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ज्ञान व वैराग्य से होती है प्रभु की प्राप्ति

Thu, 21 Apr 2022 06:21 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 21 Apr 2022 06:21 PM IST
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GOD is attained by knowledge and dispassion
कंदवा। प्रभु को प्राप्त करने के लिए भक्ति, ज्ञान और वैराग्य में सामंजस्य व संतुलन होना आवश्यक है। जब तक तीनों का संतुलन नहीं होगा तब तक भगवत प्रेम की प्राप्ति नहीं हो सकती है। यह बातें काशी से आए कथावाचक डॉ. बृजेशमणि पांडेय ने कस्बा स्थित शिवमंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पहले दिन बृहस्पतिवार को कहीं।
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श्रीमद्भागवत महापुराण की महिमा का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि यह कथा बड़े से बड़े पापी का उद्धार कर देती है। श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण मात्र से धुंधकारी जैसे राक्षसी प्रवृत्ति के व्यक्ति का उद्धार हो गया। यह कथा मानव जीवन में सुख शांति तथा पितरों का उद्धार करने वाली है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण का शुभारंभ सच्चिदानंद शब्द से होता है जिसका सबसे सरल अर्थ यह है कि ईश्वर कण-कण में व संसार के प्राणी मात्र में स्थित है। यदि इस तथ्य को ठीक से समझ लिया जाए तो जीवन के जितने विरोध और वैमनस्य की भावना है, वह स्वत: समाप्त हो जाएगी। कथा श्रवण करने वालों में वेदप्रकाश राय, अच्युतानंद त्रिपाठी, ओमप्रकाश राय, मंजू देवी, अरविंद, अनिल, वीरेंद्र शर्मा, रमेश रहे।
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