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बुलंदशहर में भी गायत्री के भ्रष्टाचार की जड़ें
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर
Updated Mon, 12 Sep 2016 11:32 PM IST
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गायत्री
- फोटो : अमर उजाला
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जनपद में भी पूर्व खनन मंत्री गायत्री प्रसाद के भ्रष्टाचार की जड़ें जमी हुई हैं। अंदाजा आप लगा सकते हैं कि अप्रैल-2015 से अब तक जनपद में आधा दर्जन से अधिक खनन अधिकारियोें का तबादला किया गया, जो अफसर यहां से सस्पेंड हुए उन्हीं को फिर से बुलंदशहर भेजा गया।
इतना ही नहीं शासन ने तीन खनन दूतों को बुलंदशहर खनन विभाग में भेज रखा है। यह प्राइवेट कर्मचारी गायत्री प्रजापति के जनपद और आसपास के रहने वाले हैं। आलम यह है कि इन दूतों के बगैर एक भी फाइल पर साहब के हस्ताक्षर हो जाएं, ऐसा मुमकिन नहीं है।
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वर्ष 2013 में सरकार ने पूर्व खनन मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति को जनपद का प्रभारी बनाया था। वह बतौर प्रभारी एक बार जिला योजना की बोर्ड बैठक में शामिल हुए थे। हालांकि, बाद में बुलंदशहर का प्रभार गायत्री से हटा लिया गया। आरोप है कि पूर्व मंत्री के राज में बुलंदशहर में माइन की आड़ में खूब लूट-खसोट की गई। आलम यह रहा कि जो अफसर सफेदपोशों के इशारे पर काम नहीं करता उसे हटा दिया जाता।
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अप्रैल-2015 में खनन इंस्पेक्टर पीके सिंह को बुलंदशहर भेजा गया था। मई माह तक पीके सिंह बुलंदशहर में रहे। जून-2015 में आशीष कुमार को नोएडा से बुलंदशहर लाया गया। दुर्गा शक्ति नागपाल मामले में खनन इंस्पेक्टर आशीष को नोएडा से हटाया गया था। बुलंदशहर में भी आशीष कुमार को सस्पेंड कर दिया गया।
खास बात यह है कि सस्पेंशन के बावजूद आशीष को बुलंदशहर दोबारा भेज दिया गया। इसके बाद नवंबर-2015 में खनन अधिकारी डा. अभयरंजन को तैनात किया गया। दो माह बाद जनवरी 2016 में अभयरंजन का तबादला हो गया। जनवरी-2016 में डा. ऐदल सिंह खनन अधिकारी बने। ऐदल सिंह के ट्रांसफर के बाद मई-2016 में डा. अभयरंजन को फिर से बुलंदशहर भेज दिया गया।