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समान नागरिक संहिता संवैधानिक, देश में लागू होकर रहेगा : न्यायमूर्ति शेखर यादव
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पीडीडीयू नगर में विश्व हिंदू परिषद के कार्यशाला में मुख्यअतिथि न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव को
पीडीडीयू नगर। उच्च न्यायालय इलाहाबाद के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश शेखर यादव ने कहा कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) संवैधानिक है और यह देश में लागू होकर रहेगा। यह बातें उन्होंने रविवार को विश्व हिंदू परिषद के विधि प्रकोष्ठ की दो दिवसीय कार्यशाला के दौरान कहीं।
उन्होंने कहा कि ‘हिंदू’ एक बहुत व्यापक शब्द है, यह केवल पूजा पद्धति नहीं बल्कि जीवन शैली है। उन्होंने कहा कि हिंदू सनातन है और भारत में रहने वाला हर नागरिक, किसी भी पंथ को मानने वाला हो, सांस्कृतिक रूप से हिंदू है।
उन्होंने 8 दिसंबर 2024 को विश्व हिंदू परिषद के एक कार्यक्रम में दिए अपने बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में बहुसंख्यक समाज के अनुसार ही देश का संचालन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ कहने वाला व्यक्ति हिंदू है और जो नहीं कहता, वह स्वयं निर्णय ले। उन्होंने कहा कि यदि यह देश विरोधी बात है तो वे इसे सौ बार दोहराएंगे।
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उन्होंने समाज से एकजुट होने का आह्वान करते हुए कहा कि हिंदू समाज बंटा हुआ है, जिसका लाभ विध्वंसकारी शक्तियां उठाती हैं। उन्होंने कहा कि सभी ईश्वर की संतान हैं और जातिवाद समाज को कमजोर करता है। भेदभाव से परिवार, समाज और देश में दूरी बढ़ी है, जिसे समाप्त करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि धर्मांतरण का एक प्रमुख कारण जातिगत भेदभाव है। देश को कमजोर करने के लिए समाज को बांटने और संस्कृति को नष्ट करने का प्रयास किया जाता है, जिससे बचने की जरूरत है।
न्यायमूर्ति शेखर यादव ने बच्चों में संस्कार और महिला सम्मान की भावना विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संस्कारित बच्चा ही संस्कारवान देश का निर्माण करता है।
कार्यशाला में मदरसों, धर्मांतरण, जनसांख्यिकी और आदिवासी महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। इस अवसर पर विभिन्न पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
इनसेट:
250 लोगों ने ली संगठन की सदस्यता
दो दिवसीय कार्यशाला में चंदौली, प्रयागराज, अमेठी, जौनपुर, गाजीपुर और वाराणसी सहित विभिन्न जिलों से आए करीब 250 लोगों को विश्व हिंदू परिषद के विधि प्रकोष्ठ की सदस्यता दिलाई गई।
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उन्होंने कहा कि ‘हिंदू’ एक बहुत व्यापक शब्द है, यह केवल पूजा पद्धति नहीं बल्कि जीवन शैली है। उन्होंने कहा कि हिंदू सनातन है और भारत में रहने वाला हर नागरिक, किसी भी पंथ को मानने वाला हो, सांस्कृतिक रूप से हिंदू है।
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उन्होंने 8 दिसंबर 2024 को विश्व हिंदू परिषद के एक कार्यक्रम में दिए अपने बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में बहुसंख्यक समाज के अनुसार ही देश का संचालन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ कहने वाला व्यक्ति हिंदू है और जो नहीं कहता, वह स्वयं निर्णय ले। उन्होंने कहा कि यदि यह देश विरोधी बात है तो वे इसे सौ बार दोहराएंगे।
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उन्होंने समाज से एकजुट होने का आह्वान करते हुए कहा कि हिंदू समाज बंटा हुआ है, जिसका लाभ विध्वंसकारी शक्तियां उठाती हैं। उन्होंने कहा कि सभी ईश्वर की संतान हैं और जातिवाद समाज को कमजोर करता है। भेदभाव से परिवार, समाज और देश में दूरी बढ़ी है, जिसे समाप्त करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि धर्मांतरण का एक प्रमुख कारण जातिगत भेदभाव है। देश को कमजोर करने के लिए समाज को बांटने और संस्कृति को नष्ट करने का प्रयास किया जाता है, जिससे बचने की जरूरत है।
न्यायमूर्ति शेखर यादव ने बच्चों में संस्कार और महिला सम्मान की भावना विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संस्कारित बच्चा ही संस्कारवान देश का निर्माण करता है।
कार्यशाला में मदरसों, धर्मांतरण, जनसांख्यिकी और आदिवासी महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। इस अवसर पर विभिन्न पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
इनसेट:
250 लोगों ने ली संगठन की सदस्यता
दो दिवसीय कार्यशाला में चंदौली, प्रयागराज, अमेठी, जौनपुर, गाजीपुर और वाराणसी सहित विभिन्न जिलों से आए करीब 250 लोगों को विश्व हिंदू परिषद के विधि प्रकोष्ठ की सदस्यता दिलाई गई।