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अभियान बेअसर, बाजार में धड़ल्ले से बिक रही पालीथिन
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पीडीडीयू नगर। पर्यावरण के लिहाज से प्रतिबंधित पॉलिथीन की बिक्री पर रोक लगाने के लिए शासन के निर्देश पर प्रदेशभर में अभियान चलाया गया था। निर्देश के क्रम में जिला प्रशासन से लेकर नगर पालिका और नगर पंचायत प्रशासन ने अभियान चलाया। इस दौरान पॉलिथीन बेचने वालों को जागरूक करने के साथ ही पॉलिथीन जब्त करने और बेचेने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी हुई। मगर विभागों की सुस्ती के चलते अभियान ठंडे बस्ते में चला गया और बाजार में फिर धड़ल्ले से पालीथिन बिकने लगी है।
पॉलिथीन के बने बैग व थर्मोकोल से बने बरतन लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुके हैं। सब्जी व फल बाजार से लेकर सभी स्थानों पर पॉलिथीन के बैग में लोग खेलआम वस्तुुएं ले जा रहे हैं। प्रतिबंध व छापेमारी के बाद कुछ दिनों के लिए दुकानदारों ने बेचना बंद कर दिया था मगर फिर से सब्जी, फल, मीट और परचून की दुकानों पर बिकने लगी है। जिले में लगभग एक कुंतल पॉलिथीन के बैगों की प्रतिदिन खपत है।
पर्यावरण संरक्षण व भूमिगत जल संचयन में सबसे बड़ी बाधा मानते हुए पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद 15 अगस्त 2018 से राज्य में पॉलिथीन पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया गया। इस आदेश के बाद जिला प्रशासन की ओर से टीम गठित कर छापेमारी शुरू की गई। एसडीएम, तहसीलदार के अलावा नगर पालिका और नगर पंचायत के अधिकारियों गठित टीम ने जब पॉलिथीन के बैग बेचने व प्रयोग करने वालों की दुकानों पर छापेमारी शुरू कर जुर्माना वसूलना व बैगों को नष्ट करने की कार्रवाई शुरू की। लेकिन अब यह अभियान ठंडे बस्ते में चली गई है और पॉलिथीन धड़ल्ले से बाजार में बेची जा रही है।
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पशुओं के लिए है जानलेवा
पॉलिथीन के बैग पशुओं के लिए जानलेवा साबित होने लगे हैं। लोग अपने घरों के बचे खाने कूड़ेदान में फेंकने की जगह पॉलिथीन के बैगों में बांधकर सड़कों पर फेंक दिया करते हैं। सड़कों व गलियों में घूमने वाले छुट्टा पशु भोजन के चक्कर में इन बैगों को निगल जाते हैं। जो उन्हें नुकसान करता है और समय पर इलाज न किए जाने से उनकी मौत भी हो जाती है।
नालियां हो रही जाम, फैल रही गंदगी
पॉलिथीन सड़क और गलियों में फेंकने से नालियां जाम हो रही हैं। इससे गंदगी फैल रही है। और सड़कों पर गंदा पानी बहता है। इससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा खुले मैदानों में फेंके गए पॉलिथीन के बैग भूमिगत जल संरक्षण में भी बाधक हैं। इनके कारण बरसात का पानी जमीन के अंदर उतनी मात्रा में नहीं जा पाता जितनी मात्रा में जाना चाहिए।
कोट-
पॉलिथीन के बैगों पर रोक लगाने के लिए फिर से अभियान चलाकर सब्जी, फल, मीट, मछली आदि विकेताओं को जागरूक किया जाएगा। विक्रेताओं वार्ता कर उन्हें पॉलिथीन के बैगों का प्रयोग न करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसके बाद भी कोई नहीं मानता है तो कार्रवाई की जाएगी।
रोली गुप्ता, ईओ, नपा परिषद, पीडीडीयू नगर।
पॉलिथीन के बने बैग व थर्मोकोल से बने बरतन लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुके हैं। सब्जी व फल बाजार से लेकर सभी स्थानों पर पॉलिथीन के बैग में लोग खेलआम वस्तुुएं ले जा रहे हैं। प्रतिबंध व छापेमारी के बाद कुछ दिनों के लिए दुकानदारों ने बेचना बंद कर दिया था मगर फिर से सब्जी, फल, मीट और परचून की दुकानों पर बिकने लगी है। जिले में लगभग एक कुंतल पॉलिथीन के बैगों की प्रतिदिन खपत है।
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पर्यावरण संरक्षण व भूमिगत जल संचयन में सबसे बड़ी बाधा मानते हुए पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद 15 अगस्त 2018 से राज्य में पॉलिथीन पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया गया। इस आदेश के बाद जिला प्रशासन की ओर से टीम गठित कर छापेमारी शुरू की गई। एसडीएम, तहसीलदार के अलावा नगर पालिका और नगर पंचायत के अधिकारियों गठित टीम ने जब पॉलिथीन के बैग बेचने व प्रयोग करने वालों की दुकानों पर छापेमारी शुरू कर जुर्माना वसूलना व बैगों को नष्ट करने की कार्रवाई शुरू की। लेकिन अब यह अभियान ठंडे बस्ते में चली गई है और पॉलिथीन धड़ल्ले से बाजार में बेची जा रही है।
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पशुओं के लिए है जानलेवा
पॉलिथीन के बैग पशुओं के लिए जानलेवा साबित होने लगे हैं। लोग अपने घरों के बचे खाने कूड़ेदान में फेंकने की जगह पॉलिथीन के बैगों में बांधकर सड़कों पर फेंक दिया करते हैं। सड़कों व गलियों में घूमने वाले छुट्टा पशु भोजन के चक्कर में इन बैगों को निगल जाते हैं। जो उन्हें नुकसान करता है और समय पर इलाज न किए जाने से उनकी मौत भी हो जाती है।
नालियां हो रही जाम, फैल रही गंदगी
पॉलिथीन सड़क और गलियों में फेंकने से नालियां जाम हो रही हैं। इससे गंदगी फैल रही है। और सड़कों पर गंदा पानी बहता है। इससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा खुले मैदानों में फेंके गए पॉलिथीन के बैग भूमिगत जल संरक्षण में भी बाधक हैं। इनके कारण बरसात का पानी जमीन के अंदर उतनी मात्रा में नहीं जा पाता जितनी मात्रा में जाना चाहिए।
कोट-
पॉलिथीन के बैगों पर रोक लगाने के लिए फिर से अभियान चलाकर सब्जी, फल, मीट, मछली आदि विकेताओं को जागरूक किया जाएगा। विक्रेताओं वार्ता कर उन्हें पॉलिथीन के बैगों का प्रयोग न करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसके बाद भी कोई नहीं मानता है तो कार्रवाई की जाएगी।
रोली गुप्ता, ईओ, नपा परिषद, पीडीडीयू नगर।