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झुलसा रोग की चपेट में धान की फसल, दवाओं का छिड़काव करें किसान
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चंदौली। दिन में अधिक तापमान, रात में सामान्य तापमान होने तथा आद्रता बढ़ जाने से धान की फसल झुलसा रोग और दीमक की चपेट में आ गई है। फसल में लगे इन रोगों से मुक्ति पाने के लिए किसानों ने तत्परता नहीं दिखाई तो धान की 60 फीसद फसल खराब हो जाएगी। कृषि वैज्ञानिकों ने तेजी से फैलने वाले इन रोगों से छुटकारा पाने के लिए किसानों को रासायनिक दवाओं के छिड़काव की सलाह दी है।
मुख्यालय स्थित कृषि विज्ञान केन्द्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ अभय दीप गौतम ने कहा कि धान की फसल में तना छेदक व झुलसा रोग की समस्या उत्पन्न हुई है। इससे बचाने के लिए दवाओं का छिड़काव करना होगा। इस रोग से पौधाें का विकास रुक जाता है। इसके रोकथाम के लिए कार्बोफ्यूरान थ्री जी 20 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से तीन से पांच सेमी स्थित पानी या काप्टाप हाइड्रोक्लोराइट 4 प्रतिशत 18 किग्रा प्रति लीटर की दर से तीन से पांच सेमी पानी में छिड़काव करना चाहिए। स्प्रे करने के लिए किसान भाई कारटॉप 50 डब्लू.पी. 800 ग्राम हेक्टयर या क्लोरोपाइसीफास का प्रयोग 300 से 400 लीटर पानी में घोल बनाकर कर सकते हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक अभयदीप गौतम झुलसा रोग के लक्षण पत्तियों पर दिखाई पड़ते हैं। पत्तियों पर छोटे-छोटे भूरे और काले रंग के दाने दिखाई देते हैं जिन्हे स्कलेरोपियम कहते हैं। ये हल्का झटका लगने पर नीचे गिर जाते हैं। ये अधिक होने पर पत्तियां खराब हो जाती हैं और पौधे झुलसे हुए प्रतीत होते हैं। इस रोग से 50 प्रतिशत तक नुकसान हो सकता है। इसके नियंत्रण के लिए प्रोपिकोनाजोया हेक्साकोनाजोल की 2 मिली मात्रा प्रति लीटर घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए।
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मुख्यालय स्थित कृषि विज्ञान केन्द्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ अभय दीप गौतम ने कहा कि धान की फसल में तना छेदक व झुलसा रोग की समस्या उत्पन्न हुई है। इससे बचाने के लिए दवाओं का छिड़काव करना होगा। इस रोग से पौधाें का विकास रुक जाता है। इसके रोकथाम के लिए कार्बोफ्यूरान थ्री जी 20 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से तीन से पांच सेमी स्थित पानी या काप्टाप हाइड्रोक्लोराइट 4 प्रतिशत 18 किग्रा प्रति लीटर की दर से तीन से पांच सेमी पानी में छिड़काव करना चाहिए। स्प्रे करने के लिए किसान भाई कारटॉप 50 डब्लू.पी. 800 ग्राम हेक्टयर या क्लोरोपाइसीफास का प्रयोग 300 से 400 लीटर पानी में घोल बनाकर कर सकते हैं।
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कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक अभयदीप गौतम झुलसा रोग के लक्षण पत्तियों पर दिखाई पड़ते हैं। पत्तियों पर छोटे-छोटे भूरे और काले रंग के दाने दिखाई देते हैं जिन्हे स्कलेरोपियम कहते हैं। ये हल्का झटका लगने पर नीचे गिर जाते हैं। ये अधिक होने पर पत्तियां खराब हो जाती हैं और पौधे झुलसे हुए प्रतीत होते हैं। इस रोग से 50 प्रतिशत तक नुकसान हो सकता है। इसके नियंत्रण के लिए प्रोपिकोनाजोया हेक्साकोनाजोल की 2 मिली मात्रा प्रति लीटर घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए।
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