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मिट्टी भरने के मामले मे कई अफसरों पर गिर सकती है गाज
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मिट्टी भरने के मामले मे कई अफसरों पर गिर सकती है गाज
बुलंदशहर। गंगा नगर में आवासीय योजना की हरित पट्टी में मिट्टी भराई के मामले में कई अफसरों पर गाज गिर सकती है। गंगा नगर में 12.68 लाख रुपये से अधिक का मिट्टी भराई का कार्य किया गया था। जिसमें लखनऊ की आडिट टीम ने घोटाला पकड़ा है। इसको लेकर बीडीए के अफसर अभी कुछ भी बोलने से इंकार कर रहे है।
बीडीए द्वारा गंगानगर कालोनी का विकास किया गया था। इस दौरान वहां पर फ्लैट्स, पार्क, सड़क और कई सरकारी आवास भी बनाए गए थे। इसके बाद भी बीडीए का यह भी आदेश है कि हरित पट्टिका में लैंड स्कैपिंग नहीं की जा सकती है। लेकिन नियमों को ताक पर रखकर ठेकेदार व संबंधित अफसरों ने हरित पट्टिका में मिट्टी भरवाई गई थी। 2015 से 2017 तक यह सारा खेल चलाया गया था। जिसके बारे में शासन द्वारा जारी की गई वार्षिक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है। बताया कि इससे मिट्टी भराई का काम नियमों के विपरीत 12.68 लाख से अधिक के भुगतान का मामला ऑडिट टीम ने पकड़ा है। वहीं, बीडीए के अफसरों ने इस बारे में बात की गई तो उनको इस मामले में कुछ भी पता नहीं है। बताया जा रहा है कि संबंधित ठेकेदार को मिट्टी भराई का भुगतान भी आनन फानन में ही किया गया था। जिसके बारे में किसी को कुछ भी पता नहीं है।
कई अफसरों पर गिर सकती है गाज
विभागीय सूत्रों द्वारा बताया जा रहा है कि अगर बीडीए के अफसरों ने इस मामले की निष्पक्ष जांच कर ली तो उस समय के कई अफसरों पर गाज गिरना तय है। जो भी जल्द ही जांच में सामने आ जाएगा। बताया कि बहराल इस मामले को लेकर संबंधित अफसरों के रंग जरूर उड़ चुका होगा।
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कोट
मामला संज्ञान में आया है, इसकी फाइल मंगवाई गई है। फाइल देखकर मामले की जांच की जाएगी। इस मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। - मोहम्मद शफाकत कमाल, उपाध्यक्ष, बीडीए
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बुलंदशहर। गंगा नगर में आवासीय योजना की हरित पट्टी में मिट्टी भराई के मामले में कई अफसरों पर गाज गिर सकती है। गंगा नगर में 12.68 लाख रुपये से अधिक का मिट्टी भराई का कार्य किया गया था। जिसमें लखनऊ की आडिट टीम ने घोटाला पकड़ा है। इसको लेकर बीडीए के अफसर अभी कुछ भी बोलने से इंकार कर रहे है।
बीडीए द्वारा गंगानगर कालोनी का विकास किया गया था। इस दौरान वहां पर फ्लैट्स, पार्क, सड़क और कई सरकारी आवास भी बनाए गए थे। इसके बाद भी बीडीए का यह भी आदेश है कि हरित पट्टिका में लैंड स्कैपिंग नहीं की जा सकती है। लेकिन नियमों को ताक पर रखकर ठेकेदार व संबंधित अफसरों ने हरित पट्टिका में मिट्टी भरवाई गई थी। 2015 से 2017 तक यह सारा खेल चलाया गया था। जिसके बारे में शासन द्वारा जारी की गई वार्षिक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है। बताया कि इससे मिट्टी भराई का काम नियमों के विपरीत 12.68 लाख से अधिक के भुगतान का मामला ऑडिट टीम ने पकड़ा है। वहीं, बीडीए के अफसरों ने इस बारे में बात की गई तो उनको इस मामले में कुछ भी पता नहीं है। बताया जा रहा है कि संबंधित ठेकेदार को मिट्टी भराई का भुगतान भी आनन फानन में ही किया गया था। जिसके बारे में किसी को कुछ भी पता नहीं है।
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कई अफसरों पर गिर सकती है गाज
विभागीय सूत्रों द्वारा बताया जा रहा है कि अगर बीडीए के अफसरों ने इस मामले की निष्पक्ष जांच कर ली तो उस समय के कई अफसरों पर गाज गिरना तय है। जो भी जल्द ही जांच में सामने आ जाएगा। बताया कि बहराल इस मामले को लेकर संबंधित अफसरों के रंग जरूर उड़ चुका होगा।
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मामला संज्ञान में आया है, इसकी फाइल मंगवाई गई है। फाइल देखकर मामले की जांच की जाएगी। इस मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। - मोहम्मद शफाकत कमाल, उपाध्यक्ष, बीडीए