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हरियाली बढ़ाने को हुआ पौधरोपण, ग्रामीणों ने उखाड़कर रोप दिये धान
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नौगढ़। पर्यावरण संरक्षण और वनों को हरा भरा करने के उद्देश्य से वन विभाग के साथ अन्य विभाग भी बड़े स्तर पर पौधरोपण कर रहे हैं। इस वर्ष भी पर्वतीय वन क्षेत्र के साथ सड़क के किनारे और गांवों में वृहद स्तर पर वन महोत्सव के तहत नौगढ़ ब्लाक में 10 लाख से अधिक पौधरोपण किया गया वनीय गांव में जहां वृहद पौधरोपण किया गया था वहां ग्रामीणों ने पौधे उखाड़ कर धान की रोपाई कर कर दी। वहीं कई इलाकों में पौधे सूख चुके हैं।
प्रदेश में एक से सात जुलाई तक वन महोत्सव के तहत पौधरोपण अभियान चलाया गया। इसके तहत वन प्रभाग के इलाके में वन विभाग ने जहां दस लाख पौधों का रोपण किया। वहीं राजस्व विभाग, रेशम, बेसिक शिक्षा,माध्यमिक शिक्षा, ग्राम पंचायत , आंगनबाड़ी पीडब्ल्यूडी समेत अन्य विभागों की ओर से प्रत्येक ग्राम पंचायतों में पौधे रोपे गए। प्रत्येक ग्राम पंचायतों में दो हजार पौधे रोपे गए हैं। लेकिन वर्तमान में एक भी ग्राम पंचायत ऐसी नहीं है जहां पौधे सुरक्षित हों। लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी नतीजा शून्य है।
पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों ने सड़क के किनारे पौधों को लगाकर छोड़ दिया। राजस्व विभाग की ओर से लगाए गए छायादार और फलदार पौधों के संरक्षण ना होने से ज्यादातर सूख गए या उन्हें मवेशी चट कर गए हैं, खोदे गए गड्ढों में पौधे लगाकर तहसीलदार से लेकर लेखपाल तक सुरक्षा करना भूल गए। हालांकि पौधों को लगाने के बाद सुरक्षा की जिम्मेदारी का निर्वहन वन विभाग करता है।
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वन क्षेत्राधिकारी नौगढ़ रिजवान खान ने बताया कि एक पौधा लगाने पर 4.28 रुपये खर्च आता है। वहीं हरित पट्टी मॉडल के तहत पौधरोपण करने में 14.16 रुपये लागत आती है। हरित पट्टी मॉडल वृक्षारोपण में आरसीसी और कांटेदार तारों का प्रयोग होता है। स्थानीय बाजार निवासी पीर मुहम्मद ने कहा कि यदि पौधों की सुरक्षा होती तो पूरा क्षेत्र हरा भरा हो जाता। इंद्रजीत भारती ने कहा कि वन विभाग को सामाजिक वानिकी के तहत पौधे लगाकर सुरक्षा की जिम्मेदारी ग्रामीणों को सौंपनी चाहिए। यसवंत सिंह यादव ने कहा कि वन विभाग स्वयं पौधरोपण के नाम पर खानापूर्ति करता है। अधिकतर पौधे कागजों पर ही रोपे जाते हैं। देव जायसवाल ने कहा कि पौधों के रोपण के साथ उनकी सुरक्षा भी जरूरी है।
पौधारोपण के साथ ही विभाग की ओर से पौधों की सुरक्षा के लिए इंतजाम किए जाते हैं। बड़े पैमाने पर पौधरोपण होने से संरक्षण में कठिनाई होती है लेकिन कोशिश होती है कि पौधों को बचाया जाए। इसके अलावा पौधा संरक्षण के लिए इसके लिए व्यापक जन जागरण अभियान चलाकर आम लोगों को भागीदार बनाए जाने की जरूरत है। तभी शत-प्रतिशत इसमें कामयाबी मिलेगी। महावीर कौजलगी, डीएफओ रामनगर
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प्रदेश में एक से सात जुलाई तक वन महोत्सव के तहत पौधरोपण अभियान चलाया गया। इसके तहत वन प्रभाग के इलाके में वन विभाग ने जहां दस लाख पौधों का रोपण किया। वहीं राजस्व विभाग, रेशम, बेसिक शिक्षा,माध्यमिक शिक्षा, ग्राम पंचायत , आंगनबाड़ी पीडब्ल्यूडी समेत अन्य विभागों की ओर से प्रत्येक ग्राम पंचायतों में पौधे रोपे गए। प्रत्येक ग्राम पंचायतों में दो हजार पौधे रोपे गए हैं। लेकिन वर्तमान में एक भी ग्राम पंचायत ऐसी नहीं है जहां पौधे सुरक्षित हों। लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी नतीजा शून्य है।
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पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों ने सड़क के किनारे पौधों को लगाकर छोड़ दिया। राजस्व विभाग की ओर से लगाए गए छायादार और फलदार पौधों के संरक्षण ना होने से ज्यादातर सूख गए या उन्हें मवेशी चट कर गए हैं, खोदे गए गड्ढों में पौधे लगाकर तहसीलदार से लेकर लेखपाल तक सुरक्षा करना भूल गए। हालांकि पौधों को लगाने के बाद सुरक्षा की जिम्मेदारी का निर्वहन वन विभाग करता है।
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वन क्षेत्राधिकारी नौगढ़ रिजवान खान ने बताया कि एक पौधा लगाने पर 4.28 रुपये खर्च आता है। वहीं हरित पट्टी मॉडल के तहत पौधरोपण करने में 14.16 रुपये लागत आती है। हरित पट्टी मॉडल वृक्षारोपण में आरसीसी और कांटेदार तारों का प्रयोग होता है। स्थानीय बाजार निवासी पीर मुहम्मद ने कहा कि यदि पौधों की सुरक्षा होती तो पूरा क्षेत्र हरा भरा हो जाता। इंद्रजीत भारती ने कहा कि वन विभाग को सामाजिक वानिकी के तहत पौधे लगाकर सुरक्षा की जिम्मेदारी ग्रामीणों को सौंपनी चाहिए। यसवंत सिंह यादव ने कहा कि वन विभाग स्वयं पौधरोपण के नाम पर खानापूर्ति करता है। अधिकतर पौधे कागजों पर ही रोपे जाते हैं। देव जायसवाल ने कहा कि पौधों के रोपण के साथ उनकी सुरक्षा भी जरूरी है।
पौधारोपण के साथ ही विभाग की ओर से पौधों की सुरक्षा के लिए इंतजाम किए जाते हैं। बड़े पैमाने पर पौधरोपण होने से संरक्षण में कठिनाई होती है लेकिन कोशिश होती है कि पौधों को बचाया जाए। इसके अलावा पौधा संरक्षण के लिए इसके लिए व्यापक जन जागरण अभियान चलाकर आम लोगों को भागीदार बनाए जाने की जरूरत है। तभी शत-प्रतिशत इसमें कामयाबी मिलेगी। महावीर कौजलगी, डीएफओ रामनगर