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Chandauli News: सज गए माता रानी के दरबार, नौ दिन होगी उपासना
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नवरात्र के पूर्व संध्या पीडीडीयू नगर में पूजा सामग्री की खरीदारी करतीं महिलाएं। संवाद
पीडीडीयू नगर। शारदीय नवरात्र की शुरुआत रविवार से होगी। नवरात्र की पूर्व संध्या पर शनिवार को देवी मंदिरों में रंग-रोगन और सफाई की गई। वहीं, मंदिरों को फूलमाला और बिजली की झालरों से सजाया गया। वहीं, बाजार में फल, फूलमाला और पूजन सामग्री के लिए लोगों की भीड़ जुटी रही। वहीं, घरों में भी कलश स्थापना और पूजन की तैयारियां होती रहीं।
इस वर्ष शारदीय नवरात्र दस दिनों का है। इससे लोगों में उत्साह बढ़ा हुआ है। घरों में कलश स्थापित कर पूजा-अर्चना की जाएगी। वहीं, जिले में 280 पंडालों में मां दुर्गा, माता लक्ष्मी, माता सरस्वती, प्रथम पूज्य गणेश और कुमार कार्तिकेय की प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। अधिकतर पंडालों में पंचमी को प्रतिमाएं स्थापित होंगी। वहीं, पीडीडीयू नगर के लाठ नंबर दो, लाठ नंबर एक और चकिया के मुबारकपुर सहित छह पंडालों में नवरात्र के पहले दिन ही प्रतिमाएं स्थापित कर पूजा शुरू की जाएगी। नगर के काली माता मंदिर के समीप, गल्ला मंडी आदि स्थानों पर दुकानें सजी रहीं। नगर के रविनगर, कैलाशपुरी, नई बस्ती, शाहकुटी, अलीनगर, कैथापुर, विकासनगर, गल्ला मंडी, एलबीएस कटरा, जीटी रोड स्थित काली मंदिर और रेलवे क्षेत्र की आरपीएफ कॉलोनी, गया कॉलोनी, मानसनगर, प्लांट डिपो व लोको कॉलोनी सहित विभिन्न कॉलोनियों के देवी मंदिरों में साफ-सफाई की गई।
इनसेट
गोटे वाली चुनरी बढ़ाएगी आकर्षण, पूजन सामग्री की दुकानें सजीं
संवाद न्यूज एजेंसी
सचित्र-
चकिया/शिकारगंज। शारदीय नवरात्र को लेकर नगर के बाजारों में रौनक बढ़ गई है। मां दुर्गा के पूजन और शृंगार के लिए दुकानों पर आकर्षक चुनरियां, गोटे, मुकुट, हार और अन्य पूजन सामग्री सजाई गई है। इस बार गोटे, जरी, मोती और चमकीले सितारों से सजी चुनरियां महिलाओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। दुकानदारों के मुताबिक, नवरात्र की खरीदारी धीरे-धीरे जोर पकड़ने लगी है। पर्व शुरू होने के साथ बाजारों में ग्राहकों की भीड़ और बढ़ने की उम्मीद है।
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नवरात्र से पहले ही नगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भक्तिमय माहौल बनने लगा है। चकिया नगर के गांधी पार्क तिराहा, मां काली मंदिर रोड, मां काली मंदिर परिसर, जागेश्वरनाथ धाम परिसर और फुटपाथों पर पूजन सामग्री की दुकानें सज गई हैं। दुकानों पर माता रानी को अर्पित करने के लिए लाल रंग की आकर्षक चुनरियां विशेष रूप से रखी गई हैं। छोटी-बड़ी चुनरियां आकार, डिजाइन और गुणवत्ता के अनुसार 20 रुपये से लेकर 500 रुपये तक में उपलब्ध हैं। इनमें गोटे और सितारों से सजी चुनरियां ग्राहकों को खूब पसंद आ रही हैं। दुकानदारों के अनुसार, जो सामग्री पहले 120 रुपये प्रति पैकेट मिलती थी, उसकी कीमत अब बढ़कर 140 रुपये तक पहुंच गई है। व्यापारी संदीप सैनी और धीरज मोदनवाल ने बताया कि गोटे और सितारों वाली चुनरियों की मांग अधिक है। माता रानी के शृंगार के लिए बिंदी, चूड़ी, सिंदूर, हार, मुकुट और अन्य सामग्री भी ग्राहक पसंद कर रहे हैं।
इनसेट-
साढ़े चार सौ साल पुराना है मां रेहड़ा भगवती का दरबार
सचित्र-
कंदवा। विकास खंड बरहनी के चिरईगांव में कर्मनाशा नदी के तट पर स्थित मां रेहड़ा भगवती का मंदिर धार्मिक आस्था के साथ पौराणिक इतिहास को भी समेटे हुए है। करीब 460 वर्ष पुराने इस सिद्ध मंदिर में नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। क्षेत्र के अलावा बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ से भी बड़ी संख्या में भक्त मां के दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। मान्यता है कि मां की आराधना करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और सुख-शांति की प्राप्ति होती है।
मंदिर की स्थापना को लेकर गांव के बुजुर्गों के अनुसार, करीब 460 वर्ष पूर्व इस क्षेत्र में रेहड़ा नाम का जंगल हुआ करता था। उस समय जंगल में पशु चराने वाले चरवाहों को जमीन में धंसी हुई मां की प्रतिमा दिखाई दी। कुछ समय बाद प्रतिमा धीरे-धीरे जमीन के ऊपर दिखाई देने लगी। चरवाहों ने इसकी जानकारी गांव के बुजुर्गों को दी। इसके बाद ग्रामीण मौके पर पहुंचे और प्रतिमा की पूजा-अर्चना शुरू कर दी। धीरे-धीरे यह स्थान लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया। वर्ष 2014 में त्रिदंडी स्वामी के शिष्य सुंदरराज महाराज के सानिध्य में लक्ष्मीनारायण महायज्ञ का आयोजन हुआ। इसके बाद ग्रामीणों ने पुराने छोटे मंदिर की जगह भव्य मंदिर का निर्माण कराया। वर्तमान में यह मंदिर क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है।
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इस वर्ष शारदीय नवरात्र दस दिनों का है। इससे लोगों में उत्साह बढ़ा हुआ है। घरों में कलश स्थापित कर पूजा-अर्चना की जाएगी। वहीं, जिले में 280 पंडालों में मां दुर्गा, माता लक्ष्मी, माता सरस्वती, प्रथम पूज्य गणेश और कुमार कार्तिकेय की प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। अधिकतर पंडालों में पंचमी को प्रतिमाएं स्थापित होंगी। वहीं, पीडीडीयू नगर के लाठ नंबर दो, लाठ नंबर एक और चकिया के मुबारकपुर सहित छह पंडालों में नवरात्र के पहले दिन ही प्रतिमाएं स्थापित कर पूजा शुरू की जाएगी। नगर के काली माता मंदिर के समीप, गल्ला मंडी आदि स्थानों पर दुकानें सजी रहीं। नगर के रविनगर, कैलाशपुरी, नई बस्ती, शाहकुटी, अलीनगर, कैथापुर, विकासनगर, गल्ला मंडी, एलबीएस कटरा, जीटी रोड स्थित काली मंदिर और रेलवे क्षेत्र की आरपीएफ कॉलोनी, गया कॉलोनी, मानसनगर, प्लांट डिपो व लोको कॉलोनी सहित विभिन्न कॉलोनियों के देवी मंदिरों में साफ-सफाई की गई।
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इनसेट
गोटे वाली चुनरी बढ़ाएगी आकर्षण, पूजन सामग्री की दुकानें सजीं
संवाद न्यूज एजेंसी
सचित्र-
चकिया/शिकारगंज। शारदीय नवरात्र को लेकर नगर के बाजारों में रौनक बढ़ गई है। मां दुर्गा के पूजन और शृंगार के लिए दुकानों पर आकर्षक चुनरियां, गोटे, मुकुट, हार और अन्य पूजन सामग्री सजाई गई है। इस बार गोटे, जरी, मोती और चमकीले सितारों से सजी चुनरियां महिलाओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। दुकानदारों के मुताबिक, नवरात्र की खरीदारी धीरे-धीरे जोर पकड़ने लगी है। पर्व शुरू होने के साथ बाजारों में ग्राहकों की भीड़ और बढ़ने की उम्मीद है।
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नवरात्र से पहले ही नगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भक्तिमय माहौल बनने लगा है। चकिया नगर के गांधी पार्क तिराहा, मां काली मंदिर रोड, मां काली मंदिर परिसर, जागेश्वरनाथ धाम परिसर और फुटपाथों पर पूजन सामग्री की दुकानें सज गई हैं। दुकानों पर माता रानी को अर्पित करने के लिए लाल रंग की आकर्षक चुनरियां विशेष रूप से रखी गई हैं। छोटी-बड़ी चुनरियां आकार, डिजाइन और गुणवत्ता के अनुसार 20 रुपये से लेकर 500 रुपये तक में उपलब्ध हैं। इनमें गोटे और सितारों से सजी चुनरियां ग्राहकों को खूब पसंद आ रही हैं। दुकानदारों के अनुसार, जो सामग्री पहले 120 रुपये प्रति पैकेट मिलती थी, उसकी कीमत अब बढ़कर 140 रुपये तक पहुंच गई है। व्यापारी संदीप सैनी और धीरज मोदनवाल ने बताया कि गोटे और सितारों वाली चुनरियों की मांग अधिक है। माता रानी के शृंगार के लिए बिंदी, चूड़ी, सिंदूर, हार, मुकुट और अन्य सामग्री भी ग्राहक पसंद कर रहे हैं।
इनसेट-
साढ़े चार सौ साल पुराना है मां रेहड़ा भगवती का दरबार
सचित्र-
कंदवा। विकास खंड बरहनी के चिरईगांव में कर्मनाशा नदी के तट पर स्थित मां रेहड़ा भगवती का मंदिर धार्मिक आस्था के साथ पौराणिक इतिहास को भी समेटे हुए है। करीब 460 वर्ष पुराने इस सिद्ध मंदिर में नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। क्षेत्र के अलावा बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ से भी बड़ी संख्या में भक्त मां के दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। मान्यता है कि मां की आराधना करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और सुख-शांति की प्राप्ति होती है।
मंदिर की स्थापना को लेकर गांव के बुजुर्गों के अनुसार, करीब 460 वर्ष पूर्व इस क्षेत्र में रेहड़ा नाम का जंगल हुआ करता था। उस समय जंगल में पशु चराने वाले चरवाहों को जमीन में धंसी हुई मां की प्रतिमा दिखाई दी। कुछ समय बाद प्रतिमा धीरे-धीरे जमीन के ऊपर दिखाई देने लगी। चरवाहों ने इसकी जानकारी गांव के बुजुर्गों को दी। इसके बाद ग्रामीण मौके पर पहुंचे और प्रतिमा की पूजा-अर्चना शुरू कर दी। धीरे-धीरे यह स्थान लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया। वर्ष 2014 में त्रिदंडी स्वामी के शिष्य सुंदरराज महाराज के सानिध्य में लक्ष्मीनारायण महायज्ञ का आयोजन हुआ। इसके बाद ग्रामीणों ने पुराने छोटे मंदिर की जगह भव्य मंदिर का निर्माण कराया। वर्तमान में यह मंदिर क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है।

नवरात्र के पूर्व संध्या पीडीडीयू नगर में पूजा सामग्री की खरीदारी करतीं महिलाएं। संवाद

नवरात्र के पूर्व संध्या पीडीडीयू नगर में पूजा सामग्री की खरीदारी करतीं महिलाएं। संवाद