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बड़े चिंतक थे अंबेडकर
ब्यूरो/अमर उजाला, चंदौली
Updated Mon, 07 Dec 2015 01:12 AM IST
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डा. अंबेडकर की पुण्यतिथि के अवसर पर रविवार को शहर कांग्रेस कमेटी के
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कार्यकर्ताओं ने चतुर्भुजपुर ओडवार स्थित डा. अंबेडकर की प्रतिमा पर
माल्यार्पण कर उन्हें याद किया।
इसके पश्चात गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें वक्ताओं ने कहा कि देश में बीसवीं सदी में अंबेडकर बड़े चिंतक थे।
अंबेडकर बीसवीं सदी के श्रेष्ठ चिंतक, ओजस्वी लेखक, यशस्वी वक्ता व स्वतंत्र भारत के प्रथम कानून मंत्री रहे। देश के संविधान के निर्माण में उनका योगदान अतुलनीय है।
विधि विशेषज्ञ, परिश्रमी, उत्कृष्ट कौशल के धनी डा. अंबेडकर ने देश के संविधान के निर्माण में अपना विशेष योगदान दिया। इसलिए उन्हें भारतीय संविधान का जनक माना जाता है।
कहा कि डा. भीमराव अंबेडकर ने कोलंबिया विश्वविद्यालय अमेरिका से पहले स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद वहीं से पीएचडी किया।
मधुमेह से पीड़ित होने के चलते छह दिसंबर 1956 को डा. अंबेडकर का स्वर्गवास हो गया। इस दौरान बृजेश गुप्ता, राकेश सिंह, विजय गुप्ता, संजय मिश्रा, डा. नंदलाल, मेवालाल पटेल, दीपक गुप्ता, दुर्गा जायसवाल, सुनील प्रजापति आदि रहे।
अध्यक्षता रामजी गुप्ता व संचालन नंदगोपाल सिंह ने किया।
इसके पश्चात गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें वक्ताओं ने कहा कि देश में बीसवीं सदी में अंबेडकर बड़े चिंतक थे।
अंबेडकर बीसवीं सदी के श्रेष्ठ चिंतक, ओजस्वी लेखक, यशस्वी वक्ता व स्वतंत्र भारत के प्रथम कानून मंत्री रहे। देश के संविधान के निर्माण में उनका योगदान अतुलनीय है।
विधि विशेषज्ञ, परिश्रमी, उत्कृष्ट कौशल के धनी डा. अंबेडकर ने देश के संविधान के निर्माण में अपना विशेष योगदान दिया। इसलिए उन्हें भारतीय संविधान का जनक माना जाता है।
कहा कि डा. भीमराव अंबेडकर ने कोलंबिया विश्वविद्यालय अमेरिका से पहले स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद वहीं से पीएचडी किया।
मधुमेह से पीड़ित होने के चलते छह दिसंबर 1956 को डा. अंबेडकर का स्वर्गवास हो गया। इस दौरान बृजेश गुप्ता, राकेश सिंह, विजय गुप्ता, संजय मिश्रा, डा. नंदलाल, मेवालाल पटेल, दीपक गुप्ता, दुर्गा जायसवाल, सुनील प्रजापति आदि रहे।
अध्यक्षता रामजी गुप्ता व संचालन नंदगोपाल सिंह ने किया।