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पुलिस टीम पर हमला करने वालों की तलाश जारी
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चहनियां। बलुआ थाना अंतर्गत मथेला गांव में हत्या आरोपी चिंतामणि त्रिपाठी को गिरफ्तार करने पहुंची पुलिस टीम पर हमला करने वाले चिंतामणि के परिवार वालों की तलाश में दूसरे दिन मंगलवार को दिन भर पुलिस गांव में तैनात रही। यही नहीं पुलिस टीम ने आस पास के गांव सहित संभावित ठिकानों पर छापेमारी भी की लेकिन आरोपियों का पता नहीं चला। चिंतामणि पहले भी पुलिस कर्मियों से उलझ चुका।
वर्ष 1987 में मथेला पुलिया पर ड्यूटी कर रहे सिपाही रामाशीष राय की हत्या कर दी गई थी। हत्या का आरोप चिंतामणि पर लगा था। यह मामला अभी तक न्यायालय में विचाराधीन है। इसी मामले की सुनवाई के लिए आठ जनवरी को चिंतामणि को हाईकोर्ट में हाजिर होना था। एनबीडब्लू की तामिल कराने पहुंची पुलिस पर रात में चिंतामणि सहित परिवार के लोगों ने हमला कर दिया और मारपीट की। हमलावरों ने असलहे छीनने का भी प्रयास किया। पुलिस ने अन्य थानों की फोर्स आने पर चिंतामणि को गिरफ्तार कर ली लेकिन उसके दो बेटे सूर्यमणि त्रिपाठी और योगेशमणि त्रिपाठी के साथ घर की दो अन्य महिलाओं को गिरफ्तार नहीं कर सकी। पुलिस धारा 353, 332 के तहत मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई में जुटी है। वहीं पुलिसकर्मियों की माने तो पूर्व में भी चिंतामणि पुलिस पर हमला कर चुका है। वर्ष 1987 में चिंतामणि ने सिपाही रामाशीष राय की हत्या लाइसेंसी बंदूक से इस लिए की थी क्योंकि कुछ दिन पहले ही धरना प्रदर्शन के दौरान दरोगा से बदसूलकी करने पर रामाशीष राय ने चिंतामणि की पिटाई कर दी थी। इस संबंध में सीओ सदर प्रदीप सिंह चंदेल ने बताया कि आरोपितों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। जल्द ही हमलावर पुलिस की गिरफ्त में होंगे।
वर्ष 1987 में मथेला पुलिया पर ड्यूटी कर रहे सिपाही रामाशीष राय की हत्या कर दी गई थी। हत्या का आरोप चिंतामणि पर लगा था। यह मामला अभी तक न्यायालय में विचाराधीन है। इसी मामले की सुनवाई के लिए आठ जनवरी को चिंतामणि को हाईकोर्ट में हाजिर होना था। एनबीडब्लू की तामिल कराने पहुंची पुलिस पर रात में चिंतामणि सहित परिवार के लोगों ने हमला कर दिया और मारपीट की। हमलावरों ने असलहे छीनने का भी प्रयास किया। पुलिस ने अन्य थानों की फोर्स आने पर चिंतामणि को गिरफ्तार कर ली लेकिन उसके दो बेटे सूर्यमणि त्रिपाठी और योगेशमणि त्रिपाठी के साथ घर की दो अन्य महिलाओं को गिरफ्तार नहीं कर सकी। पुलिस धारा 353, 332 के तहत मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई में जुटी है। वहीं पुलिसकर्मियों की माने तो पूर्व में भी चिंतामणि पुलिस पर हमला कर चुका है। वर्ष 1987 में चिंतामणि ने सिपाही रामाशीष राय की हत्या लाइसेंसी बंदूक से इस लिए की थी क्योंकि कुछ दिन पहले ही धरना प्रदर्शन के दौरान दरोगा से बदसूलकी करने पर रामाशीष राय ने चिंतामणि की पिटाई कर दी थी। इस संबंध में सीओ सदर प्रदीप सिंह चंदेल ने बताया कि आरोपितों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। जल्द ही हमलावर पुलिस की गिरफ्त में होंगे।
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