{"_id":"58-146698","slug":"Chandauli-146698-58","type":"story","status":"publish","title_hn":"शून्य हो गई जिले में गिद्धों की संख्या ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शून्य हो गई जिले में गिद्धों की संख्या
Chandauli
Updated Tue, 16 Dec 2014 05:30 AM IST
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चकिया (चंदौली)। उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश पर प्रदेश भर में एक साथ कराई गई गिद्ध गणना की रिपोर्ट आ गई है। इस रिपोर्ट में काशी वन्य जीव प्रभाग के वन क्षेत्र सहित समूचे चंदौली जनपद में गिद्धों की संख्या शून्य बताई गई है। गणना में पता चला है कि पिछली गणना में औरवाटांड के कोटर में पाये गए गिद्धों के दो जोड़े दूसरे स्थान को पलायन कर गए हैं। वहीं, सारस की भी संख्या शून्य है।
काशी वन्य जीव प्रभाग के डीएफओ मनोज सोनकर के अनुसार शासन के निर्देश पर जीपीएस सिस्टम और डिजिटल कैमरा सिस्टम के साथ ही ह्यूमन सिस्टम से कराई गई गिद्धों की गणना में पूरे वन क्षेत्र में कोई भी गिद्ध नहीं मिला है। इसलिए शासन को शून्य की रिपोर्ट भेजी गई है। इसी तरह सारसों की मौजूदगी भी शून्य है। ज्ञात हो कि इस वन क्षेत्र में सारस को उचित प्रवास न मिलने के कारण उनकी मौजूदगी कभी भी नहीं रही है। डीएफओ के अनुसार एक माह पूर्व चहनियां में एक घायल गिद्ध पाया गया था उसका इलाज कराकर वन क्षेत्र में छोड़ दिया गया था। वह भी पलायन कर गया है। डीएफओ ने बताया कि डाइक्लोनिक दवाओं के कारण पालतू पशुओं के मांस में जहर होने के कारण मांस का भक्षण करने वाले गिद्धों की बड़ी संख्या में मौत हो गई है। जिससे उनका अस्तित्व समाप्त होने के कगार पर पहुंच गया है।
काशी वन्य जीव प्रभाग के डीएफओ मनोज सोनकर के अनुसार शासन के निर्देश पर जीपीएस सिस्टम और डिजिटल कैमरा सिस्टम के साथ ही ह्यूमन सिस्टम से कराई गई गिद्धों की गणना में पूरे वन क्षेत्र में कोई भी गिद्ध नहीं मिला है। इसलिए शासन को शून्य की रिपोर्ट भेजी गई है। इसी तरह सारसों की मौजूदगी भी शून्य है। ज्ञात हो कि इस वन क्षेत्र में सारस को उचित प्रवास न मिलने के कारण उनकी मौजूदगी कभी भी नहीं रही है। डीएफओ के अनुसार एक माह पूर्व चहनियां में एक घायल गिद्ध पाया गया था उसका इलाज कराकर वन क्षेत्र में छोड़ दिया गया था। वह भी पलायन कर गया है। डीएफओ ने बताया कि डाइक्लोनिक दवाओं के कारण पालतू पशुओं के मांस में जहर होने के कारण मांस का भक्षण करने वाले गिद्धों की बड़ी संख्या में मौत हो गई है। जिससे उनका अस्तित्व समाप्त होने के कगार पर पहुंच गया है।
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