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चारों ओर छाई होली की खुमारी, मस्ती में डूबे लोग
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पीडीडीयू नगर। होली का पर्व आते ही मस्ती की खुमारी चारों ओर दिखने लगी है। रंग-बिरंगी पिचकारियों, गुलाल, रंग, अबीर, विभिन्न प्रकार के मुखौटों आदि से बाजार पट गए हैं। होली मनाने की तैयारी में जुटे लोगों की भीड़ बाजारों में उमड़ने लगी है। मंगलवार को भी बाजार में खरीदारों की भारी भीड़ रही।
होली मस्ती और आनंद का पर्व है। हिंदू नववर्ष का आगाज इसी पर्व से होता है। दो दिनों तक मनाए जाने वाले पर्व की खुमारी आने वाले कुछ दिनों तक महसूस की जाती है। होली मनाए जाने से एक दिन पूर्व होलिका मनाई जाती है। इसी दिन से पर्व की मस्ती आरंभ हो जाती है। पर्व मनाने के लिए नगर में जीटी रोड के किनारे व सुभाष पार्क के सामने दुकानें सज गई हैं। इन दुकानों पर रंग, अबीर, गुलाल, पिचकारी, मुखौटे आदि खरीदे और बेचे जा रहे हैं।
इस वर्ष लोग होली मनाने के लिए केमिकलयुक्त रंगों की जगह हर्बल (टेसू के फूलों से बने रंग) रंगों की ज्यादा मांग कर रहे हैं। बाजार में केमिकल युक्त रंग जहां 10 से सौ रुपये डिब्बा है वहीं हर्बल रंग 20 से 150 रुपये प्रति डिब्बा बिक रहा है।
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लोकसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लागू कर दिए जाने के कारण इस वर्ष नेताओं के मुखौटे बाजार से गायब दिखे। पहले नेताओं के मुखौटों की खूब मांग हुआ करती थी। इनके स्थान पर बनावटी बालों से बने मुखौटों की मांग बढ़ी है जो 20 से लेकर सौ रुपये तक बिक रहे हैं।
इस वर्ष होली की विशेषता प्रेशर पिचकारी है। आम पिचकारी के मुकाबले दूर तक रंग फेंकने वाली प्रेशर पिचकारी बच्चों व युवाओं की पहली पसंद बनी है। आम पिचकारी जहां 10 से सौ रुपये में बिक रही है वहीं प्रेशर पिचकारी का मूल्य सौ रुपये से 350 रुपये है। महंगी होने के बाद भी प्रेशर पिचकारी खूब बिक रही है। दुकानदार संदीप गुप्ता ने बताया कि प्रेशर पिचकारी से 10 से 50 मीटर तक रंग फेंका जा सकता है।
होली के त्योहार को लेकर युवाओं में काफी उत्साह है। युवा प्रदीप पटेल, योगेंद्र यादव ने बताया कि होली का उन्हें हर साल इंतजार रहता है। होली का पर्व भेदभाव भुलाने का सबसे अच्छा अवसर है। यह पर्व आपसी भाईचारे और सद्भाव का संदेश देता है। वहीं चारुप्रिया और वंदना का कहना है कि होली के रंगों में प्यार होता है। एक दूसरे से मिलने और गले लगने से दूरियां और कटुता कम होती है। होली रंगों का त्योहार है, इसे समाज के सभी वर्ग के लोग मिल जुलकर साथ मनाते हैं।
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होली मस्ती और आनंद का पर्व है। हिंदू नववर्ष का आगाज इसी पर्व से होता है। दो दिनों तक मनाए जाने वाले पर्व की खुमारी आने वाले कुछ दिनों तक महसूस की जाती है। होली मनाए जाने से एक दिन पूर्व होलिका मनाई जाती है। इसी दिन से पर्व की मस्ती आरंभ हो जाती है। पर्व मनाने के लिए नगर में जीटी रोड के किनारे व सुभाष पार्क के सामने दुकानें सज गई हैं। इन दुकानों पर रंग, अबीर, गुलाल, पिचकारी, मुखौटे आदि खरीदे और बेचे जा रहे हैं।
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इस वर्ष लोग होली मनाने के लिए केमिकलयुक्त रंगों की जगह हर्बल (टेसू के फूलों से बने रंग) रंगों की ज्यादा मांग कर रहे हैं। बाजार में केमिकल युक्त रंग जहां 10 से सौ रुपये डिब्बा है वहीं हर्बल रंग 20 से 150 रुपये प्रति डिब्बा बिक रहा है।
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लोकसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लागू कर दिए जाने के कारण इस वर्ष नेताओं के मुखौटे बाजार से गायब दिखे। पहले नेताओं के मुखौटों की खूब मांग हुआ करती थी। इनके स्थान पर बनावटी बालों से बने मुखौटों की मांग बढ़ी है जो 20 से लेकर सौ रुपये तक बिक रहे हैं।
इस वर्ष होली की विशेषता प्रेशर पिचकारी है। आम पिचकारी के मुकाबले दूर तक रंग फेंकने वाली प्रेशर पिचकारी बच्चों व युवाओं की पहली पसंद बनी है। आम पिचकारी जहां 10 से सौ रुपये में बिक रही है वहीं प्रेशर पिचकारी का मूल्य सौ रुपये से 350 रुपये है। महंगी होने के बाद भी प्रेशर पिचकारी खूब बिक रही है। दुकानदार संदीप गुप्ता ने बताया कि प्रेशर पिचकारी से 10 से 50 मीटर तक रंग फेंका जा सकता है।
होली के त्योहार को लेकर युवाओं में काफी उत्साह है। युवा प्रदीप पटेल, योगेंद्र यादव ने बताया कि होली का उन्हें हर साल इंतजार रहता है। होली का पर्व भेदभाव भुलाने का सबसे अच्छा अवसर है। यह पर्व आपसी भाईचारे और सद्भाव का संदेश देता है। वहीं चारुप्रिया और वंदना का कहना है कि होली के रंगों में प्यार होता है। एक दूसरे से मिलने और गले लगने से दूरियां और कटुता कम होती है। होली रंगों का त्योहार है, इसे समाज के सभी वर्ग के लोग मिल जुलकर साथ मनाते हैं।