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Chandauli News: माइनर चालू होते ही घर-बस्ती में घुसा पानी, 10 बीघा गेहूं की फसल डूबी
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चकिया। नहरों और माइनरों की सिल्ट सफाई व मरम्मत कार्य की हकीकत उस समय सामने आ गई, जब लतीफशाह बीयर से निकली लेफ्ट कर्मनाशा बोदारा माइनर को चालू करते ही पानी गांव और बस्ती में घुस गया। माइनर की समुचित सफाई और मरम्मत न होने के कारण मंगलवार को मुहम्मदाबाद पूर्वी बाजार और पुरानी चकिया क्षेत्र में भारी नुकसान हुआ। लगभग 10 बीघा में खड़ी गेहूं की फसल जलमग्न हो गई, जबकि टेल तक पानी पहुंचने के बजाय माइनर का पानी आबादी में फैल गया। स्थिति यह रही कि पूर्वी बाजार स्थित कृषक भारती सेवा केंद्र के गोदाम सहित कई घरों में पानी घुस गया। अचानक हुए जलभराव से लोगों में अफरातफरी मच गई और ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों का आरोप है कि माइनर के किनारों पर मिट्टी का कटान पहले से ही हो चुका था, लेकिन सिंचाई विभाग ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। जैसे ही माइनर संचालित की गई, पानी कमजोर स्थानों से टूटकर खेतों और घरों में भर गया।
इस घटना से नाराज ग्रामीणों और किसानों ने सिंचाई विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। लोगों का कहना है कि हर साल कागजों में सिल्ट सफाई और मरम्मत दिखा दी जाती है, जबकि जमीनी हकीकत इसके उलट है। यदि समय रहते माइनर की सही ढंग से सफाई और मरम्मत कराई जाती, तो किसानों की फसल और लोगों के घरों को नुकसान नहीं होता।
किसान एवं पूर्व सभासद राममूरत कुशवाहा, संजय, सिपाही चौहान, रहमतुल्लाह, राजेश मिश्रा सहित अन्य ग्रामीणों ने इस मामले को लेकर जिला प्रशासन से शिकायत की है। उन्होंने नुकसान का मुआवजा देने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
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इस घटना से नाराज ग्रामीणों और किसानों ने सिंचाई विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। लोगों का कहना है कि हर साल कागजों में सिल्ट सफाई और मरम्मत दिखा दी जाती है, जबकि जमीनी हकीकत इसके उलट है। यदि समय रहते माइनर की सही ढंग से सफाई और मरम्मत कराई जाती, तो किसानों की फसल और लोगों के घरों को नुकसान नहीं होता।
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किसान एवं पूर्व सभासद राममूरत कुशवाहा, संजय, सिपाही चौहान, रहमतुल्लाह, राजेश मिश्रा सहित अन्य ग्रामीणों ने इस मामले को लेकर जिला प्रशासन से शिकायत की है। उन्होंने नुकसान का मुआवजा देने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
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