना गेहूं बेच दे रहे हैं क्योंकि इससे उन्हें क्रय केंद्रों पर होने वाली परेशानियों से छुटकारा मिलने के साथ बेचे गए गेहूं का भुगतान भी हाथों-हाथ हो जा रहा है। बताया जा रहा कि किसानों से खरीद के बाद बिचौलिए उपज डंप कर रहे हैं ताकि आने वाले दिनों में दाम बढ़ने पर मुनाफा कमाया जा सके। इससे किसानों का क्रय केंद्रों पर रुझान कम हो गया है। वहीं आने वाले समय में गेहूं के महंगा होने की संभावना भी दिख रही है।
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कंदवा। क्षेत्र में गेहूं क्रय केंद्र खुले एक महीने हो गए पर खरीद अब भी गति नहीं पकड़ पा रही है। इसके पीछे का एक कारण सरकार द्वारा तय मूल्य से किसानों को ज्यादा मूल्य खुले बाजार में मिलना है। ऐसे में ज्यादातर किसान अपना गेहूं क्रय केंद्रों पर न ले जाकर व्यापारियों को ही बेच दे रहे हैं।
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कुल खर्च काटने के बाद भी खुले बाजार में गेहूं का मूल्य अधिक मिल रहा है तो कोई किसान क्रय केंद्र पर क्यों जाएगा। वहीं क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने के बाद भुगतान में भी विलंब होता है जबकि घर पर किसानों को नगद में भुगतान कर दिया जाता है। रतन सिंह, सिकठा।
जब खलिहान पर ही दो हजार रुपए का रेट बिना किसी खर्च के मिल जा रहा है तो किसान क्रय केंद्र पर क्यों जाएं। क्रय केंद्र पर ले जाने, लदाई और पल्लेदारी और अन्य खर्च जोड़कर जो मूल्य क्रय केंद्रों पर मिल रहा है, उससे ज्यादा मूल्य तो व्यापारी दे रहे हैं। मृत्युंजय सिंह नागवंशी, चिरईगांव।
प्रदेश सरकार ने क्रय केंद्रों के माध्यम से डोर टू डोर खरीदी करने का निर्देश दिया है। लगभग दो सप्ताह इंतजार करने के बाद डोर टू डोर खरीदी नहीं की गई तो गेहूं बेच दिया जाएगा। गर्मी में गेहूं बेचने के लिए अव्यवस्थित क्रय केंद्रों पर जाना मुनासिब नहीं लग रहा है। हिम्मत बहादुर सिंह, जीयनपुर, शिकारगंज।
साधन सहकारी समिति धूसखास को गेहूं क्रय केंद्र नहीं बनाए जाने से किसान बिचौलियों के हाथों अपनी उपज बेचने को विवश हैं। शासन द्वारा किसानों के गेहूं को हर हाल में क्रय करने का निर्देश होने के बावजूद अधिकारियों की मनमानी से किसानों की उपेक्षा हो रही है। केदार यादव, बसनी।
गेहूं खरीद में तेजी आई है। आने वाले दिनों में खरीद और तेज होने की संभावना है। क्रय केंद्रों पर सभी व्यवस्था मुक्कमल की गई है। जिले के सभी 52 क्रय केंद्रों पर गेहूं की खरीद की जा रही है। अनूप श्रीवास्तव, जिला विपणन अधिकारी।