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महिलाओं को करना होगा खुद का सम्मान, तभी मिलेगा समाज में मान
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,चंदौली
Updated Fri, 30 Nov 2018 12:37 AM IST
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महिलाओं को खुद एक दूसरे का सम्मान करना होगा तभी समाज में भी उन्हें मान मिलेगा। यह तभी संभव है जब शिक्षित और सजग होकर साहस के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ेंगी। तभी महिलाओं के प्रति सामाजिक बदलाव आएगा। इसकी शुरूआत खुद के घर से होगी। जिस दिन महिलाएं आर्थिक, सामाजिक और नैतिक दासता से मुक्त हो जाएंगी, वे समाज में बराबरी पर आ जाएगी। इसके लिए महिलाओं को शिक्षा को अपना हथियार बनाना होगा।
गुरुवार को अमर उजाला के अभियान ‘अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स’ के बैनर तले रविनगर स्थित अमर उजाला कार्यालय में आयोजित ‘बदलते सामाजिक परिवेश में महिलाओं की भूमिका और चुनौती’ विषय पर संवाद कार्यक्रम में महिलाओं ने खुलकर विचार रखे। कहा कि न तो महिलाओं को देवी बनाकर उनकी पूजा हो और न ही उन्हें दबा कुचला समझ कर दीन भाव से न देखा जाए। उन्हें बस समाज में बराबरी का अधिकार मिले। समाज अपने आप बदल जाएगा।
लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज शिक्षिका डॉ. इशरत जहां ने कहा कि महिलाओं को जीवन संघर्षों से भरा है, बावजूद उन्हें लक्ष्य विहीन माना जाता है। यही सबसे बड़ी चुनौती है। शिक्षित और आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनकर महिलाएं आर्थिक, सामाजिक और नैतिक दासता से मुक्त हो जाएगी, वे बराबरी पर आ जाएगी। शिक्षिका मांडवी शर्मा ने कहा कि पहले महिलाएं पुरुषों पर आश्रित थी लेकिन टेक्नालॉजी में बढ़ोत्तरी के बाद पुरुष महिलाओं पर आश्रित हो गए हैं।
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ऐसे में महिलाओं की चुनौती और बढ़ गई है। संध्या मिश्र ने कहा कि समाज बदलने के लिए सोच में बदलाव जरूरी है। बहु को बेटी के बराबर समझना होगा। बेटों को महिलाओं का सम्मान करना सिखाना होगा। तभी बदलाव का असर दिखेगा। लाल बहादुर शास्त्री बालिका इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य आभा सिंह ने कहा कि महिलाओं की लड़ाई खुद से है। महिला उत्थान के लिए कोई आगे नहीं आएगा, हमें ही आगे बढ़ना होगा। इस दौरान शिक्षिका शशिबाला चौबे, कविता बंसल, वासूकी गुप्ता, कृष्णा अग्रवाल, अंशु अग्रवाल, शशि अग्रवाल, लता राठौड़, सुनीता अग्रवाल, कविता शर्मा ने विचार व्यक्त किए।
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गुरुवार को अमर उजाला के अभियान ‘अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स’ के बैनर तले रविनगर स्थित अमर उजाला कार्यालय में आयोजित ‘बदलते सामाजिक परिवेश में महिलाओं की भूमिका और चुनौती’ विषय पर संवाद कार्यक्रम में महिलाओं ने खुलकर विचार रखे। कहा कि न तो महिलाओं को देवी बनाकर उनकी पूजा हो और न ही उन्हें दबा कुचला समझ कर दीन भाव से न देखा जाए। उन्हें बस समाज में बराबरी का अधिकार मिले। समाज अपने आप बदल जाएगा।
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लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज शिक्षिका डॉ. इशरत जहां ने कहा कि महिलाओं को जीवन संघर्षों से भरा है, बावजूद उन्हें लक्ष्य विहीन माना जाता है। यही सबसे बड़ी चुनौती है। शिक्षित और आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनकर महिलाएं आर्थिक, सामाजिक और नैतिक दासता से मुक्त हो जाएगी, वे बराबरी पर आ जाएगी। शिक्षिका मांडवी शर्मा ने कहा कि पहले महिलाएं पुरुषों पर आश्रित थी लेकिन टेक्नालॉजी में बढ़ोत्तरी के बाद पुरुष महिलाओं पर आश्रित हो गए हैं।
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ऐसे में महिलाओं की चुनौती और बढ़ गई है। संध्या मिश्र ने कहा कि समाज बदलने के लिए सोच में बदलाव जरूरी है। बहु को बेटी के बराबर समझना होगा। बेटों को महिलाओं का सम्मान करना सिखाना होगा। तभी बदलाव का असर दिखेगा। लाल बहादुर शास्त्री बालिका इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य आभा सिंह ने कहा कि महिलाओं की लड़ाई खुद से है। महिला उत्थान के लिए कोई आगे नहीं आएगा, हमें ही आगे बढ़ना होगा। इस दौरान शिक्षिका शशिबाला चौबे, कविता बंसल, वासूकी गुप्ता, कृष्णा अग्रवाल, अंशु अग्रवाल, शशि अग्रवाल, लता राठौड़, सुनीता अग्रवाल, कविता शर्मा ने विचार व्यक्त किए।