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Chandauli News: कर्मचारियों और अभियंताओं को विश्वास में लिए बिना निजीकरण नहीं करने की मांग
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पीडीडीयू नगर। निजीकरण के विरोध में गोधना स्थित अधीक्षण अभियंता के कार्यालय पर बिजली कर्मियों का कार्य बहिष्कार कर धरना बृहस्पतिवार को भी जारी रहा। बिजली कर्मियों ने अपराह्न दो बजे से शाम पांच बजे तक कार्य बहिष्कार कर निजीकरण के विरोध में नारेबाजी कर धरना दिया। वहां हुई सभा में वक्ताओं ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन से कर्मचारियों व अभियंताओं को विश्वास में लिए बगैर प्रदेश में निजीकरण नहीं करने की मांग की।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति की जिला इकाई के पदाधिकारियों ने कहा कि निजीकरण के आरएफपी डॉक्यूमेंट पर विद्युत नियामक आयोग के वर्तमान अध्यक्ष को कोई अभिमत देने का नैतिक व कानूनी अधिकार नहीं है। इसलिए विद्युत नियामक आयोग को पॉवर कारपोरेशन की ओर से नियुक्त किए गए कंसल्टेंट के तैयार कराए गए निजीकरण के आरएफपी डॉक्यूमेंट पर अपना अभिमत नहीं देना चाहिए। वक्ताओं कहना था कि किसी भी नियम के तहत विद्युत नियामक आयोग को पावर कॉरपोरेशन के कहने पर निजीकरण के किसी दस्तावेज पर अभिमत नहीं देना चाहिए।
कहा कि विद्युत नियामक आयोग के वर्तमान अध्यक्ष अरविंद कुमार ने प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन के पद पर रहते हुए विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के साथ छह अक्टूबर 2020 को एक लिखित समझौते पर हस्ताक्षर किया है। यह समझौता प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना व तत्कालीन ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा की उपस्थिति में हुआ था। समझौते के अनुसार पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का प्रस्ताव वापस लिया जाना है। कर्मचारियों व अभियंताओं को विश्वास में लिए बगैर प्रदेश में किसी भी स्थान पर कोई निजीकरण नहीं होने दिया जाएगा। धरना देने वालों में एसडीओ, जेई व अन्य कर्मचारी शामिल रहे।
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विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति की जिला इकाई के पदाधिकारियों ने कहा कि निजीकरण के आरएफपी डॉक्यूमेंट पर विद्युत नियामक आयोग के वर्तमान अध्यक्ष को कोई अभिमत देने का नैतिक व कानूनी अधिकार नहीं है। इसलिए विद्युत नियामक आयोग को पॉवर कारपोरेशन की ओर से नियुक्त किए गए कंसल्टेंट के तैयार कराए गए निजीकरण के आरएफपी डॉक्यूमेंट पर अपना अभिमत नहीं देना चाहिए। वक्ताओं कहना था कि किसी भी नियम के तहत विद्युत नियामक आयोग को पावर कॉरपोरेशन के कहने पर निजीकरण के किसी दस्तावेज पर अभिमत नहीं देना चाहिए।
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कहा कि विद्युत नियामक आयोग के वर्तमान अध्यक्ष अरविंद कुमार ने प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन के पद पर रहते हुए विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के साथ छह अक्टूबर 2020 को एक लिखित समझौते पर हस्ताक्षर किया है। यह समझौता प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना व तत्कालीन ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा की उपस्थिति में हुआ था। समझौते के अनुसार पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का प्रस्ताव वापस लिया जाना है। कर्मचारियों व अभियंताओं को विश्वास में लिए बगैर प्रदेश में किसी भी स्थान पर कोई निजीकरण नहीं होने दिया जाएगा। धरना देने वालों में एसडीओ, जेई व अन्य कर्मचारी शामिल रहे।
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