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महिला अस्पताल में महीनों से खराब पड़ी लिफ्ट
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महिला अस्पताल में महीनों से खराब पड़ी लिफ्ट
बुलंदशहर। जिला महिला अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को उस नाजुक दौर में लाया जाता हैं, जब परिवार का प्रत्येक सदस्य उनका बेहद ख्याल रखना चाहता हैं लेकिन इस अवस्था में भी उनसे व गर्भवती महिला से सीढ़ियों द्वारा लेबर रूम तक चढ़वाया जाता है या फिर महिला को स्ट्रेचर पर लेटाकर लेबर रूम तक तीमारदार द्वारा खींचकर ले जाया जाता है। ऐसे में न सिर्फ तीमारदारों को परेशानी होती है, बल्कि उनके भी लेबर रूम तक जाने में पसीने छूट जाते हैं। जबकि अस्पताल में एक नहीं दो-दो लिफ्ट लगी हुई हैं, जो गत दो माह से अधिक समय से खराब पड़ी हैं।
जिला अस्पताल परिसर स्थित सौ शैय्यायुक्त मैटरनिटी विंग करोड़ों की लागत से बनाया गया था और मेटरनिटी विंग के निर्माण को चार साल से अधिक का समय बीत चुका हैं। जिसमें जिला महिला अस्पताल के जर्जर होने पर दो वर्ष पूर्व मैटरनिटी विंग में शिफ्ट कर दिया गया था। जिसके बाद से मैटरनिटी विंग में धरातल पर ओपीडी का संचालन शुरू हो गया था। वहीं, पहली मंजिल पर लेबर रूम, दूसरी मंजिल पर एसएनसीयू वार्ड और तीसरी मंजिल पर वार्ड (प्रसव के बाद भर्ती) बना हुआ हैं। तीसरी मंजिल तक आने जाने के लिए विंग में जीना और रेम्प की सुविधा की गई, साथ ही तीन मंजिल तक परिसर में दो लिफ्ट भी लगी हुई हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अफसरों ने व्यवस्था करने के साथ यह नहीं सोचा कि इमरजेंसी (नाजुक) के समय गर्भवती महिलाएं ऊपरी मंजिल तक कैसे पहुंचेंगी। क्योंकि एक लिफ्ट का जहां नाममात्र ही संचालन हुआ है और दूसरी लिफ्ट समय-समय पर खराब होती रहती हैं। इसके बाद गर्भवती महिलाओं को या तो जीना से चढ़वाया जाता है या फिर स्ट्रेचर पर लिटाकर या पैदल ऊपर तक ले जाया जाता हैं। इस दौरान अगर कोई बात हो जाए तो इसका जिम्मेदार कौन होगा, इसकी गारंटी नहीं हैं।
अफसरों के निरीक्षण में भी खराब मिल चुकी है लिफ्ट - गर्भवती महिलाओं को जहां समय-समय पर लिफ्ट खराब होने पर पैदल जाना पड़ता हैं। वहीं, कई बार प्रशासनिक अफसरों के निरीक्षण में भी लिफ्ट खराब मिल चुकी हैं। इसके बाद भी इस ओर अफसरों का कोई ध्यान नहीं है और न ही कोई समाधान कर रहे हैं। जिसका खामियाजा तीमारदार और गर्भवती महिला को उठाना पड़ रहा हैं।
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लेबर रूम में शॉर्ट सर्किट के दौरान हो चुकी है भगदड़ - गत चार माह पूर्व लेबर रूम में शॉर्ट सर्किट होने पर गर्भवती महिलाएं और तीमारदारों के बीच भगदड़ की घटना हो चुकी हैं। इस दौरान लिफ्ट न चलने पर रैंप और जीने से सभी को आना पड़ा। जिसमें तीन से अधिक महिलाएं चोटिल भी हुई थी। इस संबंध में अस्पताल की सीएमएस से वार्ता करने का प्रयास किया गया। लेकिन व्यस्तता बताते हुए वार्ता नहीं हो सकी।
डॉ. केएन तिवारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी - मामला संज्ञान में है। लिफ्ट को सही कराने के लिए कंपनी को दो बार पत्र भेजा जा चुका है। साथ ही वार्ता की जा रही है। अगर कंपनी द्वारा निर्धारित समय तक लिफ्ट को सही नही किया जाता है तो जुर्माना लगाया जाएगा। -
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बुलंदशहर। जिला महिला अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को उस नाजुक दौर में लाया जाता हैं, जब परिवार का प्रत्येक सदस्य उनका बेहद ख्याल रखना चाहता हैं लेकिन इस अवस्था में भी उनसे व गर्भवती महिला से सीढ़ियों द्वारा लेबर रूम तक चढ़वाया जाता है या फिर महिला को स्ट्रेचर पर लेटाकर लेबर रूम तक तीमारदार द्वारा खींचकर ले जाया जाता है। ऐसे में न सिर्फ तीमारदारों को परेशानी होती है, बल्कि उनके भी लेबर रूम तक जाने में पसीने छूट जाते हैं। जबकि अस्पताल में एक नहीं दो-दो लिफ्ट लगी हुई हैं, जो गत दो माह से अधिक समय से खराब पड़ी हैं।
जिला अस्पताल परिसर स्थित सौ शैय्यायुक्त मैटरनिटी विंग करोड़ों की लागत से बनाया गया था और मेटरनिटी विंग के निर्माण को चार साल से अधिक का समय बीत चुका हैं। जिसमें जिला महिला अस्पताल के जर्जर होने पर दो वर्ष पूर्व मैटरनिटी विंग में शिफ्ट कर दिया गया था। जिसके बाद से मैटरनिटी विंग में धरातल पर ओपीडी का संचालन शुरू हो गया था। वहीं, पहली मंजिल पर लेबर रूम, दूसरी मंजिल पर एसएनसीयू वार्ड और तीसरी मंजिल पर वार्ड (प्रसव के बाद भर्ती) बना हुआ हैं। तीसरी मंजिल तक आने जाने के लिए विंग में जीना और रेम्प की सुविधा की गई, साथ ही तीन मंजिल तक परिसर में दो लिफ्ट भी लगी हुई हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अफसरों ने व्यवस्था करने के साथ यह नहीं सोचा कि इमरजेंसी (नाजुक) के समय गर्भवती महिलाएं ऊपरी मंजिल तक कैसे पहुंचेंगी। क्योंकि एक लिफ्ट का जहां नाममात्र ही संचालन हुआ है और दूसरी लिफ्ट समय-समय पर खराब होती रहती हैं। इसके बाद गर्भवती महिलाओं को या तो जीना से चढ़वाया जाता है या फिर स्ट्रेचर पर लिटाकर या पैदल ऊपर तक ले जाया जाता हैं। इस दौरान अगर कोई बात हो जाए तो इसका जिम्मेदार कौन होगा, इसकी गारंटी नहीं हैं।
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अफसरों के निरीक्षण में भी खराब मिल चुकी है लिफ्ट - गर्भवती महिलाओं को जहां समय-समय पर लिफ्ट खराब होने पर पैदल जाना पड़ता हैं। वहीं, कई बार प्रशासनिक अफसरों के निरीक्षण में भी लिफ्ट खराब मिल चुकी हैं। इसके बाद भी इस ओर अफसरों का कोई ध्यान नहीं है और न ही कोई समाधान कर रहे हैं। जिसका खामियाजा तीमारदार और गर्भवती महिला को उठाना पड़ रहा हैं।
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लेबर रूम में शॉर्ट सर्किट के दौरान हो चुकी है भगदड़ - गत चार माह पूर्व लेबर रूम में शॉर्ट सर्किट होने पर गर्भवती महिलाएं और तीमारदारों के बीच भगदड़ की घटना हो चुकी हैं। इस दौरान लिफ्ट न चलने पर रैंप और जीने से सभी को आना पड़ा। जिसमें तीन से अधिक महिलाएं चोटिल भी हुई थी। इस संबंध में अस्पताल की सीएमएस से वार्ता करने का प्रयास किया गया। लेकिन व्यस्तता बताते हुए वार्ता नहीं हो सकी।
डॉ. केएन तिवारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी - मामला संज्ञान में है। लिफ्ट को सही कराने के लिए कंपनी को दो बार पत्र भेजा जा चुका है। साथ ही वार्ता की जा रही है। अगर कंपनी द्वारा निर्धारित समय तक लिफ्ट को सही नही किया जाता है तो जुर्माना लगाया जाएगा। -