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Chandauli News: शृंगी ऋषि ने राजा परीक्षित को दिया था मृत्यु का श्राप

Fri, 25 Sep 2026 02:37 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 25 Sep 2026 02:37 AM IST
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Sage Shringi had cursed King Parikshit with death.
टांडाकला में श्रीमद्भागवत कथा सुनाते जगदीश सांडिल्य। संवाद
टांडाकला। स्थानीय गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में व्यास पंडित जगदीश शांडिल्य महाराज ने बृहस्पतिवार को राजा परीक्षित के चरित्र और तक्षक नाग के श्राप का प्रसंग सुनाया।
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संगीतमय कथा में कथा व्यास ने बताया कि राजा परीक्षित शिकार करते समय प्यास से व्याकुल होकर शमीक ऋषि के आश्रम पहुंचे। ऋषि को ध्यानमग्न देखकर राजा को लगा कि उनकी उपेक्षा की जा रही है।
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क्रोध में उन्होंने ऋषि के गले में मृत सर्प डाल दिया। इसकी जानकारी मिलने पर ऋषि के पुत्र शृंगी ने राजा परीक्षित को श्राप दिया कि सातवें दिन तक्षक नाग के डसने से उनकी मृत्यु हो जाएगी।
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श्राप की जानकारी के बाद राजा परीक्षित ने सांसारिक मोह-माया का त्याग कर गंगा तट पर शुकदेव जी महाराज की शरण ली। शुकदेव जी ने उन्हें सात दिनों तक श्रीमद्भागवत कथा सुनाई।
व्यास ने कहा कि भागवत कथा के श्रवण से राजा परीक्षित का मृत्यु का भय समाप्त हुआ और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को भयमुक्त कर प्रभु भक्ति के मार्ग पर ले जाती है। कथा के समापन पर भागवत भगवान की आरती की गई। इसके बाद श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया।

आयोजन में पंडित गिरधारी पांडेय और अभिषेक पांडेय ने सहयोग किया। आयोजक रामचंद्र बरनवाल, गोरे बरनवाल, कालीचरण बरनवाल, पप्पू बरनवाल, संदीप बरनवाल, कक्कू बरनवाल, मिक्कू बरनवाल, रिशु बरनवाल और प्रदीप बरनवाल आदि मौजूद रहे।
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