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धान के कटोरा के किसान श्री विधि से करें धान की खेती
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चंदौली। किसान श्री विधि से धान की खेती करें तो उन्हें कम लागत में अधिक मुनाफा होगा। उन्हें पानी की कमी से भी नहीं जूझना पड़ेगा। इतना ही नहीं खाद व बीज की मात्रा भी कम लगेगी। दरअसल कृषि प्रधान जनपद में सामान्य तौर पर परंपरा के अनुसार 20 से 25 दिन में तैयार होने वाली धान की नर्सरी की सामान्य तरीके से खेतों में रोपाई की जाती है। जहां पानी की कमी होती है, वहां किसान पानी के अभाव में खेती से वंचित ही रह जाते हैं। ऊपर से उन्हें बीज व खाद की मात्रा भी अधिक लगानी पड़ती है। इसके मद्देनजर कृषि विभाग की ओर से कृषि के क्षेत्र में बढ़ावा देने के लिए श्री विधि को अपनाने पर बल दिया जा रहा है, ताकि इस विधि को अपनाने से छोटे व मझोले किसान कम भूमि में अधिक उत्पादन कर सकें।
श्री विधि से खेती के लिए सबसे पहले किसानों को धान की नर्सरी के लिए खेत तैयार कर चार फीट चौड़ी व 20 फीट लंबी व छह इंच ऊंची क्यारी बनाना चाहिए। धान का बीज क्यारी में डालने से पहले बीज को 24 घंटे पानी में भिगोने के बाद अंकुर आने पर उसे क्यारी में डालें। इसके बाद पुआल या बोरे से उसे ढक देते हैं। तीसरे दिन अंकुरण निकलने के बाद उसे खुली हवा में छोड़ दें। इस दौरान समय-समय पर पानी की फुहार देते रहें। यही नर्सरी 10 से 12 दिन में तैयार हो जाती है। एक एकड़ खेत के लिए दो किलोग्राम बीज व एक बीघा में सवा किलोग्राम बीज लगता है। श्री विधि से धान की नर्सरी की रोपाई के लिए सर्वप्रथम खेत की जोताई कर उसमें पानी भरें। इसके बाद नर्सरी की रोपाई के समय खेत से पानी निकाल दें। नर्सरी लगाते समय इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि खेत में पानी की कमी के बजाय केवल कीचड़ होना चाहिए। वहीं नर्सरी को उखाड़ने से आधा घंटे के अंदर उसे मार्कर के सहारे रोपाई करते हैं। यानि लाइन से लाइन व पौधे से पौधे की दूरी 25 सेंटीमीटर होनी चाहिए। रोपाई के दौरान 15 लाइन के बाद 16 वीं लाइन में एक फीट का अंतर छोड़ना चाहिए। जिला कृषि अधिकारी बसंत दुबे ने बताया कि इस विधि को अपनाने से सामान्य रोपाई की तुलना में पानी की बचत व उत्पादन दोगुना बढ़ जाता है। यह विधि छोटे व मझोले किसानों के लिए लाभकारी है।
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श्री विधि से खेती के लिए सबसे पहले किसानों को धान की नर्सरी के लिए खेत तैयार कर चार फीट चौड़ी व 20 फीट लंबी व छह इंच ऊंची क्यारी बनाना चाहिए। धान का बीज क्यारी में डालने से पहले बीज को 24 घंटे पानी में भिगोने के बाद अंकुर आने पर उसे क्यारी में डालें। इसके बाद पुआल या बोरे से उसे ढक देते हैं। तीसरे दिन अंकुरण निकलने के बाद उसे खुली हवा में छोड़ दें। इस दौरान समय-समय पर पानी की फुहार देते रहें। यही नर्सरी 10 से 12 दिन में तैयार हो जाती है। एक एकड़ खेत के लिए दो किलोग्राम बीज व एक बीघा में सवा किलोग्राम बीज लगता है। श्री विधि से धान की नर्सरी की रोपाई के लिए सर्वप्रथम खेत की जोताई कर उसमें पानी भरें। इसके बाद नर्सरी की रोपाई के समय खेत से पानी निकाल दें। नर्सरी लगाते समय इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि खेत में पानी की कमी के बजाय केवल कीचड़ होना चाहिए। वहीं नर्सरी को उखाड़ने से आधा घंटे के अंदर उसे मार्कर के सहारे रोपाई करते हैं। यानि लाइन से लाइन व पौधे से पौधे की दूरी 25 सेंटीमीटर होनी चाहिए। रोपाई के दौरान 15 लाइन के बाद 16 वीं लाइन में एक फीट का अंतर छोड़ना चाहिए। जिला कृषि अधिकारी बसंत दुबे ने बताया कि इस विधि को अपनाने से सामान्य रोपाई की तुलना में पानी की बचत व उत्पादन दोगुना बढ़ जाता है। यह विधि छोटे व मझोले किसानों के लिए लाभकारी है।
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