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तीजनबाई ने प्रस्तुत किया द्रोपदी स्वयंवर
ब्यूरो/अमर उजाला, चंदौली
Updated Thu, 08 Oct 2015 01:53 AM IST
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दुलहीपुर स्थित सनबीम स्कूल में बुधवार को प्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजनबाई
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ने छात्रों के बीच अपने अंदाज में द्रोपदी स्वयंवर प्रस्तुत कर खूब
तालियां बजवाईं।
वे पूर्वांचल स्पीक मैके के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने आई थीं।
इस दौरान तीजनबाई ने कहा कि भारत की पहचान भारतीय संस्कृति से होनी चाहिए। भारतीय संस्कृति को बचाने एवं बढ़ाने का दायित्व बच्चों पर ही है।
इसलिए जरूरी है कि आज की पीढ़ी अपनी परंपराओं, संस्कृति, साहित्य एवं लोक जीवन की विशेषताओं को जाने। उन्होंने बताया कि पांडवों की बानी (कथा) ही पंडवानी है।
इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ दीप जलाकर किया गया। प्रधानाचार्य डा. शैलेश सिंघल ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों की सार्थकता इसी में है कि आज की पीढ़ी भारतीय संस्कृति और परंपराओं को पहचाने। कार्यक्रम का संचालन हेड मिस्ट्रेस स्मृति खन्ना ने किया।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में दुर्ग के एक छोटे से गांव अटारी (पाटन) के एक जनजाति समुदाय में जन्म लेने वाली तीजनबाई 13 वर्ष की उम्र से ही इस शैली को प्रस्तुत करती चली आ रही हैं।
उन्हें गायकी की इस विशिष्ट शैली के लिए देश-विदेश में अनेक पुरस्कार मिल चुके हैं।
वे पूर्वांचल स्पीक मैके के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने आई थीं।
इस दौरान तीजनबाई ने कहा कि भारत की पहचान भारतीय संस्कृति से होनी चाहिए। भारतीय संस्कृति को बचाने एवं बढ़ाने का दायित्व बच्चों पर ही है।
इसलिए जरूरी है कि आज की पीढ़ी अपनी परंपराओं, संस्कृति, साहित्य एवं लोक जीवन की विशेषताओं को जाने। उन्होंने बताया कि पांडवों की बानी (कथा) ही पंडवानी है।
इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ दीप जलाकर किया गया। प्रधानाचार्य डा. शैलेश सिंघल ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों की सार्थकता इसी में है कि आज की पीढ़ी भारतीय संस्कृति और परंपराओं को पहचाने। कार्यक्रम का संचालन हेड मिस्ट्रेस स्मृति खन्ना ने किया।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में दुर्ग के एक छोटे से गांव अटारी (पाटन) के एक जनजाति समुदाय में जन्म लेने वाली तीजनबाई 13 वर्ष की उम्र से ही इस शैली को प्रस्तुत करती चली आ रही हैं।
उन्हें गायकी की इस विशिष्ट शैली के लिए देश-विदेश में अनेक पुरस्कार मिल चुके हैं।