जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से बुधवार को वर्चुअल बैठक बुलाई गयी। इसमें जनपद न्यायाधीश के साथ अपर पुलिस अधीक्षक दयाराम सरोज, प्रभारी सचिव श्याम बाबू व अधीक्षक जिला कारागार वाराणसी पवन त्रिवेदी शामिल हुए। उक्त बैठक में कारागार में विचाराधीन बंदियों की भीड़ कम किए जाने को लेकर चर्चा हुई। ऐसे विचाराधीन कैदी जिनकी अधिकतम सजा सात साल तक तय है उन्हें पेरोल पर छोड़े जाने को लेकर विचार-विमर्श हुआ। साथ हीउनके स्वास्थ्य केक प्रति सजग रहने का भी निर्देश दिया गया।
कहा कि कैदियों के साथ-साथ जिला कारागार वाराणसी में कार्यरत अधिकारियों व कर्मचारियों की भी कोरोना जांच करायी जाय। जेल अधीक्षक ने बताया कि 121 दोषसिद्ध कैदियों को पेरोल पर छोड़ा गया है, वहीं 18 कैदियों को शासन के निर्देश पर पेरोल पर छोड़ा गया है। जेल अधीक्षक द्वारा बताया गया कि लगभग 25 से 30 बंदियों को कोरोना है परन्तु वर्तमान में सभी स्वस्थ है। जनपद न्यायाधीश द्वारा बंदियों के खान-पान के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया कि सात वर्ष या उससे कम सजा वाले मामलों में गिरफ्तारी न हो या फिर होती है तो थाने स्तर से जमानत पर रिहा करने की कार्यवाही की जाय। पेरोल वाले सिद्धदोष बंदियों को छोड़ने की प्रक्रिया में तेजी लायी जाय। जो भी बेल बांड सत्यापन के लिए थाने पर जाते हैं उनका सत्यापन कराकर न्यायालय को एक सप्ताह के अंदर आख्या प्रेषित की जाय।