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कोयला हुआ महंगा, सरसों की भूसी से पकाई जा रही ईंट
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कमालपुर। कोयले की बढ़ी कीमत से परेशान ईंट-भट्ठा मालिक कोयले की जगह सरसों के भूसे से ईंट पका रहे हैं। भट्ठा संचालकों का कहना है कि कोयले से पकी ईंट काफी मंहगी हो जाती है और लोग ईंट खरीदने से बचने लगते हैं। पक्की चिमनी हो जाने से मिट्टी भी दूर से लानी पड़ती है। उन्होंने सरकार से कोयले का मूल्य कम किए जाने की मांग की है।
क्षेत्र के किसान गन्ना और कन्ना की खेती के लिए पहचाने जाते थे। गन्ना व कन्ना की खेती के बाद उपज बेचने के लिए पापड़ बेलने पड़े तो उन्होंने दोनों फसलों की खेती करनी छोड़ दी। इन खेतों पर अब ईंट भट्ठे बन गए हैं। क्षेत्र के डेढगावां, विशुनपुरा, ढोढियां, नौरंगाबाद, खोर व कादिराबाद आदि में इन दिनों दर्जनों ईंट भट्ठे खुले हुए हैं। मौसम की मार झेल रहे ईंट भट्ठा संचालकों पर अब कोयले के महंगा होने की तगड़ी मार पड़ी है। ईंट भट्ठा पर कार्यरत मुंशी श्रवण विश्वकर्मा ने बताया कि पिछले वर्ष छह हजार रुपया प्रति टन पर बिकने वाला कोयला करीब 13 हजार रुपये टन पर पहुंच गया है। वहीं अच्छी क्वालिटी के कोयले 19 हजार रुपया टन तक मिल रहा है। इससे परेशान भट्ठा मालिकों ने ईंट पकाने के लिए कोयले के विकल्प में सरसों की भूसी का प्रयोग शुरू कर दिया है।
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क्षेत्र के किसान गन्ना और कन्ना की खेती के लिए पहचाने जाते थे। गन्ना व कन्ना की खेती के बाद उपज बेचने के लिए पापड़ बेलने पड़े तो उन्होंने दोनों फसलों की खेती करनी छोड़ दी। इन खेतों पर अब ईंट भट्ठे बन गए हैं। क्षेत्र के डेढगावां, विशुनपुरा, ढोढियां, नौरंगाबाद, खोर व कादिराबाद आदि में इन दिनों दर्जनों ईंट भट्ठे खुले हुए हैं। मौसम की मार झेल रहे ईंट भट्ठा संचालकों पर अब कोयले के महंगा होने की तगड़ी मार पड़ी है। ईंट भट्ठा पर कार्यरत मुंशी श्रवण विश्वकर्मा ने बताया कि पिछले वर्ष छह हजार रुपया प्रति टन पर बिकने वाला कोयला करीब 13 हजार रुपये टन पर पहुंच गया है। वहीं अच्छी क्वालिटी के कोयले 19 हजार रुपया टन तक मिल रहा है। इससे परेशान भट्ठा मालिकों ने ईंट पकाने के लिए कोयले के विकल्प में सरसों की भूसी का प्रयोग शुरू कर दिया है।
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