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बसपा ने मुगलसराय विधान सभा मे दर्ज की है सबसे बड़ी जीत
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प्रदेश में विधान सभा चुनाव की लड़ाई तेज हो गई है। भले ही जिले में अधिकतर दलों ने प्रत्याशी नहीं घोषित किए हैं लेकिन विधान सभा सीटों पर संभावित दावेदार जोर लगा रहे हैं। इस बीच राजनीतिक जानकार सीटों के इतिहास को भी खंगालने लगे हैं। मुगलसराय विधान सभा सीट का इतिहास अत्यंत रोचक है। यहां हुए अब तक के चुनावों पर नजर डालें तो सबसे अधिक मतों से जीत का वर्ष 2012 में बसपा के नाम है, जबकि सबसे कम मतों से जीत का रिकार्ड वर्ष 1967 में कांग्रेस प्रत्याशी के नाम है।
कभी वाराणसी जिले का हिस्सा रहे चंदौली में मुगलसराय सीट शुरूआत से ही विशिष्ट रही है। एशिया की सबसे बड़ी कोयला मंडी, रेलवे यार्ड और कॉलोनियां इसे अन्य सीटों से अलग करती हैं। इस सीट पर सबसे बड़ी जीत 2012 में बसपा उम्मीदवार बब्बन सिंह चौहान ने सपा प्रत्याशी बाबूलाल यादव को 15540 मतों से हराकर दर्ज की थी। वहीं सबसे कम मतों से जीत का रिकार्ड कांग्रेस प्रत्याशी श्यामलाल ने 1967 में सोशलिस्ट पार्टी के उमाशंकर तिवारी से मात्र 82 मतों से विजेयी हुए। देश के गणतंत्र के बाद हुए सबसे पहले 1952 में हुए विधान सभा चुनाव में मुगलसराय चंदौली रामनगर के नाम से अस्तित्व में आया।
चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी उमाशंकर तिवारी ने 11353 मत पाकर प्रतिद्वंद्वी निर्दल उम्मीदवार नामवर को 5199 मतों से पराजित किया। नामवर को 6154 मत मिले थे। 1957 में मुगलसराय सीट अस्तित्व में आया। इसमें कांग्रेस पार्टी के श्यामलाल यादव विधायक बने। 1962 में हुए तीसरी विधानसभा चुनाव में इस मुगलसराय सीट से सोशलिस्ट पार्टी के उमाशंकर तिवारी ने कांग्रेस के श्यामलाल यादव को हराकर अपनी हार का बदला लिया। 1968 में पांचवीं विधानसभा के चुनाव में एक बार फिर से उमाशंकर तिवारी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े जबकि श्यामलाल यादव भारतीय किसान दल के टिकट पर मैदान में उतरे थे। उमाशंकर ने भारतीय किसान दल के श्यामलाल को 4,625 वोटों से हराया था। छठे विधानसभा के चुनाव में मुगलसराय (240) सीट पर भारतीय किसान दल के उम्मीदवार गंजी प्रसाद ने जीत हासिल की। उन्होंने कांग्रेस के यदुनाथ सिंह को 428 वोटों से हराया था। भाकिद के गंजी प्रासद को 17,216 और यदुनाथ सिंह को 16,788 वोट मिले। 1977 सातवें विधानसभा चुनाव में भी जनता पार्टी के उम्मीदवार गंजी प्रसाद ने कांग्रेस के यदुनाथ सिंह को 4,299 वोटों से हराया। 1980 में आठवीं विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के रामचंद्र शर्मा ने दो बार के विधायक गंजी प्रसाद को हराकर कांग्रेस की झोली में सीट को डाली। इस चुनाव में कांग्रेस को 5544 वोटों से शानदार जीत मिली थी। 1985 में नौंवीं विधानसभा चुनाव में एक बार फिर कांग्रेस (आई) के रामचंद्र शर्मा ने लोकदल के अलखनाथ को 7,017 वोटों से हराया था। 10 वीं विधानसभा में निर्दलीय गंजी प्रसाद ने कांग्रेस के रामचंद्र को 2638 वोटों से हराया था। 11वीं विधानसभा में पहली बार भाजपा का परचम छब्बू पटेल ने फहराया और गंजी प्रसाद के बेटे रामकिशुन को 6,390 वोटों से हरा दिया। 12 वीं विधानसभा में छब्बू पटेल ने एक बार फिर बसपा के मो हलीम को 14,593 वोटों के अंतर से हराकर भाजपा को जीत दिलाई।13वें विधानसभा में भाजपा के छब्बू पटेल ने समाजवादी पार्टी रामकिशुन को 6766 वोटों से हराकर अपनी जीत की हैट्रिक बनाई। 14वीं विधानसभा चुनाव में मुगलसराय (224) सीट पर समाजवादी पार्टी के रामकिशुन यादव ने भाजपा के छब्बू पटेल को 12,044 वोटों से हराया। 2007 में 15वीं विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के रामकिशुन यादव ने भाजपा के छब्बू पटेल को दोबारा करारी शिकस्त दी। इस बार हार का अंतर कम होकर 1937 वोटों का रहा। वर्ष 2012 में 16वीं विधानसभा चुनाव में मुगलसराय सीट से बसपा से उम्मीदवार बब्बन चौहान ने सांसद रामकिशुन यादव क भाई बाबूलाल यादव को 15440 मतों से मात दी। बाबूलाल को 43,643 और बब्बन चौहान को 59,083 वोट मिले। वर्ष 2017 में भाजपा प्रत्याशी साधना सिंह ने बाबूलाल यादव को 13 हजार 243 मतों से मात दी। बाबूलाल को 74158 वोट मिले जबकि साधना सिंह को 87401 मत मिले। बसपा उम्मीदवार तिलकधारी बिंद को 57219 वोट मिले वहीं प्रगतिशील मानव समाज पार्टी के बब्बन चौहान को मात्र 7811 वोट मिले। जबकि बहुजन मुक्ति पार्टी के गोविंद लाल को 1109 वोट मिले।
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कभी वाराणसी जिले का हिस्सा रहे चंदौली में मुगलसराय सीट शुरूआत से ही विशिष्ट रही है। एशिया की सबसे बड़ी कोयला मंडी, रेलवे यार्ड और कॉलोनियां इसे अन्य सीटों से अलग करती हैं। इस सीट पर सबसे बड़ी जीत 2012 में बसपा उम्मीदवार बब्बन सिंह चौहान ने सपा प्रत्याशी बाबूलाल यादव को 15540 मतों से हराकर दर्ज की थी। वहीं सबसे कम मतों से जीत का रिकार्ड कांग्रेस प्रत्याशी श्यामलाल ने 1967 में सोशलिस्ट पार्टी के उमाशंकर तिवारी से मात्र 82 मतों से विजेयी हुए। देश के गणतंत्र के बाद हुए सबसे पहले 1952 में हुए विधान सभा चुनाव में मुगलसराय चंदौली रामनगर के नाम से अस्तित्व में आया।
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चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी उमाशंकर तिवारी ने 11353 मत पाकर प्रतिद्वंद्वी निर्दल उम्मीदवार नामवर को 5199 मतों से पराजित किया। नामवर को 6154 मत मिले थे। 1957 में मुगलसराय सीट अस्तित्व में आया। इसमें कांग्रेस पार्टी के श्यामलाल यादव विधायक बने। 1962 में हुए तीसरी विधानसभा चुनाव में इस मुगलसराय सीट से सोशलिस्ट पार्टी के उमाशंकर तिवारी ने कांग्रेस के श्यामलाल यादव को हराकर अपनी हार का बदला लिया। 1968 में पांचवीं विधानसभा के चुनाव में एक बार फिर से उमाशंकर तिवारी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े जबकि श्यामलाल यादव भारतीय किसान दल के टिकट पर मैदान में उतरे थे। उमाशंकर ने भारतीय किसान दल के श्यामलाल को 4,625 वोटों से हराया था। छठे विधानसभा के चुनाव में मुगलसराय (240) सीट पर भारतीय किसान दल के उम्मीदवार गंजी प्रसाद ने जीत हासिल की। उन्होंने कांग्रेस के यदुनाथ सिंह को 428 वोटों से हराया था। भाकिद के गंजी प्रासद को 17,216 और यदुनाथ सिंह को 16,788 वोट मिले। 1977 सातवें विधानसभा चुनाव में भी जनता पार्टी के उम्मीदवार गंजी प्रसाद ने कांग्रेस के यदुनाथ सिंह को 4,299 वोटों से हराया। 1980 में आठवीं विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के रामचंद्र शर्मा ने दो बार के विधायक गंजी प्रसाद को हराकर कांग्रेस की झोली में सीट को डाली। इस चुनाव में कांग्रेस को 5544 वोटों से शानदार जीत मिली थी। 1985 में नौंवीं विधानसभा चुनाव में एक बार फिर कांग्रेस (आई) के रामचंद्र शर्मा ने लोकदल के अलखनाथ को 7,017 वोटों से हराया था। 10 वीं विधानसभा में निर्दलीय गंजी प्रसाद ने कांग्रेस के रामचंद्र को 2638 वोटों से हराया था। 11वीं विधानसभा में पहली बार भाजपा का परचम छब्बू पटेल ने फहराया और गंजी प्रसाद के बेटे रामकिशुन को 6,390 वोटों से हरा दिया। 12 वीं विधानसभा में छब्बू पटेल ने एक बार फिर बसपा के मो हलीम को 14,593 वोटों के अंतर से हराकर भाजपा को जीत दिलाई।13वें विधानसभा में भाजपा के छब्बू पटेल ने समाजवादी पार्टी रामकिशुन को 6766 वोटों से हराकर अपनी जीत की हैट्रिक बनाई। 14वीं विधानसभा चुनाव में मुगलसराय (224) सीट पर समाजवादी पार्टी के रामकिशुन यादव ने भाजपा के छब्बू पटेल को 12,044 वोटों से हराया। 2007 में 15वीं विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के रामकिशुन यादव ने भाजपा के छब्बू पटेल को दोबारा करारी शिकस्त दी। इस बार हार का अंतर कम होकर 1937 वोटों का रहा। वर्ष 2012 में 16वीं विधानसभा चुनाव में मुगलसराय सीट से बसपा से उम्मीदवार बब्बन चौहान ने सांसद रामकिशुन यादव क भाई बाबूलाल यादव को 15440 मतों से मात दी। बाबूलाल को 43,643 और बब्बन चौहान को 59,083 वोट मिले। वर्ष 2017 में भाजपा प्रत्याशी साधना सिंह ने बाबूलाल यादव को 13 हजार 243 मतों से मात दी। बाबूलाल को 74158 वोट मिले जबकि साधना सिंह को 87401 मत मिले। बसपा उम्मीदवार तिलकधारी बिंद को 57219 वोट मिले वहीं प्रगतिशील मानव समाज पार्टी के बब्बन चौहान को मात्र 7811 वोट मिले। जबकि बहुजन मुक्ति पार्टी के गोविंद लाल को 1109 वोट मिले।
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