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सर्वे करने पहुंचे अधिकारियों का ग्रामीणों ने किया विरोध
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नहरों की सफाई को लेकर सर्वे करने पहुंचे सिंचाई विभाग के अधिकारियों को बृहस्पतिवार को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। ज्यादा संख्या में एकत्रित होते ग्रामीणों को देखकर सर्वे करने वाले अधिकारी वापस लौट गए।
विकास खंड़ क्षेत्र के नेगुरा गांव स्थित सकरारी हेड़ पर सर्वे करने अधिकारियों की टीम बृहस्पतिवार को पहुंची। अधिकारियों को देखकर किसानों नें नाराजगी जताई। इस बीच किसानों नें गांव में फोन कर किसानों की संख्या जूटानी चाही। तब तक सिंचाई विभाग के अधिकारी गाड़ी पर सवार होकर वहां से खिसक लिए। किसानों ने कहा कि जब नहरों में पानी चाहिए तो अधिकारी नहरों का सर्वे कर रहे हैं। किसानों को पानी की जरूरत है, क्योंकि किसी तरह से धान का बीज तैयार किए है। पानी मिलते ही रोपाई का कार्य शुरू कर देगें। कहा कि जमीनी हकीकत जानने के बावजूद भी सिंचाई विभाग के अधिकारी अंजान बन जाते है। जिससे जीविकोपार्जन में बाधाएं उत्पन्न हो जाती हैं। अटौली व ब्यौदा गांव के किसानों का कहना है कि बसगांवा-अटौली और नवली-ब्यौदा माइनर में पानी कभी नहीं चढ़ता। कहा कि समय से पहले सिल्ट, सेवार व जलकुंभी से पटी नहरों की सफाई नहीं होती है। जिसकी वजह से सैकड़ों बीघा खेती बर्बाद हो जाती है। किसान नेता शेषनाथ यादव नें कहा कि कोलपुर माइनर में पानी सीतापोखरी के आगे कभी नहीं बढ़ता है। क्योंकि माइनर सिल्ट, सेवार व जलकुंभी से पटी पड़ी है। इस संबंध में सिंचाई विभाग के एसडीओ अवनीश कुमार ने कहा कि विभागीय तौर पर नहरों की सफाई वर्ष में एक बार अक्टूबर व नवंबर में ही कराई जाती है। जिसका सर्वे किया जा रहा है। इसके बाद नहरें चलाई जाएंगी। इस मौके पर किसान नेता शेषनाथ यादव, गुड्डू शर्मा, रामभरोस यादव, राकेश यादव, त्रिलोकी यादव, मदन सिंह, संतोष सिंह आदि लोग मौजूद रहे।
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विकास खंड़ क्षेत्र के नेगुरा गांव स्थित सकरारी हेड़ पर सर्वे करने अधिकारियों की टीम बृहस्पतिवार को पहुंची। अधिकारियों को देखकर किसानों नें नाराजगी जताई। इस बीच किसानों नें गांव में फोन कर किसानों की संख्या जूटानी चाही। तब तक सिंचाई विभाग के अधिकारी गाड़ी पर सवार होकर वहां से खिसक लिए। किसानों ने कहा कि जब नहरों में पानी चाहिए तो अधिकारी नहरों का सर्वे कर रहे हैं। किसानों को पानी की जरूरत है, क्योंकि किसी तरह से धान का बीज तैयार किए है। पानी मिलते ही रोपाई का कार्य शुरू कर देगें। कहा कि जमीनी हकीकत जानने के बावजूद भी सिंचाई विभाग के अधिकारी अंजान बन जाते है। जिससे जीविकोपार्जन में बाधाएं उत्पन्न हो जाती हैं। अटौली व ब्यौदा गांव के किसानों का कहना है कि बसगांवा-अटौली और नवली-ब्यौदा माइनर में पानी कभी नहीं चढ़ता। कहा कि समय से पहले सिल्ट, सेवार व जलकुंभी से पटी नहरों की सफाई नहीं होती है। जिसकी वजह से सैकड़ों बीघा खेती बर्बाद हो जाती है। किसान नेता शेषनाथ यादव नें कहा कि कोलपुर माइनर में पानी सीतापोखरी के आगे कभी नहीं बढ़ता है। क्योंकि माइनर सिल्ट, सेवार व जलकुंभी से पटी पड़ी है। इस संबंध में सिंचाई विभाग के एसडीओ अवनीश कुमार ने कहा कि विभागीय तौर पर नहरों की सफाई वर्ष में एक बार अक्टूबर व नवंबर में ही कराई जाती है। जिसका सर्वे किया जा रहा है। इसके बाद नहरें चलाई जाएंगी। इस मौके पर किसान नेता शेषनाथ यादव, गुड्डू शर्मा, रामभरोस यादव, राकेश यादव, त्रिलोकी यादव, मदन सिंह, संतोष सिंह आदि लोग मौजूद रहे।
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