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कबीर मठ में हुए संत समागम में बही ज्ञान की गंगा

Wed, 13 Jan 2021 12:59 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 13 Jan 2021 12:59 AM IST
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Sant Samagam is necessary for social consciousness
पड़ाव। क्षेत्र के सद्गुरु आनंद मठ सीतापुर नई डांडी में आयोजित संत समागम में सोमवार की शाम ज्ञान की गंगा बही। समागम में पूर्वांचल के कवि, साहित्यकार और प्रबुद्धजनों ने लोगों को सच्चे आनंद के लिए अपने अंदर झांकने और ऋतुओं से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। आचार्य रामानंद मिर्जापुरी ने निर्गुण सुनाकर लोगों को भक्ति रस में डूबोया।
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कार्यक्रम की शुरूआत रामानंद मिर्जापुरी ने डाली डाली कोयलिया, बोले सुगना छत पर डोले, कहे कबीर सुनो भाई साधेे, ई का लड़ी है सुनाकर किया। संकीर्तन में रामाश्रय, भगत गोपाल, ओम प्रकाश ने गीतों से मन मोहा। मठ के प्रमुख महंत आनंद दास ने कहा कि संत महंत का जीवन बसंत सा होना चाहिए जो आपके व्यवहार एवं वाणी से समाज में रस भर दे। मनुष्य कोयल की भांति चहक उठे। साहित्यकार डॉ. जयशंकर ने कहा अवसाद विषाद दोनों मानव के अंतर्निहित होते हैं। अच्छे कर्म व्यवहार से उल्लास की अनुभूति, गलत कर्म से पीड़ा की अनुभूति होती है। हमें ऋतुओंसे सीखना चाहिए। अवसाद को छोड़ नई उमंग तरंग उत्साह एवं प्रफुल्ललता से नई उपलब्धि हासिल करना चाहिए। डॉ. बनवारी यादव ने कहा कबीर साहब का पूरा का पूरा जीवन दर्शन रूढ़ियों को छोड़ नित नया करने का नसीहत देता है। वसंतआगमन के स्वागत में ऐसे कार्यक्रम सामाजिक चेतना का नया द्वारा खोल देता है। इस मौके पर ललित दास, मनोज, मृदुल, धर्मेंद्र, विजय बहादुर, गायत्री, प्रतिमा, हरिनारायण रहे। अतिथियों का स्वागत सदानंद छोटू ने किया।
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