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भू-जल संरक्षण को चुनौती दे रहे अवैध आरओ प्लांट व सर्विस सेंटर

Mon, 02 May 2022 01:09 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 02 May 2022 01:09 AM IST
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RO plant and service center challenging ground water conservation
पीडीडीयू नगर। भू-जल संरक्षण के लिए नई-नई योजनाएं चलाई जा रही हैं, पर जिले में हो रहे भूजल दोहन पर किसी का ध्यान नहीं है। जिले के कई इलाकों में अवैध रूप से आरओ प्लांट और गाड़ी धोने के नाम पर बिना रजिस्ट्रेशन के सर्विस सेंटर का संचालन किया जा रहा है। इससे प्रतिदिन कई लाख लीटर जल नालियों में बहकर बर्बाद हो रहा है। नियम और कानून को ताक पर रखकर आरओ प्लांट या सर्विस सेंटर के संचालक मनमाने तरीके से पानी की बर्बादी कर रहे हैं।
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जिले के कई नगरीय क्षेत्रों में कुकुरमुत्ता की तरह आरओ प्लांट व वाहन की धुलाई करने वाले सर्विस सेंटर खुले हुए हैं। जिले में करीब 20 आरओ प्लांट और 50 सर्विस सेंटर संचालित हैं। इनमें अधिकांश बिना पंजीकरण के चल रहे हैं। जिम्मेदारों के मौन धारण करने के कारण इनकी संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। इनका न तो रजिस्ट्रेशन हैं न ही इन्हें कोई लाइसेंस दिया गया है। बिना सील बंद पानी की बिक्री पर प्रतिबंध होने के बावजूद कारोबारी रोज केन के माध्यम से हजारों लीटर पानी की आपूर्ति कर रहे हैं। वहीं इन प्लांटों में प्रतिदिन हजारों लीटर पानी बहकर बर्बाद हो रहा है। जिले का भूजल-स्तर लगातार गिरने के बाद भी जिला प्रशासन का ध्यान इन अवैध आरओ प्लांट व सर्विस सेंटरों पर नहीं जा रहा है। इससे आने वाले दिनों में जिले में पानी का संकट गहरा सकता है।
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जिले की आबादी करीब 22 लाख है। इनमें से सात से आठ लाख लोग 20 लीटर के केन में बिकने वाला पानी खरीद कर पीते हैं। शादी-विवाह के अवसर पर तो इसकी मांग और ज्यादा हो जाती है। शहर में एक केन पानी 25 से 40 रुपये तक में बेचा जाता है। डिमांड अधिक होने के कारण बोरिंग के पानी को ट्रीट कर 20 लीटर के केन में पैक कर पानी आपूर्ति का करोबार जिले के अलग-अलग इलाकों में खूब फल-फूल रहा है।
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बोतल या केन के पानी में कुछ में टीडीएस की मात्रा अधिक मिली है तो कुछ में वैक्टीरिया पाए गए हैं। जिले में लाखों लोग शुद्ध पानी की उम्मीद में पैसे खर्च कर इन प्लांटों का बोतल बंद पानी खरीद रहे हैं। उनकी सेहत के साथ भी खिलवाड़ हो रहा है। टीडीएस बढ़े पानी का लंबे समय तक सेवन करने से कई गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। 500 से 505 से अधिक टीडीएस का पानी लगातार पीते रहने से किडनी से संबंधित बीमारियां, खून की कमी और आंतों से संबंधित बीमारियां हो सकती हैं। डॉ. एके सिंह, वरिष्ठ चिकित्सक, पीडीडीयू नगर।
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