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मानव तस्करी में पूछताछ
ब्यूरो अमर उजाला चंदौली
Updated Thu, 22 Jan 2015 01:25 AM IST
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स्थानीय रेलवे स्टेशन पर गश्त के दौरान बुधवार को प्लेटफार्म संख्या दो पर
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जीआरपी ने मानव तस्करी होने के शक में कुल पचास लोगों को हिरासत में लेकर
पूछताछ की।
बाद में परिवार वालों से फोन पर बातचीत करने के बाद संतुष्ट होने पर उनको छोड़ दिया गया। ये सभी लोग सूरत से झारखंड के हजारीबाग जिले में पार्श्वनाथ के दर्शन करने जा रहे थे।
यहां स्टेशन पर उतरते ही जीआरपी की नजर पड़ गई। जीआरपी की इस कार्रवाई की स्टेशन पर दिन भर चर्चा होती रही। दरअसल गणतंत्र दिवस को ध्यान में रखते हुए जीआरपी बुधवार को स्टेशन पर संदिग्ध वस्तुओं एवं व्यक्तियों की जांच पड़ताल कर रही थी।
इसी दौरान जब वह दोपहर लगभग तीन बजे प्लेटफार्म संख्या दो पर पहुंची, तो एक स्थान पर पचास की संख्या में पुरुष महिलाएं व लड़कियां थीं। जीआरपी उनसे पूछताछ करने कोतवाली ले आई।
जहां पूछताछ में उन्होंने बताया कि वे सभी गुजरात के सूरत के रहने वाले हैं। 19047 डाउन सूरत-भागलपुर एक्सप्रेस से मुगलसराय पहुंचे हैं और उन्हें यहां से ट्रेन बदलकर झारखंड के हजारीबाग जाना है।
इसके बाद जीआरपी ने लड़कियों के परिवार वालों से फोन पर बात की। जिसमें संतुष्ट होने पर जीआरपी ने उन्हें छोड़ दिया। इस संबंध में जीआरपी कोतवाली प्रभारी रतन सिंह यादव ने बताया कि प्रथम दृष्ट्या मामला मानव तस्करी का लग रहा था।
पर पूछताछ होने के बाद सच्चाई पता चली। जांच से संतुष्ट होने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया।
बाद में परिवार वालों से फोन पर बातचीत करने के बाद संतुष्ट होने पर उनको छोड़ दिया गया। ये सभी लोग सूरत से झारखंड के हजारीबाग जिले में पार्श्वनाथ के दर्शन करने जा रहे थे।
यहां स्टेशन पर उतरते ही जीआरपी की नजर पड़ गई। जीआरपी की इस कार्रवाई की स्टेशन पर दिन भर चर्चा होती रही। दरअसल गणतंत्र दिवस को ध्यान में रखते हुए जीआरपी बुधवार को स्टेशन पर संदिग्ध वस्तुओं एवं व्यक्तियों की जांच पड़ताल कर रही थी।
इसी दौरान जब वह दोपहर लगभग तीन बजे प्लेटफार्म संख्या दो पर पहुंची, तो एक स्थान पर पचास की संख्या में पुरुष महिलाएं व लड़कियां थीं। जीआरपी उनसे पूछताछ करने कोतवाली ले आई।
जहां पूछताछ में उन्होंने बताया कि वे सभी गुजरात के सूरत के रहने वाले हैं। 19047 डाउन सूरत-भागलपुर एक्सप्रेस से मुगलसराय पहुंचे हैं और उन्हें यहां से ट्रेन बदलकर झारखंड के हजारीबाग जाना है।
इसके बाद जीआरपी ने लड़कियों के परिवार वालों से फोन पर बात की। जिसमें संतुष्ट होने पर जीआरपी ने उन्हें छोड़ दिया। इस संबंध में जीआरपी कोतवाली प्रभारी रतन सिंह यादव ने बताया कि प्रथम दृष्ट्या मामला मानव तस्करी का लग रहा था।
पर पूछताछ होने के बाद सच्चाई पता चली। जांच से संतुष्ट होने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया।