{"_id":"5a9d9e954f1c1b692a8b5694","slug":"171520279189-chandauli-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्त्री देश व समाज की आभूषण हैं: वेदांती महराज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्त्री देश व समाज की आभूषण हैं: वेदांती महराज
Updated Tue, 06 Mar 2018 01:16 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
शहाबगंज। मानस सेवा समिति मसोई की ओर से आयोजित आठ दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन सोमवार को काशी के स्वामी रामकमल दास वेदांती महाराज ने श्रीमद्भागवत कथा के गुण को बताते हुए कहा कि नारियां सदा से ही देश व समाज की आभूषण रही हैं। उन्होंने कथा में द्रौपदी, कुंती व उत्तरा के चरित्रों के माध्यम से नारी जगत को श्रेष्ठ पथ पर चलने की प्रेरणा दी।
श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा कि द्रौपदी के चरित्र से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि व्यक्ति को विपरीत परिस्थितियों में भी क्षमा और सहिष्णुता का त्याग नहीं करना चाहिए। कहा कि हत्या के बदले में हत्या किसी समाज को श्रेष्ठ पथ पर नहीं ले जा सकता है। कुंती के चरित्र में भगवान के प्रति कड़ी तपस्या से भगवान को अपने वश में करने का संदेश दिया। उत्तरा के चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि उत्तरा के चरित्र से हमें प्रेरणा मिलती है कि जीवन में जब भी आपदाएं आए उस समय हमें सर्वहितकारी भगवान के शरण में ही जाना चाहिए। कथा क्रम को आगे बढ़ाते हुये स्वामी जी ने परीक्षित के जन्म और उनको मिले श्राप का वृतांत सुनाया। कहा कि प्राणी जो भी करता है उसे निश्चित रुप से भोगना पड़ता है। कथा के दौरान विकेश सिंह, उमेश सिंह, राजन सिंह, सुनील सिंह, नीरज सिंह, संदीप सिंह, अमित सिंह युवराज, अमृत, महानंद सिंह, चंद्रजीत पांडेय मौजूद रहे।
श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा कि द्रौपदी के चरित्र से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि व्यक्ति को विपरीत परिस्थितियों में भी क्षमा और सहिष्णुता का त्याग नहीं करना चाहिए। कहा कि हत्या के बदले में हत्या किसी समाज को श्रेष्ठ पथ पर नहीं ले जा सकता है। कुंती के चरित्र में भगवान के प्रति कड़ी तपस्या से भगवान को अपने वश में करने का संदेश दिया। उत्तरा के चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि उत्तरा के चरित्र से हमें प्रेरणा मिलती है कि जीवन में जब भी आपदाएं आए उस समय हमें सर्वहितकारी भगवान के शरण में ही जाना चाहिए। कथा क्रम को आगे बढ़ाते हुये स्वामी जी ने परीक्षित के जन्म और उनको मिले श्राप का वृतांत सुनाया। कहा कि प्राणी जो भी करता है उसे निश्चित रुप से भोगना पड़ता है। कथा के दौरान विकेश सिंह, उमेश सिंह, राजन सिंह, सुनील सिंह, नीरज सिंह, संदीप सिंह, अमित सिंह युवराज, अमृत, महानंद सिंह, चंद्रजीत पांडेय मौजूद रहे।
विज्ञापन