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कभी यात्रियों के कोलाहल से गूंजता था प्लेटफार्म, अब बंदरों का है बसेरा

Sun, 03 May 2020 07:54 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 03 May 2020 07:54 PM IST
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Monkeys are making a blast at the railway station
पीडीडीयू रेलवे स्टेशन के फुटओवर ब्रिज पर पसरा सन्नाटा। - फोटो : CHANDAULI
पीडीडीयूनगर। हावड़ा-दिल्ली रूट पर अतिव्यस्त पं.दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर डेढ़माह पहले अलग ही नजारा दिखता था। ट्रेनों के आगमन की सूचना होते ही ट्रेनों पर सवार होने के लिए दौड़ते भागते यात्री, नल पर पानी लेने की जद्दोजहद, स्टालों पर खाने पीने का सामान बेचने के लिए वेंडरों की गूंजती आवाज, कुलियों की धमाचौकड़ी स्टेशन की पहचान हुआ करती थी। आज यहां की स्थिति पूरी तरह बदल गई है। प्लेटफार्म पर फेंके गए फल और सामान की छीना झपटी करते बंदरों का झुंड, खो-खो की आवाज यहां पसरे सन्नाटे को तोड़ रही है। हां कभी कभार आरपीएफ और जीआरपी के बूट की धमक और मालगाड़ियों की धड़धड़ाहट की आवाज होती है। रविवार सुबह में स्टेशन का हाल देखने निकले अमर उजाला संवाददाता को कुछ इसी तरह का नजारा देखने को मिला।
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एशिया के सबसे बड़ा रेलवे यार्ड और स्टेशन पर हमेशा ही ट्रेनों और मालगाड़ियों के इंजन की आवाज गुुंजती रही है। मालगाड़ियों के मरम्मत की खटर-पटर, इंजन के हार्न की आवाज के साथ रेलवे स्टेशन से ट्रेनों की आने की सूचना से नगर गुंजायमान रहता रहा है लेकिन लॉकडाउन के बाद यह सब बंद हो गया है। रेलवे स्टेशन पर पहुंचते ही गेट पर ड्यूटी पर तैनात आरपीएफ कर्मी से सामना हुआ। पूछा बहुत दिन बाद दिखे, कैसे हैं। वे साथ हो लिए। प्लेटफार्म पर पहुंच कर बंदरों के झुंड को देखकर पूछा तो कहा कि यहां बंदर तो पहले से रहे हैं लेकिन ट्रेनों के आनेजाने की वजह से वे छिपे रहते थे लेकिन लाकडाउन के बाद से पूरे स्टेशन पर इनका राज हो गया है। कुछ रेल कर्मी अथवा समाजसेवी यहां आते हैं और केला,बिस्कुट आदि दे जाते हैं। इसके लिए बंदर दिन भर धमाचौकड़ी करते हैं। बीचबीच में सफाई होती है लेकिन कुछ दिन बाद ही स्थिति फिर से पहले वाली हो जाती है। वहीं स्टेशन पर तैनात वाणिज्य विभाग के कर्मी ने बताया कि कभी स्टेशन पर पैर रखने की जगह नहीं होती थी, वहां आज बंदरों की धमा चौकड़ी है।
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