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पोस्टमार्टम के लिए भटका था डॉक्टर का परिवार
अमर उजाला ब्यूरो/बुलंदशहर
Updated Sat, 22 Oct 2016 11:36 PM IST
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पोस्टमार्टम के लिए भटका था डॉक्टर का परिवार
- फोटो : अमर उजाला
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मेहुल की हत्या के बाद उसके पिता और परिजन पोस्टमार्टम के लिए आधी रात तक अफसरों के घर-घर भटकते रहे। किसी से मुलाकात नहीं हो पाई। पता चलने पर रात में एक बजे डीएम ने सीएमओ को फोन कर पोस्टमार्टम के आदेश दिए। खास बात यह कि डीएम ने उस वक्त सभी अफसरों को फोन भी मिलाया लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।
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अनूपशहर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात डा. भूपेंद्र सिंह के पुत्र मेहुल की सोमवार रात अपहरण के बाद हत्या कर दी गई थी। सोमवार को उसका शव मिला। पुलिस कार्रवाई में दिन बीत गया। मजिस्ट्रेट की स्वीकृति के बिना रात में पोस्टमार्टम नहीं होता, इसलिए पीड़ित डॉक्टर का परिवार अनुमति के लिए बुलंदशहर पहुंचा।
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डॉक्टर परिवार पोस्टमार्टम का प्रार्थना पत्र लिए एडीएम वित्त, एडीएम प्रशासन, सिटी मजिस्ट्रेट, एसडीएम और तहसीलदार के आवास पर बारी-बारी से पहुंचा। वहां मुस्तैद गार्ड ने उन्हें साहब से मिलने नहीं दिया। ऐसे में डॉक्टर परिवार के एक परिचित ने रात में एक बजे डीएम को फोन कर सारी बात बताई।
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डीएम ने परिवार को तत्काल घर बुलाया और पोस्टमार्टम की अनुमति प्रदान कर दी। इसके बाद डीएम ने सभी मजिस्ट्रेट कोफोन किया। डीएम का फोन भी अफसरों ने रिसीव नहीं किया। बाद में डीएम ने सीएमओ को फोन किया। सीएमओ ने डीएम को आदेश मिलते ही पीएम की तैयारी की।
मजिस्ट्रेट्स को इंसानियत धर्म निभाना चाहिए था। उनकी गलती के लिए मैंने डाक्टर परिवार से इंसानियत की खातिर खेद प्रकट किया। आगे से ऐसा न हो इसलिए अफसरों को सख्त निर्देश भी दिए। - आंजनेय कुमार सिंह, डीएम, बुलंदशहर