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Chandauli News: लेत चढ़ावत खैंचत गाढ़ें, काहुं न लखा देख सबु ठाढ़ें

Mon, 07 Oct 2024 02:37 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 07 Oct 2024 02:37 AM IST
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Let's dig and dig, why not write, see Sabu
कंदवा। क्षेत्र के अरंगी गांव में चल रही रामलीला के चौथे दिन शनिवार की रात गांव के युवा कलाकारों ने धनुष यज्ञ और परशुराम-लक्ष्मण संवाद की मनोहारी लीला का मंचन किया। धनुष टूटते ही लीला प्रेमियों ने हर-हर महादेव और जय श्रीराम के नारे लगाए।
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लीला का आरंभ सीता स्वयंवर के साथ हुआ। राजा जनक के दरबार में महर्षि विश्वामित्र राम और लक्ष्मण के साथ विराजमान थे ।स्वयंवर के दौरान एक से बढ़कर एक महारथी, पराक्रमी राजा और योद्धाओं ने भगवान शिव के धनुष को तोड़ने का प्रयास किया पर वे धनुष को हिला भी नहीं सके। राजाओं का यह हाल देखकर जनकपुरी में उदासी छा जाती है। राजा जनक व्याकुल होकर सभी राजाओं को कोसते हैं। जनक की तीखी बातें सुनकर लक्ष्मण क्रोधित होकर कहते हैं कि यदि बड़े भाई की आज्ञा मिले तो वे पूरे ब्रह्मांड को गेंद की भांति उठाकर फेंक दें। राम क्रोधित लक्ष्मण को शांत कराते हैं। गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर राम धनुष के पास जाते हैं और गुरु को प्रणाम कर राजा जनक और सीता को देखते हैं। इसके बाद धनुष को प्रणाम कर उठा लेते हैं और प्रत्यंचा चढाते ही धनुष बीच से टूट जाता है। तब लेत चढ़ावत खैंचत गाढ़ें-काहुं न लखा देख सबु ठाढें, तेहि छन राम मध्य धनु तोरा-भरे भुवन धुनि घोर कठोरा चौपाई गूंज उठती है। सीता हाथ में जयमाल लेकर राम की ओर बढ़ती हैं और उनके गले जयमाल डाल देती हैं। चारो तरफ जय-जयकार होने लगती है।शंख और घड़ियाल बजने लगते हैं। इसी क्षण परशुराम गर्जना करते हुए आते हैं। उन्हें देख सभी राजा वहां से भाग निकलते हैं। शिव धनुष को खंडित देख परशुराम क्रोधित हो जाते हैं। इसके बाद परशुराम-लक्ष्मण संवाद होता है। बाद में अपनी शंका दूर होने पर परशुराम उन्हें आशीर्वाद देकर वापस लौट जाते हैं। इसके बाद विवाह की तैयारियां शुरू होती हो जाती हैं और दूत शुभ समाचार लेकर अयोध्या की ओर प्रस्थान करता है।आरती के साथ चौथे दिन की रामलीला का समापन होता है। इस दौरान शिव बच्चन सिंह, हरिद्वार सिंह, लीलाधर सिंह, अजीत सिंह, त्रिभुवन सिंह, गुलाब सिंह, अखिलेश सिंह, विजय शंकर गुप्ता, हीरालाल आदि लीला प्रेमी रहे।
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