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Chandauli News: जिले में तैयार होंगे बांग्लादेशी फंगेसियस मछली के बच्चे
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आने वाले दिनों में बांग्लादेश और बंगाल से फंगेसियस मछली के बच्चों की खरीद की निर्भरता खत्म होगी। जिले में ही इसके बच्चे तैयार किए जाएंगे। मछली पालक अब अपने जिले में ही ब्रीड (मछलियों के बच्चे और स्पान) कर सकेंगे। इसके लिए किसानों को हैचरी निर्माण के लिए 40 से 60 प्रतिशत तक अनुदान भी मत्स्य विभाग की ओर से मिलेंगे।
जिले में एक हजार के करीब छोटे बड़े मछली पालक हैं जो रोहू, कतला, नैन सहित मांगूर आदि का पालन करते हैं। रोहू, कतला, नैन सहित मांगूर जैसी मछलियों के बच्चे और स्पान तो यहां तैयार कर लिए जाते है लेकिन फंगेसियस के बच्चे यहां के मौसम और पानी में नहीं तैयार हो पाते हैं। जबकि बाजार में इसकी अधिक मांग है। मत्स्य पालकों को बांग्लादेश से फंगेसियस बच्चे मंगाने पड़ते हैं। एक फंगेसियस मछली के बच्चे के पालन पोषण का खर्च 80 से 85 रुपये तक पड़ जाता है। बाजार में एक किलो की फंगेसियस 100 से 104 रुपये प्रति किलो तक बिकती है।
जिले में प्रगतिशील मत्स्य पालक मदनदीप सिंह ने बताया कि फंगेसियस के बच्चे यहां के पानी और मौसम में नहीं तैयार हो पाते हैं। आंबेडकरनगर जिले में एक बार प्रयास किया गया था लेकिन विभागी सहयोग के अभाव में सफलता नहीं मिली। इसके लिए मत्स्य विभाग के ओर से सहयोग की जरूरत है।
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मिलेगा अनुदान
उप निदेशक मंडल अनिल कुमार ने बताया कि सबसे ज्यादा बिकने वाली फंगेसियस के बच्चों को लेकर बांग्लादेश पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा के तहत अब किसान अपने जिले में ही फंगेसियस के बच्चों को तैयार कर सकेंगे यानी उनकी ब्रीडिंग अब जिले में ही संभव है। इसके लिए 25 लाख रुपये की लागत से तैयार होने वाली हैचरी के निर्माण के लिए ओबीसी और सामान्य जाति के इच्छुक मत्स्य पालक को 40 प्रतिशत, अनुसूचित जाति के लिए और सभी वर्ग की महिलाओं को 60 प्रतिशत तक अनुदान देने की योजना है। इसके अलावा तालाब की खोदाई के लिए अनुदान की सुविधा है। वाराणसी मंडल में अभी फिलहाल एक हैचरी का निर्माण वाराणसी के आराजीलाइन ब्लाॅक के कृष्ण दत्तपुर में किया गया है। जहां रोहू, कतला, नैन के बच्चे तैयार किए जाते है। फंगेसियस के बच्चों को तैयार करने के लिए किसान आवेदन कर सकते हैं। इन्हें जरूरी प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
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जिले में एक हजार के करीब छोटे बड़े मछली पालक हैं जो रोहू, कतला, नैन सहित मांगूर आदि का पालन करते हैं। रोहू, कतला, नैन सहित मांगूर जैसी मछलियों के बच्चे और स्पान तो यहां तैयार कर लिए जाते है लेकिन फंगेसियस के बच्चे यहां के मौसम और पानी में नहीं तैयार हो पाते हैं। जबकि बाजार में इसकी अधिक मांग है। मत्स्य पालकों को बांग्लादेश से फंगेसियस बच्चे मंगाने पड़ते हैं। एक फंगेसियस मछली के बच्चे के पालन पोषण का खर्च 80 से 85 रुपये तक पड़ जाता है। बाजार में एक किलो की फंगेसियस 100 से 104 रुपये प्रति किलो तक बिकती है।
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जिले में प्रगतिशील मत्स्य पालक मदनदीप सिंह ने बताया कि फंगेसियस के बच्चे यहां के पानी और मौसम में नहीं तैयार हो पाते हैं। आंबेडकरनगर जिले में एक बार प्रयास किया गया था लेकिन विभागी सहयोग के अभाव में सफलता नहीं मिली। इसके लिए मत्स्य विभाग के ओर से सहयोग की जरूरत है।
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मिलेगा अनुदान
उप निदेशक मंडल अनिल कुमार ने बताया कि सबसे ज्यादा बिकने वाली फंगेसियस के बच्चों को लेकर बांग्लादेश पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा के तहत अब किसान अपने जिले में ही फंगेसियस के बच्चों को तैयार कर सकेंगे यानी उनकी ब्रीडिंग अब जिले में ही संभव है। इसके लिए 25 लाख रुपये की लागत से तैयार होने वाली हैचरी के निर्माण के लिए ओबीसी और सामान्य जाति के इच्छुक मत्स्य पालक को 40 प्रतिशत, अनुसूचित जाति के लिए और सभी वर्ग की महिलाओं को 60 प्रतिशत तक अनुदान देने की योजना है। इसके अलावा तालाब की खोदाई के लिए अनुदान की सुविधा है। वाराणसी मंडल में अभी फिलहाल एक हैचरी का निर्माण वाराणसी के आराजीलाइन ब्लाॅक के कृष्ण दत्तपुर में किया गया है। जहां रोहू, कतला, नैन के बच्चे तैयार किए जाते है। फंगेसियस के बच्चों को तैयार करने के लिए किसान आवेदन कर सकते हैं। इन्हें जरूरी प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।