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कुपोषण रोकने के लिए किया प्रशिक्षित
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चंदौली। बाल विकास पुष्टाहार विभाग की ओर से शुक्रवार को विकास भवन सभागार में कार्यशाला का आयोजन हुआ। इसमें कुपोषण रोकने और बच्चों को पोषक तत्व उपलब्ध कराने के लिए जानकारी दी गई। इसके साथ ही नुक्कड़ नाटक के जरिए शिशु की देखभाल के बारे में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बताया गया।
जिला कार्यक्रम अधिकारी नीलम मेहता ने बताया कि बच्चों को कुपोषण का शिकार होने से बचाने के लिए कार्यकर्ताओं को सतर्क रहना होगा। अपने कार्य को इमानदारी से करते हुए गर्भवती महिलाओं को समय समय पर टीके और पोषक तत्व लेने की सलाह देना चाहिए। कहा कि बीमार शिशु के आंगनबाड़ी केंद्र में ले जाने के बाद कार्यकत्री की ओर से दी जाने वाली सलाह, स्तनपान कराने, उपरी आहार की मात्रा बढ़ाने सहित अन्य बिंदुओं के बारे में लोगों को जरुर बताएं। बीमारी के दौरान शिशु के स्तनपान व आहार की जानकारी प्राप्त करें और रिपोर्ट तैयार करके प्रस्तुत करें। कहा कि शिशुओं को अक्सर दस्त आदि की शिकायत होती है। शिशु के बीमार पड़ने पर माता की ओर से स्तनपान बंद कर दिया जाता है। साथ ही उपरी आहार में भी कमी कर दी जाती है। शिशुओं के स्वास्थ्य पर इसका प्रतिकूल असर पड़ता है। बीमारी के दौरान शिशु के इलाज के साथ ही खानपान में किसी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए। साथ ही आशा व एएनएम के जरिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में भेजकर इलाज कराना भी सुनिश्चित करें। इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कार्यशाला में सभी ब्लाकों के सीडीपीओ, सहायिकाएं व आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां उपस्थित रहीं।
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जिला कार्यक्रम अधिकारी नीलम मेहता ने बताया कि बच्चों को कुपोषण का शिकार होने से बचाने के लिए कार्यकर्ताओं को सतर्क रहना होगा। अपने कार्य को इमानदारी से करते हुए गर्भवती महिलाओं को समय समय पर टीके और पोषक तत्व लेने की सलाह देना चाहिए। कहा कि बीमार शिशु के आंगनबाड़ी केंद्र में ले जाने के बाद कार्यकत्री की ओर से दी जाने वाली सलाह, स्तनपान कराने, उपरी आहार की मात्रा बढ़ाने सहित अन्य बिंदुओं के बारे में लोगों को जरुर बताएं। बीमारी के दौरान शिशु के स्तनपान व आहार की जानकारी प्राप्त करें और रिपोर्ट तैयार करके प्रस्तुत करें। कहा कि शिशुओं को अक्सर दस्त आदि की शिकायत होती है। शिशु के बीमार पड़ने पर माता की ओर से स्तनपान बंद कर दिया जाता है। साथ ही उपरी आहार में भी कमी कर दी जाती है। शिशुओं के स्वास्थ्य पर इसका प्रतिकूल असर पड़ता है। बीमारी के दौरान शिशु के इलाज के साथ ही खानपान में किसी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए। साथ ही आशा व एएनएम के जरिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में भेजकर इलाज कराना भी सुनिश्चित करें। इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कार्यशाला में सभी ब्लाकों के सीडीपीओ, सहायिकाएं व आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां उपस्थित रहीं।
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