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Chandauli News: चंदौली के आदमचीनी चावल को मिला जीआई टैग
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धान के कटोरा के नाम से प्रसिद्ध चंदौली के किसानों के लिए खुशखबरी है कि उनके आदमचीनी चावल को जीआई (भौगोलिक संकेत) पेटेंट मिल गया है। अब कहीं भी आदम चीनी का उत्पाद हो लेकिन उसे माना चंदौली का ही जाएगा। जिले का यह पहला उत्पाद है, जिसे जीआई पेटेंट मिला है। वाराणसी निवासी जीआई विशेषज्ञ पद्मश्री डॉ. रजनीकांत ने बताया कि नाबार्ड और राज्य सरकार के सहयोग से उत्तर प्रदेश के 11 उत्पादों को इस वर्ष जीआई पेटेंट प्राप्त हुआ है। इसमें सात उत्पाद ओडीओपी में भी शामिल हैं। कृषि एवं उद्यान से संबंधित चार उत्पाद काशी क्षेत्र के हैं, जिसमें बनारसी लंगड़ा आम, रामनगर का भंटा, बनारसी पान और चंदौली का आदमचीनी चावल (715) शामिल है। नाबार्ड के सहयोग से कोविड के कठिन समय में प्रदेश के 20 उत्पादों का जीआई आवेदन किया गया था। जिसमें लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद प्रदेश के 11 उत्पादों को जीआई टैग मिला है। पूर्व में बनारस और पूर्वांचल से 18 उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है।
पूर्वांचल के सभी जीआई उत्पादों में कुल 20 लाख लोगों को रोजगार प्राप्त हैं। इनका लगभग 25,500 करोड़ का सालाना कारोबार होता है। नाबार्ड के एजीएम अनुज कुमार सिंह ने बताया कि आने वाले समय में नाबार्ड जीआई उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं शुरू करने जा रहा है। इसका लाभ किसानों को मिलेेगा।
इनसेट-- -
रक्षामंत्री ने दिया था सुझाव
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह गांव से आदमचीनी मंगाते हैं। डॉ.रजनीकांत ने बताया कि आमदचीनी को जीआई पेटेंट देने का सुझाव रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने दिया था। मेरी ननिहाल चकिया के शेरवां गांव में है। 2019 में पद्मश्री मिला तो उसके उपरांत आयोजित भोज में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आप कई उत्पादों को जीआई पेटेंट दिलाते हैं। आदमचीनी चावल के लिए भी आवेदन कीजिए। किसी उत्पाद की क्षेत्र विशेष से पहचान होती है। उस उत्पाद की ख्याति जब दुनिया में फैलती है तो उसे प्रमाणित करने के लिए जियोग्राफिकल इंडीकेटर (भौगोलिक संकेतक) उत्पाद के साथ लगाया जाता है। चकिया और मिर्जापुर से ही आदमचीनी की पहचान है। चंदौली के ईशानी एग्रो प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के अजय सिंह ने वाराणसी के ह्यूमन वेलफेयर एसोसिएशन, नाबार्ड और राज्य सरकार के सहयोग से पेटेंट के लिए आवेदन किया था।
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फिलहाल 70 हेक्टेयर में होती है खेती
विंध्य पर्वतमाला के नीचे की मिट्टी आदमचीनी चावल के लिए उपयुक्त है। चकिया के किसान छोटेलाल मौर्या और रामकुमार मौर्या ने 14 से 18 मार्च तक दिल्ली के प्रगति मैदान में हुए आहार इंटरनेशनल फेस्टिवल में आदमचीनी की प्रदर्शनी भी लगाई थी। मिर्जापुर और चंदौली जिले के 70 से 100 किसान करीब 70 हेक्टेयर में आदमचीनी की खेती कर रहे हैं। बाजार में इसका वर्तमान मूल्य 140 रुपया प्रति किलो है। जीआई टैग मिलने के बाद इसकी खेती के लिए अन्य किसान भी आगे आएंगे। यह चावल चीनी के दाने जैसा छोटा और सुगंधित होता है। फसल पांच फीट तक लंबी होती है इसकी प्राकृतिक रूप से ही खेती की जाती है। रासायनिक उर्वरक डालने पर फसल नष्ट हो जाती है।
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कोट-- -
चंदौली के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है। जीआई टैग मिलने के बाद दुनिया में कहीं आदमचीनी चावल जाएगा तो यह माना जाएगा कि यह चंदौली का ही है। इसके उत्पादन से किसानों की आय बढ़ेगी। इस चावल की बिक्री के लिए मार्केट भी उपलब्ध कराया जाएगा।-वसंत कुमार दुबे, जिला कृषि अधिकारी,चंदौली
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पूर्वांचल के सभी जीआई उत्पादों में कुल 20 लाख लोगों को रोजगार प्राप्त हैं। इनका लगभग 25,500 करोड़ का सालाना कारोबार होता है। नाबार्ड के एजीएम अनुज कुमार सिंह ने बताया कि आने वाले समय में नाबार्ड जीआई उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं शुरू करने जा रहा है। इसका लाभ किसानों को मिलेेगा।
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इनसेट
रक्षामंत्री ने दिया था सुझाव
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह गांव से आदमचीनी मंगाते हैं। डॉ.रजनीकांत ने बताया कि आमदचीनी को जीआई पेटेंट देने का सुझाव रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने दिया था। मेरी ननिहाल चकिया के शेरवां गांव में है। 2019 में पद्मश्री मिला तो उसके उपरांत आयोजित भोज में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आप कई उत्पादों को जीआई पेटेंट दिलाते हैं। आदमचीनी चावल के लिए भी आवेदन कीजिए। किसी उत्पाद की क्षेत्र विशेष से पहचान होती है। उस उत्पाद की ख्याति जब दुनिया में फैलती है तो उसे प्रमाणित करने के लिए जियोग्राफिकल इंडीकेटर (भौगोलिक संकेतक) उत्पाद के साथ लगाया जाता है। चकिया और मिर्जापुर से ही आदमचीनी की पहचान है। चंदौली के ईशानी एग्रो प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के अजय सिंह ने वाराणसी के ह्यूमन वेलफेयर एसोसिएशन, नाबार्ड और राज्य सरकार के सहयोग से पेटेंट के लिए आवेदन किया था।
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फिलहाल 70 हेक्टेयर में होती है खेती
विंध्य पर्वतमाला के नीचे की मिट्टी आदमचीनी चावल के लिए उपयुक्त है। चकिया के किसान छोटेलाल मौर्या और रामकुमार मौर्या ने 14 से 18 मार्च तक दिल्ली के प्रगति मैदान में हुए आहार इंटरनेशनल फेस्टिवल में आदमचीनी की प्रदर्शनी भी लगाई थी। मिर्जापुर और चंदौली जिले के 70 से 100 किसान करीब 70 हेक्टेयर में आदमचीनी की खेती कर रहे हैं। बाजार में इसका वर्तमान मूल्य 140 रुपया प्रति किलो है। जीआई टैग मिलने के बाद इसकी खेती के लिए अन्य किसान भी आगे आएंगे। यह चावल चीनी के दाने जैसा छोटा और सुगंधित होता है। फसल पांच फीट तक लंबी होती है इसकी प्राकृतिक रूप से ही खेती की जाती है। रासायनिक उर्वरक डालने पर फसल नष्ट हो जाती है।
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चंदौली के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है। जीआई टैग मिलने के बाद दुनिया में कहीं आदमचीनी चावल जाएगा तो यह माना जाएगा कि यह चंदौली का ही है। इसके उत्पादन से किसानों की आय बढ़ेगी। इस चावल की बिक्री के लिए मार्केट भी उपलब्ध कराया जाएगा।-वसंत कुमार दुबे, जिला कृषि अधिकारी,चंदौली