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कर्मनाशा पुल की एक लेन बंद, पुल पर बन रही रबरयुक्त सड़क
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सैयदराजा। कर्मनाशा नदी पर बने पुल की मरम्मत के बाद उसे हाल में चालू किया गया था लेकिन बुधवार को यूपी से बिहार जाने वाली लेन को अधिकारियों ने एक सप्ताह के लिए बंद कर दिया है। अब एनएचएआई के अधिकारी पुल पर कंक्रीट और तारकोल की सड़क को उखाड़कर उसकी जगह रबर युक्त सड़क बना रहे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि इससे पुल पर 75 फीसदी भार कम हो जाएगा। वहीं एक लेन बंद होने से बार्डर पर जाम की स्थिति रही और वाहनों को ब्रिटिश पुल से बिहार की ओर रवाना किया गया। एनएचएआई (नेशनल हाइवे अथारिटी आफ इंडिया) के अधिकारियों की दूरदर्शिता की कमी के चलते यूपी-बिहार के बीच आने जाने वाले लोगों को एक बार फिर से परेशानी उठानी पड़ रही है।
यूपी-बिहार को जोड़ने वाला कर्मनाशा नदी पर बना पक्का पुल ओवरलोड वाहनों के चलते 28 दिसंबर 2019 को क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद ट्रकों को ब्रिटिश काल में कर्मनाशा नदी के ऊपर बने पुल से गुजारा जा रहा था। वहीं एक स्टील पुल का भी निर्माण किया था। फ्लाईओवर की मरम्मत कर एक वर्ष बाद हाल ही में पुल को फिर से चालू किया गया था। अब एनएचएआई के अधिकारियों ने पुल पर एक लेन बंद कर उस पर लगे मैटेरियल के भार को कम करने के लिए तारकोल की सड़क के स्थान पर मास्टिक लगाए जाने का कार्य शुरू किया है। सोमा कंपनी के धर्मेंद सिंह का कहना है कि तारकोल की सड़क 100 एमएम यानी चार इंच मोटी थी। जबकि रबर युक्त सड़क लगाए जाने से पुल का भार 75 फीसदी कम हो जाएगा। इस पर 25 एमएम यानी एक इंच मोटी रबर युक्त सड़क बनाई जा रही है। वहीं एक लेन बंद होने से वाहनों को ब्रिटिश पुल से बिहार की ओर रवाना किया जा रहा है लेकिन पुल संकरा होने से बार्डर पर जाम लग रहा है। धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि पुल की सतह पर रबर युक्त सड़क का कार्य कराने के लिए एक सप्ताह के लिए पुल पर एक लेन बंद कर दी गई है। लेकिन रात में आवागमन चालू रहेगा। इसके बन जाने के बाद बिहार से यूपी आने वाली लेन पर काम कराया जाएगा।
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सैयदराजा। यूपी-बिहार के बीच काफी संख्या में ओवरलोड बालू, गिट्टी ट्रक गुजरते है। दोनों प्रांतों के अधिकारी ओवरलोड पर पूरी तरह से लगाम नहीं लगा पा रहे है। ऐसे में एनएचएआई के अधिकारियों को फिर से डर सता रहा है कि ओवरलोड के चलते चंद महीनों में पुल फिर से कहीं क्षतिग्रस्त न हो जाए। ऐसे में अधिकारी अब पुल पर लगे मैटेरियल के भार को कम कर पुल को कामयाब बनाने की जुगत में लगे हुए है।
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कर्मनाशा पुल की एक लेन बंद, पुल पर बन रही रबरयुक्त सड़क
पुल पर वजन कम करने के लिए एनएचएआई लगा रहा मास्टिक
संवाद न्यूज एजेंसी
सैयदराजा। एनएचएआई (नेशनल हाइवे अथारिटी आफ इंडिया) के अधिकारियों की दूरदर्शिता की कमी के चलते यूपी-बिहार के बीच आने जाने वाले लोगों को एक बार फिर से परेशानी उठानी पड़ रही है। कर्मनाशा नदी पर बने पुल की मरम्मत के बाद उसे हाल में चालू किया गया था लेकिन बुधवार को यूपी से बिहार जाने वाली लेन को अधिकारियों ने एक सप्ताह के लिए बंद कर दिया है। अब एनएचएआई के अधिकारी पुल पर कंक्रीट और तारकोल की सड़क को उखाड़कर उसकी जगह रबर युक्त सड़क बना रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि इससे पुल पर 75 फीसदी भार कम हो जाएगा। वहीं एक लेन बंद होने से बार्डर पर जाम की स्थिति रही और वाहनों को ब्रिटिश पुल से बिहार की ओर रवाना किया गया।
यूपी-बिहार को जोड़ने वाला कर्मनाशा नदी पर बना पक्का पुल ओवरलोड वाहनों के चलते 28 दिसंबर 2019 को क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद ट्रकों को ब्रिटिश काल में कर्मनाशा नदी के ऊपर बने पुल से गुजारा जा रहा था। वहीं एक स्टील पुल का भी निर्माण किया था। फ्लाईओवर की मरम्मत कर एक वर्ष बाद हाल ही में पुल को फिर से चालू किया गया था। अब एनएचएआई के अधिकारियों ने पुल पर एक लेन बंद कर उस पर लगे मैटेरियल के भार को कम करने के लिए तारकोल की सड़क के स्थान पर मास्टिक लगाए जाने का कार्य शुरू किया है। सोमा कंपनी के धर्मेंद सिंह का कहना है कि तारकोल की सड़क 100 एमएम यानी चार इंच मोटी थी। जबकि मास्टिक (रबर युक्त सड़क) लगाए जाने से पुल का भार 75 फीसदी कम हो जाएगा। इस पर 25 एमएम यानी एक इंच मोटी रबर युक्त सड़क बनाई जा रही है। वहीं एक लेन बंद होने से वाहनों को ब्रिटिश पुल से बिहार की ओर रवाना किया जा रहा है लेकिन पुल संकरा होने से बार्डर पर जाम लग रहा है। धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि पुल की सतह पर मास्टिक का कार्य कराने के लिए एक सप्ताह के लिए पुल पर एक लेन बंद कर दी गई है। लेकिन रात में आवागमन चालू रहेगा। इसके बन जाने के बाद बिहार से यूपी आने वाली लेन पर काम कराया जाएगा।
इनसेट
ओवरलोड वाहनों पर नहीं लग रही लगाम
सैयदराजा। यूपी-बिहार के बीच काफी संख्या में ओवरलोड बालू, गिट्टी ट्रक गुजरते है। दोनों प्रांतों के अधिकारी ओवरलोड पर पूरी तरह से लगाम नहीं लगा पा रहे है। ऐसे में एनएचएआई के अधिकारियों को फिर से डर सता रहा है कि ओवरलोड के चलते चंद महीनों में पुल फिर से कहीं क्षतिग्रस्त न हो जाए। ऐसे में अधिकारी अब पुल पर लगे मैटेरियल के भार को कम कर पुल को कामयाब बनाने की जुगत में लगे हुए है।
रिपोर्ट - महताब खान
बाइट - 2490
संपादन - कमलजीत सिंह
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अधिकारियों का कहना है कि इससे पुल पर 75 फीसदी भार कम हो जाएगा। वहीं एक लेन बंद होने से बार्डर पर जाम की स्थिति रही और वाहनों को ब्रिटिश पुल से बिहार की ओर रवाना किया गया। एनएचएआई (नेशनल हाइवे अथारिटी आफ इंडिया) के अधिकारियों की दूरदर्शिता की कमी के चलते यूपी-बिहार के बीच आने जाने वाले लोगों को एक बार फिर से परेशानी उठानी पड़ रही है।
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यूपी-बिहार को जोड़ने वाला कर्मनाशा नदी पर बना पक्का पुल ओवरलोड वाहनों के चलते 28 दिसंबर 2019 को क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद ट्रकों को ब्रिटिश काल में कर्मनाशा नदी के ऊपर बने पुल से गुजारा जा रहा था। वहीं एक स्टील पुल का भी निर्माण किया था। फ्लाईओवर की मरम्मत कर एक वर्ष बाद हाल ही में पुल को फिर से चालू किया गया था। अब एनएचएआई के अधिकारियों ने पुल पर एक लेन बंद कर उस पर लगे मैटेरियल के भार को कम करने के लिए तारकोल की सड़क के स्थान पर मास्टिक लगाए जाने का कार्य शुरू किया है। सोमा कंपनी के धर्मेंद सिंह का कहना है कि तारकोल की सड़क 100 एमएम यानी चार इंच मोटी थी। जबकि रबर युक्त सड़क लगाए जाने से पुल का भार 75 फीसदी कम हो जाएगा। इस पर 25 एमएम यानी एक इंच मोटी रबर युक्त सड़क बनाई जा रही है। वहीं एक लेन बंद होने से वाहनों को ब्रिटिश पुल से बिहार की ओर रवाना किया जा रहा है लेकिन पुल संकरा होने से बार्डर पर जाम लग रहा है। धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि पुल की सतह पर रबर युक्त सड़क का कार्य कराने के लिए एक सप्ताह के लिए पुल पर एक लेन बंद कर दी गई है। लेकिन रात में आवागमन चालू रहेगा। इसके बन जाने के बाद बिहार से यूपी आने वाली लेन पर काम कराया जाएगा।
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सैयदराजा। यूपी-बिहार के बीच काफी संख्या में ओवरलोड बालू, गिट्टी ट्रक गुजरते है। दोनों प्रांतों के अधिकारी ओवरलोड पर पूरी तरह से लगाम नहीं लगा पा रहे है। ऐसे में एनएचएआई के अधिकारियों को फिर से डर सता रहा है कि ओवरलोड के चलते चंद महीनों में पुल फिर से कहीं क्षतिग्रस्त न हो जाए। ऐसे में अधिकारी अब पुल पर लगे मैटेरियल के भार को कम कर पुल को कामयाब बनाने की जुगत में लगे हुए है।
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कर्मनाशा पुल की एक लेन बंद, पुल पर बन रही रबरयुक्त सड़क
पुल पर वजन कम करने के लिए एनएचएआई लगा रहा मास्टिक
संवाद न्यूज एजेंसी
सैयदराजा। एनएचएआई (नेशनल हाइवे अथारिटी आफ इंडिया) के अधिकारियों की दूरदर्शिता की कमी के चलते यूपी-बिहार के बीच आने जाने वाले लोगों को एक बार फिर से परेशानी उठानी पड़ रही है। कर्मनाशा नदी पर बने पुल की मरम्मत के बाद उसे हाल में चालू किया गया था लेकिन बुधवार को यूपी से बिहार जाने वाली लेन को अधिकारियों ने एक सप्ताह के लिए बंद कर दिया है। अब एनएचएआई के अधिकारी पुल पर कंक्रीट और तारकोल की सड़क को उखाड़कर उसकी जगह रबर युक्त सड़क बना रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि इससे पुल पर 75 फीसदी भार कम हो जाएगा। वहीं एक लेन बंद होने से बार्डर पर जाम की स्थिति रही और वाहनों को ब्रिटिश पुल से बिहार की ओर रवाना किया गया।
यूपी-बिहार को जोड़ने वाला कर्मनाशा नदी पर बना पक्का पुल ओवरलोड वाहनों के चलते 28 दिसंबर 2019 को क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद ट्रकों को ब्रिटिश काल में कर्मनाशा नदी के ऊपर बने पुल से गुजारा जा रहा था। वहीं एक स्टील पुल का भी निर्माण किया था। फ्लाईओवर की मरम्मत कर एक वर्ष बाद हाल ही में पुल को फिर से चालू किया गया था। अब एनएचएआई के अधिकारियों ने पुल पर एक लेन बंद कर उस पर लगे मैटेरियल के भार को कम करने के लिए तारकोल की सड़क के स्थान पर मास्टिक लगाए जाने का कार्य शुरू किया है। सोमा कंपनी के धर्मेंद सिंह का कहना है कि तारकोल की सड़क 100 एमएम यानी चार इंच मोटी थी। जबकि मास्टिक (रबर युक्त सड़क) लगाए जाने से पुल का भार 75 फीसदी कम हो जाएगा। इस पर 25 एमएम यानी एक इंच मोटी रबर युक्त सड़क बनाई जा रही है। वहीं एक लेन बंद होने से वाहनों को ब्रिटिश पुल से बिहार की ओर रवाना किया जा रहा है लेकिन पुल संकरा होने से बार्डर पर जाम लग रहा है। धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि पुल की सतह पर मास्टिक का कार्य कराने के लिए एक सप्ताह के लिए पुल पर एक लेन बंद कर दी गई है। लेकिन रात में आवागमन चालू रहेगा। इसके बन जाने के बाद बिहार से यूपी आने वाली लेन पर काम कराया जाएगा।
इनसेट
ओवरलोड वाहनों पर नहीं लग रही लगाम
सैयदराजा। यूपी-बिहार के बीच काफी संख्या में ओवरलोड बालू, गिट्टी ट्रक गुजरते है। दोनों प्रांतों के अधिकारी ओवरलोड पर पूरी तरह से लगाम नहीं लगा पा रहे है। ऐसे में एनएचएआई के अधिकारियों को फिर से डर सता रहा है कि ओवरलोड के चलते चंद महीनों में पुल फिर से कहीं क्षतिग्रस्त न हो जाए। ऐसे में अधिकारी अब पुल पर लगे मैटेरियल के भार को कम कर पुल को कामयाब बनाने की जुगत में लगे हुए है।
रिपोर्ट - महताब खान
बाइट - 2490
संपादन - कमलजीत सिंह